Haryana News: हरियाणा के धान उत्पादक क्षेत्रों में फिजी वायरस (Southern Rice Black-Streaked Dwarf Virus) की वापसी से किसानों की चिंता बढ़ गई है. पिछले साल की तरह इस बार भी धान की फसल को नुकसान पहुंचने की आशंका जताई जा रही है. वायरस के मामले सामने आने के बाद कृषि एवं किसान कल्याण विभाग और चौधरी चरण सिंह हरियाणा कृषि विश्वविद्यालय, कौल के वैज्ञानिकों ने खेतों का निरीक्षण शुरू कर दिया है और निगरानी बढ़ा दी है. साथ ही फसल को नुकसान से बचाने के लिए सलाह भी जारी की गई है.
जानकारी के अनुसार, फिजी वायरस अब तक कैथल, करनाल, कुरुक्षेत्र, अंबाला और यमुनानगर जिलों के कुछ हिस्सों में पाया गया है. कृषि विभाग इन मामलों की जांच कर रहा है. वहीं किसानों का कहना है कि बीमारी का असर खड़ी धान की फसल पर दिखने लगा है. कुछ किसानों ने नुकसान से बचने के लिए प्रभावित खेतों में लगी धान की फसल को दोबारा जुताई कर दी है.
किसानों ने प्रभावित धान की फसल को नष्ट कर दिया
हरियाणा में धान की फसल पर फिजी वायरस का खतरा एक बार फिर बढ़ गया है. पिछले साल इस वायरस से कैथल, करनाल, कुरुक्षेत्र, अंबाला, यमुनानगर और जींद जिलों में धान की फसल को काफी नुकसान हुआ था. अब दोबारा संक्रमण मिलने से किसानों की चिंता बढ़ गई है. भारतीय किसान यूनियन (BKU) के अध्यक्ष सेव सिंह आर्य ने द ट्रिब्यून से कहा कि पिछले साल फिजी वायरस से किसानों को भारी नुकसान उठाना पड़ा था. इस बार भी वायरस का असर धान की फसल पर दिखने लगा है. कुछ किसानों ने प्रभावित धान की फसल को नष्ट कर दिया है. उन्होंने सरकार से वायरस को फैलने से रोकने के लिए तुरंत कदम उठाने की मांग की है.
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10-15 गांवों से अलग-अलग किस्मों के सैंपल लिए गए
कौल स्थित रीजनल राइस रिसर्च स्टेशन के निदेशक डॉ. मेहर चंद ने बताया कि इस वायरस का पहला मामला क्षेत्र में 2022 में सामने आया था. इसके बाद 2025 में यह फिर सक्रिय हुआ और अब दोबारा इसके मामले सामने आ रहे हैं. हरियाणा में धान की फसल में फिजी वायरस की निगरानी के लिए कृषि वैज्ञानिकों ने जांच अभियान तेज कर दिया है. वैज्ञानिकों के मुताबिक, धान की रोपाई से पहले कैथल जिले के 10-15 गांवों से अलग-अलग किस्मों के पौधों के सैंपल लिए गए थे. लैब जांच में इनमें वायरस की पुष्टि नहीं हुई थी. अब रोपाई के बाद वैज्ञानिकों की टीम ने करीब 25 गांवों का दौरा किया है, जहां कुछ खेतों में वायरस जैसे लक्षण दिखाई दिए हैं. वैज्ञानिकों ने बताया कि पूरे राज्य में स्थिति पर नजर रखी जा रही है और बीमारी के फैलाव की जांच के लिए हर सैंपल का परीक्षण किया जा रहा है.
किसानों को दी गई खास सलाह
वैज्ञानिकों ने किसानों को सलाह दी है कि वे खेतों में नियमित निगरानी रखें और संक्रमित पौधों को तुरंत हटा दें. साथ ही कृषि विशेषज्ञों से सलाह लेकर ही उपाय करें. किसानों को धान की नर्सरी को खरपतवार और चारा फसलों से मुक्त रखने, खेतों की साफ-सफाई बनाए रखने, जलभराव रोकने और बेहतर जल निकासी की व्यवस्था करने की सलाह दी गई है. कीट नियंत्रण के लिए किसानों को अनुशंसित कीटनाशकों का छिड़काव करने और फसल में बीमारी के शुरुआती लक्षणों की जांच करते रहने को कहा गया है.