यूरिया के दाम धड़ाम, सरकार खरीद बढ़ाने पर कर रही विचार.. वैश्विक सप्लायरों में हड़कंप
भारत के 17 लाख टन यूरिया आयात टेंडर में दाम 50 फीसदी से ज्यादा गिरकर युद्ध-पूर्व स्तर से भी नीचे पहुंच गए हैं. सरकार खरीद बढ़ाने पर विचार कर रही है. चीन समेत वैश्विक सप्लायर कम कीमतों से चिंतित हैं. L1 बोली के आधार पर अंतिम फैसला और बाजार संकेत जल्द आने की उम्मीद है.
Urea Import: किसानों के लिए राहत भरी खबर है. खरीफ सीजन के बीच यूरिया की वैश्विक कीमतों में बड़ी गिरावट देखने को मिली है. हाल ही में नेशनल फर्टिलाइजर लिमिटेड (NFL) के टेंडर में भी पिछले महीनों की तुलना में काफी कम दाम सामने आए हैं. इससे किसानों को समय पर पर्याप्त खाद मिलने की उम्मीद बढ़ी है और सरकार के सब्सिडी खर्च में भी कमी आ सकती है.
दरअसल, नेशनल फर्टिलाइजर लिमिटेड (NFL) ने 27 मई को 17 लाख टन यूरिया खरीद के लिए टेंडर जारी किया था. इस टेंडर में कंपनियों ने प्रति टन 444 से 605 डॉलर के बीच बोली लगाई. यह कीमतें पिछली बार 959 डॉलर प्रति टन की तुलना में काफी कम हैं. इस टेंडर में 30 से ज्यादा कंपनियों ने हिस्सा लिया, जिससे बाजार में कड़ी प्रतिस्पर्धा देखने को मिली. ऐसे में 17 लाख टन यूरिया आयात टेंडर में उम्मीद से काफी कम दाम मिलने के बाद सरकार अब खरीद बढ़ाने पर विचार कर रही है, लेकिन यह तभी होगा जब सप्लायर मौजूदा कम कीमतों पर ही आपूर्ति करें.
8 जून को खोले गए इस टेंडर में जो कीमतें सामने आई हैं, वे भारतीय पोटाश लिमिटेड (IPL) की पिछली खरीद से 50 प्रतिशत से भी ज्यादा कम हैं और ये दरें अब रूस-यूक्रेन युद्ध से पहले के स्तर से भी नीचे चली गई हैं. दरअसल, अप्रैल में जब सरकार ने 25 लाख टन यूरिया आयात का फैसला किया था, तब भारतीय पोटाश लिमिटेड (IPL) को सबसे कम बोली पश्चिमी तट के लिए 935 डॉलर प्रति टन और पूर्वी तट के लिए 959 डॉलर प्रति टन मिली थी. हालांकि, कीमतों में आई इस बड़ी गिरावट से वैश्विक उर्वरक सप्लायर्स में चिंता बढ़ गई है.
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निर्यात दोबारा शुरू करने की योजना बनाई
बिजनेसलाइन की रिपोर्ट के मुताबिक, चीन ने मई में यूरिया का निर्यात दोबारा शुरू करने की योजना बनाई थी, ताकि अंतरराष्ट्रीय बाजार में कीमतें बढ़ सकें, लेकिन अब कम दामों की वजह से वह इस फैसले पर फिर से सोच-विचार कर रहा है. एक टेंडर प्रतिभागी के मुताबिक, बीजिंग में चीन के प्रतिनिधि संकेत दे रहे हैं कि इतने कम दामों पर बिक्री करना उनके लिए मुश्किल है. फिलहाल अंतिम फैसला सबसे कम बोली (L1) लगाने वाले सप्लायर पर निर्भर है और बाजार की स्थिति को लेकर आज शाम तक और साफ संकेत मिलने की उम्मीद है.
बाजार में बड़ी हलचल
तुलना करें तो युद्ध से पहले भी फरवरी के मध्य में सार्वजनिक क्षेत्र की कंपनी RCF को यूरिया आयात के लिए लगभग 508 डॉलर प्रति टन (पश्चिमी तट) और 512 डॉलर प्रति टन (पूर्वी तट) के ऑफर मिले थे. मौजूदा दरें इन सभी स्तरों से काफी नीचे हैं, जिससे बाजार में बड़ी हलचल देखी जा रही है. सरकार मौजूदा 17 लाख टन के मुकाबले यूरिया आयात की मात्रा बढ़ाने पर विचार कर रही है, अगर बाकी सप्लायर L1 (सबसे कम) दरों पर आपूर्ति करने को तैयार होते हैं. अधिकारियों के अनुसार रबी सीजन की जरूरतों को देखते हुए और अप्रैल- मई में घबराहट में हुई ज्यादा बिक्री के कारण देश में यूरिया की मांग बढ़ गई है.
पश्चिमी तट के लिए अमेरोपा एशिया ने सबसे कम बोली लगाते हुए 449.30 डॉलर प्रति टन की दर पर 2.34 लाख टन की पेशकश की है. सूत्रों के मुताबिक, अगर सरकार पश्चिमी तट का 9 लाख टन का लक्ष्य बढ़ाती है, तो सबसे कम बोली लगाने वाले (L1) सप्लायर को पहले पूरी अतिरिक्त मात्रा देने का मौका मिलेगा. अगर वह इनकार करता है, तो बाकी कंपनियों को उनकी बोली के क्रम में L1 दर पर आपूर्ति के लिए कहा जाएगा.
आदित्य बिड़ला ने कितनी लगाई बोली
इसी तरह पूर्वी तट के लिए आदित्य बिड़ला ग्लोबल ट्रेडिंग (ABGT) ने 5 लाख टन के लिए सबसे कम 444.90 डॉलर प्रति टन की बोली लगाई है. यदि सरकार पूर्वी तट पर शुरुआती 8 लाख टन से ज्यादा खरीद बढ़ाती है, तो पहले ABGT को अतिरिक्त सप्लाई का अवसर मिलेगा. अगर ABGT पूरी मात्रा देने से मना करता है, तो बाकी कंपनियों को भी L1 दर पर सप्लाई के लिए कहा जाएगा.