ततैया ने किसानों को दिलाया कसावा कीट से छुटकारा, कीटनाशक पर खर्च होने वाले 286 करोड़ बचे
कृषि क्षेत्र में जैविक कीट नियंत्रण की एक बड़ी सफलता सामने आई है. वैज्ञानिकों की पहल से किसानों को फसल नुकसान से राहत मिली है और खेती की लागत भी घटी है. इस तकनीक ने न केवल आर्थिक फायदा पहुंचाया बल्कि पर्यावरण संरक्षण और टिकाऊ खेती को भी नई मजबूती दी है.
Cassava Mealybug: जैविक कीट नियंत्रण की एक बड़ी सफलता ने किसानों को न केवल फसल नुकसान से बचाया है, बल्कि रासायनिक कीटनाशकों पर होने वाले भारी खर्च में भी कमी लाई है. भारतीय कृषि अनुसंधान परिषद (ICAR) के अनुसार, कसावा फसल को नुकसान पहुंचाने वाले आक्रामक कीट कसावा मिलीबग (Phenacoccus manihoti) के नियंत्रण के लिए ततैया आधारित जैविक उपाय अपनाए गए, जिससे किसानों को हजारों करोड़ रुपये का आर्थिक लाभ मिला है.
कसावा मिलीबग बना था किसानों के लिए बड़ी चुनौती
कसावा मिलीबग एक खतरनाक रस चूसने वाला कीट है, जो कसावा पौधों की पत्तियों और तनों से पोषक तत्व चूस लेता है. इसके कारण पौधों की वृद्धि रुक जाती है और उत्पादन में भारी गिरावट आती है. यह कीट तेजी से फैलता है और फसल को व्यापक नुकसान पहुंचाने की क्षमता रखता है. किसानों को इससे बचाव के लिए लगातार रासायनिक कीटनाशकों का उपयोग करना पड़ता था, जिससे लागत भी बढ़ रही थी.
जैविक नियंत्रण से मिला प्रभावी समाधान
ICAR के वैज्ञानिकों ने इस समस्या के समाधान के लिए प्राकृतिक शत्रु ततैया का उपयोग किया. इस जैविक नियंत्रण तकनीक के तहत लाभकारी ततैया को खेतों में छोड़ा गया, जो कसावा मिलीबग को नियंत्रित करती है. यह तरीका पर्यावरण के अनुकूल होने के साथ-साथ लंबे समय तक प्रभावी रहने वाला समाधान साबित हुआ. वैज्ञानिकों का कहना है कि जैविक नियंत्रण से कीट की आबादी को प्राकृतिक रूप से संतुलित रखा जा सकता है.
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किसानों को मिला 3,480 करोड़ रुपये का आर्थिक लाभ
ICAR के आंकड़ों के मुताबिक, कसावा मिलीबग के जैविक नियंत्रण से देश को लगभग 3,480 करोड़ रुपये का आर्थिक लाभ प्राप्त हुआ है. फसल उत्पादन में सुधार, नुकसान में कमी और बेहतर गुणवत्ता के कारण किसानों की आय में उल्लेखनीय वृद्धि दर्ज की गई. यह उपलब्धि दर्शाती है कि वैज्ञानिक अनुसंधान और नवाचार सीधे किसानों की आय बढ़ाने में महत्वपूर्ण भूमिका निभा सकते हैं.
कीटनाशकों पर खर्च में 286 करोड़ रुपये की बचत
जैविक नियंत्रण अपनाने का एक बड़ा फायदा यह भी रहा कि किसानों की रासायनिक कीटनाशकों पर निर्भरता कम हुई. ICAR के अनुसार, कीटनाशकों के उपयोग में कमी आने से हर साल लगभग 286 करोड़ रुपये की अतिरिक्त बचत हो रही है. इससे उत्पादन लागत घटने के साथ-साथ पर्यावरण और मानव स्वास्थ्य पर पड़ने वाले दुष्प्रभाव भी कम हुए हैं.
टिकाऊ कृषि की दिशा में बड़ा कदम
विशेषज्ञों का मानना है कि ये सफलता टिकाऊ और पर्यावरण-अनुकूल कृषि की दिशा में एक महत्वपूर्ण उदाहरण है. जैविक कीट प्रबंधन न केवल किसानों की लागत कम करता है, बल्कि मिट्टी, जल और जैव विविधता की भी रक्षा करता है. ICAR की यह पहल दिखाती है कि विज्ञान आधारित कृषि नवाचार किसानों के कल्याण और देश की खाद्य सुरक्षा को मजबूत बनाने में अहम योगदान दे सकते हैं.