43 फीसदी घटा तंबाकू उत्पादन लक्ष्य, किसानों की बढ़ी टेंशन.. अब विकल्प और राहत का इंतजार

आंध्र प्रदेश में तंबाकू बोर्ड ने 2026-27 सीजन के लिए उत्पादन लक्ष्य 43 फीसदी घटा दिया है, जिससे किसान चिंतित हैं. उनका कहना है कि कम उत्पादन से लागत निकालना मुश्किल होगा. किसान अवैध तंबाकू खेती पर कार्रवाई और दूसरी लाभदायक फसलों के लिए सरकारी सहायता की मांग कर रहे हैं.

नोएडा | Updated On: 28 Jul, 2026 | 08:22 AM

Tobacco Farming: आंध्र प्रदेश में तंबाकू बोर्ड द्वारा अगले सीजन के लिए तंबाकू उत्पादन का लक्ष्य (क्रॉप साइज) कम किए जाने के बाद किसान चिंता में हैं. कई किसान अब दूसरी फसलों की तलाश कर रहे हैं. साथ ही वे राज्य सरकार और तंबाकू बोर्ड से बिना लाइसेंस तंबाकू उगाने वाले किसानों के खिलाफ कार्रवाई की मांग कर रहे हैं. किसानों का कहना है कि उत्पादन कम होने से उनकी आय प्रभावित होगी, जबकि खेती और तंबाकू सुखाने वाले बार्न (Barn) के रखरखाव का खर्च पहले जैसा ही रहेगा. ऐसे में कम उत्पादन के साथ लागत निकालना मुश्किल हो जाएगा. किसानों का कहना है कि उनके पास फिलहाल कोई बेहतर विकल्प भी नहीं है, जिससे अगले सीजन की तैयारी को लेकर असमंजस की स्थिति बनी हुई है.

हालांकि, किसान तंबाकू बोर्ड के फैसले का विरोध नहीं कर रहे हैं. उनका कहना है कि बाजार में तंबाकू की अधिक आपूर्ति  (ओवर सप्लाई), ब्राजील और अफ्रीकी देशों से बढ़ती प्रतिस्पर्धा तथा घरेलू मांग में गिरावट के कारण बोर्ड को यह फैसला लेना पड़ा. इसके अलावा कई किसानों ने तय सीमा से अधिक उत्पादन किया, जिससे बाजार में तंबाकू की भरमार हो गई और कीमतों पर दबाव बढ़ गया.

तंबाकू उत्पादन लक्ष्य में बड़ी कटौती

बाजार में तंबाकू की अधिक आपूर्ति और घटती मांग को देखते हुए तंबाकू बोर्ड ने 2026-27 सीजन के लिए उत्पादन लक्ष्य में बड़ी कटौती की है. आंध्र प्रदेश में उत्पादन लक्ष्य 14.2 करोड़ किलोग्राम (142 मिलियन किग्रा) से घटाकर 8.1 करोड़ किलोग्राम (81 मिलियन किग्रा) कर दिया गया है, यानी करीब 43 फीसदी की कमी की गई है. वहीं, कर्नाटक में भी लक्ष्य 10 करोड़ किलोग्राम से घटाकर 5.1 करोड़ किलोग्राम कर दिया गया है, जो पिछले साल की तुलना में 44 फीसदी कम है.

केंद्रीय वाणिज्य मंत्रालय के तहत काम करने वाला तंबाकू बोर्ड हर साल वैश्विक बाजार की मांग और आपूर्ति का आकलन करने के बाद उत्पादन लक्ष्य  तय करता है. बोर्ड का उद्देश्य एफसीवी (फ्लू-क्योर्ड) तंबाकू का उत्पादन नियंत्रित करना और किसानों को उचित दाम दिलाना है. यदि लाइसेंसधारी किसान तय सीमा से अधिक उत्पादन करते हैं, तो नीलामी के दौरान उन पर जुर्माना भी लगाया जाता है. फेडरेशन ऑफ ऑल इंडिया फार्मर एसोसिएशन (FAIFA) के अध्यक्ष पी.एस. मुरली बाबू ने अंग्रेजी अखबार बिजनेसलाइन से कहा कि किसान बोर्ड के फैसले की वजह को समझते हैं, क्योंकि बाजार में तंबाकू की अधिक आपूर्ति है. हालांकि, उन्होंने सरकार से मांग की कि किसानों को दूसरी लाभदायक फसलों की पहचान करने और उनकी खेती अपनाने के लिए ठोस रणनीति और सहायता उपलब्ध कराई जाए.

तंबाकू बोर्ड से बिना लाइसेंस तंबाकू की खेती

आंध्र प्रदेश के एलुरु जिले के तंबाकू किसान विवेकानंद ने सरकार और तंबाकू बोर्ड से बिना लाइसेंस तंबाकू की खेती करने वाले किसानों पर सख्त कार्रवाई की मांग की है. उनका कहना है कि ये किसान हर साल करीब 20 लाख किलोग्राम तंबाकू बाजार में लाते हैं और लगभग 230 रुपये प्रति किलोग्राम के भाव पर बेचते हैं. इससे बाजार का संतुलन बिगड़ता है और लाइसेंसधारी किसानों को नुकसान उठाना पड़ता है. उन्होंने सुझाव दिया कि अवैध रूप से उगाए गए तंबाकू को जब्त किया जाए और उसकी बिक्री से मिलने वाली राशि का बड़ा हिस्सा तंबाकू उत्पादक कल्याण कोष में जमा कराया जाए, ताकि इसका लाभ किसानों को मिल सके.

मुख्यमंत्री एन. चंद्रबाबू नायडू ने दिए निर्देश

इस बीच, आंध्र प्रदेश के मुख्यमंत्री एन. चंद्रबाबू नायडू ने अधिकारियों को तंबाकू किसानों  की समस्याओं के समाधान के लिए अल्पकालिक, मध्यम अवधि और दीर्घकालिक रणनीति तैयार करने के निर्देश दिए हैं. उन्होंने यह भी कहा कि ऐसी व्यवस्था पर विचार किया जाए, जिससे तंबाकू का सुरक्षित भंडारण हो सके और किसान बाजार में बेहतर दाम मिलने पर अपनी उपज बेच सकें.

Published: 28 Jul, 2026 | 08:16 AM

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