सरकारी चावल घोटाले का खुलासा! 6700 टन कस्टम मिल्ड राइस गायब, 24.3 करोड़ का नुकसान
तेलंगाना में सरकारी धान और चावल से जुड़े बड़े घोटाले का खुलासा हुआ है. एक राइस मिल से 6,700 टन से अधिक CMR और सरकारी धान गायब मिला, जिसकी कीमत 24.3 करोड़ रुपये आंकी गई है. वहीं, सूर्यापेट की दो अन्य राइस मिलों में भी करीब 69 करोड़ रुपये के धान की कथित गड़बड़ी सामने आई है.
Rice Scam: तेलंगाना में चावल घोटाले का खुलासा हुआ है. तेलंगाना स्टेट सिविल सप्लाईज कॉरपोरेशन लिमिटेड (TGSCSCL) ने आरोप लगाया है कि एक राइस मिल से 6,700 मीट्रिक टन कस्टम मिल्ड राइस (CMR) गायब हो गया है. इसकी अनुमानित कीमत 24.3 करोड़ रुपये बताई गई है. इस मामले में निगम ने भुवनगिरि ग्रामीण थाने में शिकायत दर्ज कराई है. शिकायत के अनुसार, अनंतराम गांव स्थित एम/एस यादवद्री राइस इंडस्ट्रीज को 2022-23 और 2024-25 खरीफ मार्केटिंग सीजन के दौरान सरकारी धान दिया गया था. मिल को समझौते के तहत धान की मिलिंग कर सरकार को तय मात्रा में कस्टम मिल्ड राइस (CMR) लौटाना था. लेकिन जांच में पता चला कि बड़ी मात्रा में चावल गायब है. अब पुलिस मामले की जांच कर रही है और यह पता लगाया जा रहा है कि चावल कहां गया और इसके लिए कौन जिम्मेदार है.
शिकायत में कहा गया है कि यादाद्री राइस इंडस्ट्रीज के मालिक नूने वेंकटेश्वरलु को सरकार की ओर से धान मिलिंग के लिए दिया गया था. समझौते के अनुसार, वह सरकारी धान की सुरक्षित रखरखाव और उससे तैयार होने वाले कस्टम मिल्ड राइस (CMR) को सरकार को वापस सौंपने के लिए जिम्मेदार थे. धान का मालिकाना हक पूरे समय तेलंगाना स्टेट सिविल सप्लाईज कॉरपोरेशन (TGSCSCL) के पास ही था.
मामले की शिकायत पुलिस में दर्ज कराई
द न्यू इंडियन एक्सप्रेस की रिपोर्ट के मुताबिक, 4 जुलाई 2026 को भारतीय खाद्य निगम (FCI) के अधिकारियों और सिविल सप्लाई विभाग की प्रवर्तन टीम ने राइस मिल में मौजूद धान और चावल के स्टॉक का संयुक्त निरीक्षण किया. यह जांच रबी 2024-25 सीजन के बकाया CMR की आपूर्ति के लिए समय बढ़ाने की प्रक्रिया के तहत की गई थी. इसी जांच के दौरान स्टॉक में बड़ी गड़बड़ी सामने आई, जिसके बाद मामले की शिकायत पुलिस में दर्ज कराई गई.
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बड़ी मात्रा में सरकारी धान गायब होना गंभीर मामला है
जांच के दौरान अधिकारियों को स्टॉक में भारी गड़बड़ी मिली. रिकॉर्ड के अनुसार राइस मिल में 6,688.808 मीट्रिक टन सरकारी धान होना चाहिए था, लेकिन मौके पर केवल 160 मीट्रिक टन धान ही मिला. इस तरह 6,776.244 मीट्रिक टन सरकारी धान की कमी पाई गई. न्यूनतम समर्थन मूल्य (MSP) के आधार पर इस धान की कीमत करीब 24.31 करोड़ रुपये आंकी गई है. अधिकारियों का कहना है कि इतनी बड़ी मात्रा में सरकारी धान गायब होना गंभीर मामला है, जिसकी जांच की जा रही है.
वज्र विकास राइस मार्ट में अचानक निरीक्षण
शिकायत के आधार पर भोंगिर ग्रामीण पुलिस ने राइस मिल के मालिक नूने वेंकटेश्वरलु समेत पांच लोगों के खिलाफ भारतीय न्याय संहिता (BNS) और आवश्यक वस्तु अधिनियम (Essential Commodities Act) की संबंधित धाराओं के तहत मामला दर्ज किया है. पुलिस अब इस पूरे मामले की जांच कर रही है. इसी तरह का एक और मामला सूर्यापेट जिले में भी सामने आया है. नलगोंडा जिला सतर्कता एवं प्रवर्तन (Vigilance and Enforcement) और सिविल सप्लाई विभाग की संयुक्त टीम ने बल्लेमला गांव स्थित वज्र राइस कॉरपोरेशन और वज्र विकास राइस मार्ट में अचानक निरीक्षण किया.
29,187.888 मीट्रिक टन धान का स्टॉक गायब मिला
जांच के दौरान रिकॉर्ड और वास्तविक स्टॉक में भारी अंतर मिला. अधिकारियों के मुताबिक, वज्र राइस कॉरपोरेशन में 11,073.054 मीट्रिक टन और वज्र विकास राइस मार्ट में 18,114.834 मीट्रिक टन धान कम पाया गया. यानी दोनों मिलों में मिलाकर 29,187.888 मीट्रिक टन धान का स्टॉक गायब मिला. शुरुआती जांच में इस कथित गड़बड़ी की कीमत करीब 69 करोड़ रुपये आंकी गई है. मामले की विस्तृत जांच जारी है.