केंद्र सरकार ने इस सीजन में छठी बार प्याज की सरकारी खरीद कीमत बढ़ा दी है. अब प्याज की खरीद 23.35 रुपये प्रति किलो की दर से होगी. ऐसा इसलिए किया गया है क्योंकि बफर स्टॉक के लिए तय किए गए संशोधित लक्ष्य के मुकाबले अब तक कम खरीद हो पाई है. अधिकारियों के मुताबिक, सरकार आने वाले महीनों में प्याज की संभावित कमी और कीमतों में तेजी से निपटने के लिए पर्याप्त बफर स्टॉक तैयार करना चाहती है. इसी वजह से खरीद अभियान को आगे बढ़ाया गया है और किसानों से ज्यादा मात्रा में प्याज खरीदने की कोशिश की जा रही है.
केंद्र सरकार ने 30 जुलाई से महाराष्ट्र में प्याज की सरकारी खरीद का न्यूनतम सुनिश्चित मूल्य (MAPP) बढ़ाकर 2,335 रुपये प्रति क्विंटल कर दिया है, जो 23.35 रुपये प्रति किलो है. उपभोक्ता मामले विभाग ने जारी आदेश में इसकी जानकारी दी. सरकार ने एक और बड़ा फैसला लेते हुए 30 जुलाई से ग्रेड-यूआरएस (Grade-URS) प्याज की खरीद बंद कर दी है. अब सरकारी एजेंसियां सिर्फ ग्रेड-ए (Grade-A) गुणवत्ता वाले प्याज की ही खरीद करेंगी. इस फैसले का मकसद बफर स्टॉक के लिए बेहतर गुणवत्ता का प्याज जुटाना है.
1.05 लाख टन प्याज की खरीद
केंद्र सरकार की एजेंसियों ने अब तक करीब 1.05 लाख टन प्याज की खरीद की है, जबकि 2026-27 के लिए 3 लाख टन बफर स्टॉक तैयार करने का लक्ष्य रखा गया है. यानी अब तक लक्ष्य का केवल एक हिस्सा ही पूरा हो पाया है. जानकारी के मुताबिक, सरकार खरीद का लक्ष्य पूरा करने के लिए प्याज खरीद की अंतिम तारीख 15 अगस्त तक बढ़ा सकती है, ताकि सरकारी एजेंसियां किसानों से अधिक मात्रा में प्याज खरीद सकें.
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प्याज की कीमतों में उछाल
सरकार मूल्य स्थिरीकरण कोष के तहत यह बफर स्टॉक तैयार करती है. इसका इस्तेमाल सितंबर से नवंबर के बीच जब बाजार में प्याज की आवक कम हो जाती है, तब किया जाता है. जरूरत पड़ने पर सरकार इस स्टॉक से प्याज बाजार में उतारती है, ताकि कीमतों में तेज बढ़ोतरी को रोका जा सके. सरकार ने ऐसे समय में प्याज की खरीद कीमत बढ़ाई है, जब देश में प्याज के दाम लगातार बढ़ रहे हैं. उपभोक्ता मामलों के मंत्रालय के आंकड़ों के मुताबिक, 29 जुलाई को देश में प्याज का औसत खुदरा भाव 35 रुपये प्रति किलो रहा. यह एक महीने पहले की तुलना में करीब 20 फीसदी और पिछले साल की तुलना में 25 फीसदी अधिक है.
प्याज का होलसेल रेट
वहीं, थोक बाजार में प्याज का औसत भाव 2,760 रुपये प्रति क्विंटल पहुंच गया है. इसमें भी पिछले महीने और पिछले साल की तुलना में अच्छी बढ़ोतरी दर्ज की गई है. हालांकि, सरकार का कहना है कि फिलहाल प्याज की उपलब्धता पर्याप्त है. उपभोक्ता मामलों के मंत्रालय के अनुसार, महाराष्ट्र, मध्य प्रदेश और गुजरात में प्याज का पर्याप्त स्टॉक मौजूद है और अभी किसी तरह की कमी के संकेत नहीं हैं.
प्याज की आपूर्ति घट सकती है
लेकिन कृषि विशेषज्ञों का मानना है कि आने वाले समय में बाजार में प्याज की आपूर्ति घट सकती है, जिससे कीमतों में और तेजी आ सकती है. विशेषज्ञों का कहना है कि प्याज की फसल के भंडारण के दौरान करीब 30 फीसदी तक नुकसान हो रहा है. इसके अलावा, पर्याप्त स्टोरेज सुविधाओं की कमी से भी बाजार में अच्छी गुणवत्ता वाले प्याज की उपलब्धता कम हो गई है.
प्याज उत्पादन 3.07 करोड़ टन रहने का अनुमान
उपभोक्ता मामलों के मंत्रालय ने 5 जुलाई को जारी अपने बयान में कहा था कि हाल के दिनों में प्याज की कीमतों में आई तेजी की मुख्य वजह महाराष्ट्र और मध्य प्रदेश के कुछ हिस्सों में सामान्य से कम बारिश के कारण बढ़ी सट्टेबाजी है, न कि बाजार में प्याज की तत्काल कमी. वहीं, कृषि एवं किसान कल्याण विभाग के दूसरे अग्रिम अनुमान के अनुसार, 2025-26 में देश का प्याज उत्पादन 3.07 करोड़ टन रहने का अनुमान है, जो पिछले वर्ष के 3.08 करोड़ टन के लगभग बराबर है.