खरीफ फसलों पर मौसम की मार, एक्सपर्ट ने किसानों को उपज बचाव के तरीके बताए
Kharif crops Tips: खरीफ सीजन में किसानों को रकबा बढ़ाने के बजाय खेतों में पहले से मौजूद फसलों के स्वास्थ्य और उत्पादकता की सुरक्षा पर ध्यान अधिक केंद्रित करना होगा. अलग-अलग क्षेत्रों में खेत-स्तर पर किसानों को अलग-अलग चुनौतियां पैदा हो सकती हैं, जिससे फसल की नियमित निगरानी और समय पर सही कदम उठाना जरूरी है.
मौसम में बदलाव और अनियमित बारिश के चलते इस बार फसलों का बुवाई रकबा घट गया है. खरीफ सीजन में कुल बुवाई रकबा पिछले साल के मुकाबले 1.73 फीसदी घटकर 1,071.10 लाख हेक्टेयर रह गया है. दालों का रकबा जरूर 1.22 फीसदी बढ़ा है, लेकिन चावल, मोटे अनाज और तिलहन की बुवाई में कमी दर्ज हुई है. अल नीनो के असर से खेत की मिट्टी में नमी भी तेजी से घट रही है, जबकि बढ़ते कीटों और बीमारियों ने किसानों के सामने फसल बचाने की चुनौती बढ़ा दी है. कृषि क्षेत्र की दिग्गज कंपनी धनुका एग्रीटेक के चेयरमैन ने किसानों को फसलों में संतुलित पोषण, वैज्ञानिक तरीके से फसल सुरक्षा और समय पर निगरानी से ही प्रति हेक्टेयर उत्पादन को मजबूत करने की सलाह दी है.
धनुका एग्रीटेक लिमिटेड के चेयरमैन एम.के. धनुका ने बयान में कहा कि कृषि मंत्रालय के ताजा खरीफ सीजन की फसलों की बुवाई रिपोर्ट के अनुसार खरीफ की बुवाई के नवीनतम आंकड़ों से पता चलता है कि 28 अगस्त तक कुल बुवाई का रकबा 1,071.10 लाख हेक्टेयर रहा, जो पिछले साल इसी अवधि की तुलना में लगभग 1.73 फीसदी कम है. हालांकि कुल रकबा पिछले साल के स्तर से थोड़ा कम है, लेकिन फसल-वार रुझान मिली-जुली तस्वीर पेश करते हैं. दालों में 1.22 फीसदी की वृद्धि देखी गई है, जबकि चावल, मोटे अनाज और तिलहन का रकबा पिछले साल की तुलना में कम है.
मौसम बदलाव से किसानों के लिए बढ़ने लगीं चुनौतियां
मौसम के इस चरण में ध्यान रकबा बढ़ाने के बजाय खेतों में पहले से मौजूद फसलों के स्वास्थ्य और उत्पादकता की सुरक्षा पर अधिक केंद्रित होना चाहिए. जैसे-जैसे खरीफ का मौसम आगे बढ़ रहा है, बारिश का वितरण, मिट्टी की नमी और फसल की अवस्था उपज की क्षमता तय करने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाएंगे. मौसम की स्थितियों में बदलाव से अलग-अलग क्षेत्रों में खेत-स्तर पर अलग-अलग चुनौतियां पैदा हो सकती हैं, जिससे फसल की नियमित निगरानी और समय पर सही कदम उठाना विशेष रूप से महत्वपूर्ण हो जाता है.
फसल सुरक्षा के लिए संतुलित पोषण और वैज्ञानिक तरीका अपनाएं
चेयरमैन एम.के. धनुका ने बयान में कहा कि उन्होंने कहा कि अल नीनो के चलते अनियमित बारिश और मौसम बदलावों से फसलों के बचाव के लिए किसानों को संतुलित फसल पोषण, वैज्ञानिक फसल सुरक्षा और उचित कृषि-तरीकों पर ध्यान देना चाहिए ताकि कीटों और बीमारियों के दबाव को नियंत्रित किया जा सके और फसल चक्र के बाकी समय में फसल का स्वस्थ विकास पक्का किया जा सके.
हर हेक्टेयर में उत्पादन से तय होगी खरीफ सीजन की सफलता
इस खरीफ मौसम की सफलता न केवल खेती के तहत लाए गए क्षेत्र से, बल्कि हर हेक्टेयर से प्राप्त उत्पादकता से तय होगी. किसानों को अपनी फसलों की सुरक्षा करने, संभावित उपज के नुकसान को कम करने और कृषि उत्पादकता को मजबूत करने में मदद करने के लिए गुणवत्तापूर्ण इनपुट, वैज्ञानिक मार्गदर्शन और क्षेत्र-विशिष्ट फसल प्रबंधन प्रथाओं तक समय पर पहुंच पक्का करना जरूरी होगा. किसानों में निरंतर जागरूकता और वैज्ञानिक कृषि-तरीकों को अपनाना एक अधिक लचीला और उत्पादक कृषि इकोसिस्टम बनाने की कुंजी बना रहेगा.