बेमौसम बारिश से गेहूं की फसल चौपट, कृषि विभाग ने जारी की एडवाइजरी.. किसान जल्द करें ये काम
हिमाचल के कांगड़ा क्षेत्र में बेमौसम बारिश से गेहूं की फसल को भारी नुकसान हुआ है. कटाई प्रभावित हुई है और किसान चिंतित हैं. कृषि विभाग ने पानी निकासी की सलाह दी है. फसल बीमा योजना के तहत किसानों को 72 घंटे में नुकसान की सूचना देने को कहा गया है.
Himachal Pradesh New: पिछले कुछ दिनों से रूक-रूक कर हो रही बारिश से केवल हरियाणा, पंजाब और राजस्थान में ही गेहूं फसल को नुकसान नहीं पहुंचा है, बल्कि हिमाचल प्रदेश के किसान भी इससे प्रभावित हुए हैं. खासकर बेमौसम बारिश के चलते कांगड़ा के नूरपुर, इंदौरा, फतेहपुर और नागरोटा सूरियां में गेहूं की फसल को ज्यादा नुकसान पहुंचा है. इन इलाकों के किसानों का कहना है कि गेहूं की कटाई शुरू ही होने वाली थी, लेकिन बारिश से फसल चौपट हो गई है. अब धूप निकलने पर फिर से कटाई शुरू करेंगे. हालांकि, कांगड़ा के ऊपरी इलाकों में जहां गेहूं की बुवाई जनवरी में हुई थी, वहां यह बारिश किसानों के लिए कुछ राहत लेकर आई है.वहीं, कृषि विभाग ने किसानों के लिए एडवाइजरी जारी की है. एजवाइजरी में किसानों को खेतों में पानी निकासी की सही व्यवस्था करने की सलाह दी है.
वहीं, किसान पिछले एक हफ्ते से जारी बारिश के कारण चिंतित हैं. उनका कहना है कि अगर मौसम ऐसे ही खराब रहा, तो उन्हें भारी नुकसान उठाना पड़ सकता है. नवंबर-दिसंबर में बोई गई फसल अब पकने की अवस्था में है, ऐसे में लगातार बारिश से जलभराव और फसल गिरने का खतरा बढ़ गया है, जिससे पैदावार और गुणवत्ता दोनों प्रभावित हो सकते हैं. हालांकि, कांगड़ा के ऊपरी इलाकों में जहां गेहूं की बुवाई जनवरी में हुई थी, वहां यह बारिश किसानों के लिए कुछ राहत लेकर आई है.
क्या कहते हैं कृषि विशेषज्ञ
कृषि विशेषज्ञों का कहना है कि जनवरी में देर से बोई गई फसलों के लिए इस समय हल्की बारिश फायदेमंद होती है, खासकर लंबे सूखे के बाद. लेकिन वे चेतावनी देते हैं कि लगातार बारिश और तेज हवाएं निचले इलाकों में पक रही गेहूं की फसल के लिए नुकसानदायक हो सकती हैं. खेतों में पानी भरने से जड़ें कमजोर हो जाती हैं और फसल गिरने का खतरा बढ़ जाता है, जिससे नुकसान और कटाई की लागत दोनों बढ़ सकती हैं. जो किसान कटाई की तैयारी कर रहे थे, वे अब बारिश, ओलावृष्टि और तेज हवाओं के डर से परेशान हैं.
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कृषि विभाग ने जारी की एडवाइजरी
पालमपुर के उप कृषि निदेशक कुलदीप धीमान ने द ट्रिब्यून से कहा कि किसानों को सलाह दी है कि वे खेतों में पानी निकासी की सही व्यवस्था करें, ताकि जलभराव से बचा जा सके और फसल को नुकसान कम हो. उन्होंने किसानों से अपील की है कि प्राकृतिक आपदा से फसल को नुकसान होने पर तुरंत नजदीकी कृषि या राजस्व विभाग के अधिकारियों को इसकी सूचना दें. प्रधानमंत्री फसल बीमा योजना (PMFBY) के तहत बीमित किसानों को सलाह दी गई है कि वे नुकसान होने के 72 घंटे के भीतर राष्ट्रीय टोल-फ्री नंबर 14447 पर कॉल करके जानकारी दें, ताकि मुआवजे की प्रक्रिया शुरू हो सके. साथ ही उन्होंने किसानों को अपनी हर अनाज फसल का बीमा करवाने की भी सलाह दी है.
गिरदावरी करने के लिए गांव स्तर पर सर्वे टीमों का गठन
वहीं, उत्तर प्रदेश में गौतम बुद्ध नगर प्रशासन ने गिरदावरी करने के लिए गांव स्तर पर सर्वे टीमों का गठन किया है. गौतम बुद्ध नगर प्रशासन का कहना है गांव-गांव में जाकर टीम के लोग फसल नुकसान का सर्वे करेंगे. उन्होंने कहा कि एक भी प्रभावित किसान न छूटे, इसका पूरा खयाल रखा जाएगा. अधिकारियों का कहना है कि हाल के दिनों में हुई बेमौसम बारिश से जिले की रबी फसलों को नुकसान होने की आशंका है.