गन्ने पर व्हाइट ग्रब कीट का हमला, फसल को नुकसान.. किसानों ने की 4000 रुपये टन मुआवजे की मांग
तमिलनाडु के धर्मपुरी जिले में कम बारिश और व्हाइट ग्रब कीट के प्रकोप से गन्ने की खेती गंभीर संकट में है. किसान सूखती फसल मवेशियों को खिलाने को मजबूर हैं. 1,500 हेक्टेयर से अधिक फसल नुकसान की आशंका है. किसानों ने 4,000 रुपये प्रति टन मुआवजे और सूखा व कीटरोधी गन्ना किस्में उपलब्ध कराने की मांग की है.
Tamil Nadu farmers: तमिलनाडु के धर्मपुरी जिले में इस साल गन्ने की खेती को बड़ा नुकसान होने की आशंका है. कम बारिश और व्हाइट ग्रब (बीटल कीट का लार्वा) के प्रकोप से जिले में गन्ने की फसल तेजी से खराब हो रही है. धर्मपुरी में हर साल औसतन करीब 6,500 हेक्टेयर क्षेत्र में गन्ने की खेती होती है. लेकिन पानी की कमी और सिंचाई सुविधाओं के अभाव के कारण पिछले कुछ वर्षों से इसका रकबा लगातार घट रहा है. इसका असर धर्मपुरी कोऑपरेटिव शुगर मिल के संचालन पर भी पड़ा है. वहीं, किसानों ने राज्य सरकार से गन्ने के लिए 4,000 रुपये प्रति टन मुआवजे की मांग की है.
वहीं, हरूर की सुब्रमणिया शिवा कोऑपरेटिव शुगर मिल को अब तक थेनपेन्नई नदी और पर्याप्त जल भंडारण का फायदा मिलता रहा है, इसलिए यहां गन्ने की खेती की स्थिति अन्य इलाकों के मुकाबले बेहतर रही है. लेकिन इस बार दक्षिण-पश्चिम मॉनसून की कमी और व्हाइट ग्रब के प्रकोप से पूरे जिले में गन्ने की खेती बुरी तरह प्रभावित हुई है. इसके चलते दोनों चीनी मिलों के संचालन पर भी संकट मंडरा रहा है. किसानों का कहना है कि खेतों में गन्ने के पौधे सूख रहे हैं और कई जगह फसल बचाना मुश्किल हो गया है. मजबूरी में किसान सूख रहे गन्ने को मवेशियों को खिला रहे हैं.
पानी की कमी के कारण गन्ने की फसल प्रभावित
पप्पिरेड्डिपट्टी के किसान पी. मुरली ने द न्यू इंडियन एक्सप्रेस से कहा कि कम बारिश और पानी की कमी के कारण गन्ने की फसल प्रभावित हो रही है. वहीं, व्हाइट ग्रब कीट के कारण गन्ने अंदर से सड़ने लगे हैं. गर्म मौसम में इन कीटों की संख्या बढ़ने से हरूर और पप्पिरेड्डिपट्टी क्षेत्रों के खेतों में इसका असर दिखाई दे रहा है. हरूर के किसान जी. उदयकुमार ने कहा कि इस बार किसानों को पूरी फसल बर्बाद होने का डर है. उन्होंने चीनी मिलों से ऐसी गन्ना किस्में उपलब्ध कराने की मांग की है, जो सूखे और कीटों के हमले को सहन कर सकें. किसानों का कहना है कि कुछ खेतों में तीन महीने पुरानी फसल भी पानी की कमी और कीटों के कारण खराब हो रही है.
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4,000 रुपये प्रति टन मुआवजे की मांग
किसानों ने दावा किया कि अल नीनो के असर से 80 फीसदी से ज्यादा गन्ने के खेत प्रभावित हुए हैं. कुछ किसान कुएं के पानी से फसल बचाने की कोशिश कर रहे हैं, लेकिन आने वाले समय में उनके सामने भी संकट बढ़ सकता है. किसानों ने राज्य सरकार से गन्ने के लिए 4,000 रुपये प्रति टन मुआवजे की मांग की है. उनका कहना है कि कृषि विभाग की फसल बीमा योजना पर उन्हें भरोसा नहीं है. किसानों ने चेतावनी दी कि अगर मदद नहीं मिली तो वे गन्ने की खेती छोड़ने को मजबूर हो सकते हैं.
1,500 हेक्टेयर गन्ने की फसल खराब हो सकती है
सुब्रमणिया शिवा कोऑपरेटिव शुगर मिल की प्रबंध निदेशक आर. प्रिया ने कहा कि कम बारिश का असर गन्ने की खेती पर पड़ा है. किसानों को पानी बचाने और बेहतर प्रबंधन की तकनीक बताई जा रही है. उन्होंने अनुमान जताया कि जिले में करीब 1,500 हेक्टेयर गन्ने की फसल खराब हो सकती है और बारिश नहीं होने पर नुकसान और बढ़ सकता है. हालांकि, धर्मपुरी कोऑपरेटिव शुगर मिल, पलाकोड की एमडी मेघना ने कहा कि पलाकोड क्षेत्र में सूखे का ज्यादा असर नहीं पड़ा है और गन्ने की खेती सामान्य रूप से चल रही है.