बारिश के बाद टमाटर फट रहे हैं तो हो जाएं सावधान! एक गलती से बिगड़ सकती है पूरी फसल

मॉनसून में बारिश के बाद तेज धूप और मिट्टी की नमी में अचानक बदलाव से टमाटर फटने की समस्या बढ़ जाती है. सूखी मिट्टी में एक साथ ज्यादा पानी, बोरॉन की कमी और जलभराव इसके प्रमुख कारण हैं. किसान सिंचाई, पोषण, मल्चिंग और जल निकासी पर ध्यान देकर नुकसान घटा सकते हैं.

नोएडा | Published: 11 Aug, 2026 | 08:36 AM

मॉनसून का मौसम टमाटर की खेती करने वाले किसानों के लिए जितना फायदेमंद है, उतनी ही सावधानी की भी मांग करता है. बारिश के बाद तेज धूप निकलने और खेत में नमी के स्तर में अचानक बदलाव होने से टमाटर के फल फटने की समस्या बढ़ जाती है. शुरुआत में मामूली दिखने वाली यह परेशानी धीरे-धीरे बढ़कर उत्पादन और फल की गुणवत्ता दोनों को प्रभावित कर सकती है. ऐसे में किसानों को सिंचाई, पोषण और जल निकासी पर विशेष ध्यान देने की जरूरत है.

डॉ. रजनीश मिश्रा, संयुक्त निदेशक (बागवानी) के अनुसार, मानसून के दौरान टमाटर के फलों में दरार पड़ने की समस्या मुख्य रूप से मिट्टी की नमी में अचानक होने वाले बदलाव के कारण होती है. लंबे समय तक खेत सूखा रहने के बाद एक साथ ज्यादा पानी मिलने से फल तेजी से बढ़ने लगते हैं. लेकिन फल की बाहरी त्वचा उतनी तेजी से नहीं फैल पाती, जिसके कारण टमाटर चटकने लगते हैं.

सूखी मिट्टी में अचानक न भरें ज्यादा पानी

टमाटर के फलों को फटने  से बचाने के लिए खेत में नमी का संतुलन बनाए रखना सबसे जरूरी है. अगर खेत लंबे समय तक सूखा रहा और इसके बाद भारी बारिश या अधिक सिंचाई हो गई, तो पौधे अचानक बड़ी मात्रा में पानी ग्रहण करते हैं. इसका सीधा असर फलों की वृद्धि पर पड़ता है और टमाटर फट सकते हैं. किसानों को बारिश के दौरान जरूरत के हिसाब से ही सिंचाई करनी चाहिए. खेत में पानी जमा होने से रोकने के लिए उचित जल निकासी की व्यवस्था भी जरूरी है. खेत में अतिरिक्त पानी लंबे समय तक जमा रहने पर पौधों की जड़ों को नुकसान पहुंच सकता है और दूसरी समस्याएं भी बढ़ सकती हैं.

बोरॉन की कमी भी बन सकती है बड़ी वजह

टमाटर के फल फटने की समस्या में पोषक तत्वों की कमी  भी अहम भूमिका निभाती है. खासकर बोरॉन की कमी होने पर फलों की बाहरी त्वचा कमजोर हो सकती है, जिससे उनमें दरार पड़ने की संभावना बढ़ जाती है. बचाव के लिए किसानों को फसल में संतुलित पोषण देना चाहिए. बोरॉन की कमी होने पर 2 ग्राम बोरॉन प्रति लीटर पानी के घोल का छिड़काव लाभकारी हो सकता है. इसके अलावा कैल्शियम नाइट्रेट का उचित मात्रा में छिड़काव भी फलों की मजबूती बनाए रखने में मदद कर सकता है. किसी भी पोषक तत्व का प्रयोग मिट्टी और फसल की आवश्यकता के अनुसार ही करना चाहिए.

मल्चिंग अपनाएं, गुलाबी अवस्था में तोड़ें फल

बारिश के मौसम  में खेत में मल्चिंग अपनाने से मिट्टी की नमी को काफी हद तक संतुलित रखने में मदद मिलती है. इससे बारिश और तेज धूप के कारण मिट्टी में नमी के अचानक होने वाले बदलाव को कम किया जा सकता है. किसानों को खेत की नियमित निगरानी करते हुए फटे हुए या खराब फलों को समय पर अलग कर देना चाहिए. टमाटर की तुड़ाई भी सही अवस्था में करना जरूरी है. फलों को पूरी तरह लाल होने तक खेत में रखने के बजाय गुलाबी अवस्था में तोड़ना बेहतर रहता है. इसके साथ ही किसानों को ऐसी उन्नत और हाइब्रिड किस्मों का चयन करना चाहिए, जो फल फटने की समस्या के प्रति अपेक्षाकृत सहनशील हों. सही किस्म, संतुलित सिंचाई, जल निकासी और पोषण प्रबंधन अपनाकर किसान मानसून में टमाटर के फटने से होने वाले नुकसान को काफी हद तक कम कर सकते हैं.

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