किसानों की बढ़ेगी कमाई, सरकार ने शुरू की ‘पशु किसान क्रेडिट कार्ड’ योजना..मिलेंगे ये फायदे

पशुपालन विभाग के निदेशक टी. दामोदर नायडू ने किसानों से अपील की है कि वे इस योजना का अधिक से अधिक लाभ उठाकर अपनी आय बढ़ाएं और आर्थिक रूप से आत्मनिर्भर बनें. उन्होंने कहा कि किसानों को ज्यादा ब्याज वाले निजी कर्ज से बचना चाहिए और बैंक से मिलने वाले सस्ते कर्ज का उपयोग बेहतर पशुधन, अच्छी गुणवत्ता वाले चारे और आधुनिक प्रबंधन में करना चाहिए.

नोएडा | Updated On: 21 Apr, 2026 | 07:03 PM

Animal Farmer Credit Card: आंध्र प्रदेश सरकार ने पशुपालकों की आर्थिक स्थिति मजबूत करने और पशुपालन क्षेत्र को बढ़ावा देने के लिए ‘पशु किसान क्रेडिट कार्ड (पीकेसीसी)’ योजना शुरू की है. इस योजना के तहत गाय, भैंस, बकरी, भेड़, सूअर और पोल्ट्री पालने वाले किसान कम ब्याज दर पर बैंक से आसानी से ऋण ले सकेंगे. पशुपालन विभाग के निदेशक टी. दामोदर नायडू ने कहा है कि इस योजना का मकसद किसानों को ऊंचे ब्याज पर कर्ज देने वाले निजी साहूकारों पर निर्भरता कम करना और पशुपालन को ज्यादा टिकाऊ व लाभकारी बनाना है.

पीकेसीसी योजना के तहत पात्र किसान  बिना किसी गारंटी के 1.60 लाख रुपये तक का लोन 7 फीसदी ब्याज दर पर ले सकते हैं. बैंकिंग नियमों के अनुसार, 3 लाख रुपये तक का लोन भी उपलब्ध है. अगर किसान एक साल के भीतर समय पर लोन चुका देते हैं, तो उन्हें 3 फीसदी ब्याज में छूट मिलेगी, जिससे वास्तविक ब्याज दर घटकर 4 फीसदी रह जाएगी.

किसानों को बैंक में जमा करने होंगे ये दस्तावेज

यह योजना राज्य के सभी पशुपालकों के लिए है, चाहे वे जमीन के मालिक हों या किराए पर पशुपालन कर रहे हों. साथ ही स्वयं सहायता समूहों के सदस्य भी इसका लाभ ले सकते हैं. आवेदन के लिए किसानों को नजदीकी बैंक शाखा में आधार कार्ड, भूमि रिकॉर्ड, पशुधन का विवरण, पासपोर्ट साइज फोटो और पशु चिकित्सक का प्रमाण पत्र जमा करना होगा.

किसान कहां करें लोन की राशि का इस्तेमाल

पशुपालन विभाग के निदेशक टी. दामोदर नायडू ने किसानों से अपील की है कि वे इस योजना का अधिक से अधिक लाभ उठाकर अपनी आय बढ़ाएं और आर्थिक रूप से आत्मनिर्भर बनें. उन्होंने कहा कि किसानों को ज्यादा ब्याज वाले निजी कर्ज  से बचना चाहिए और बैंक से मिलने वाले सस्ते कर्ज का उपयोग बेहतर पशुधन, अच्छी गुणवत्ता वाले चारे और आधुनिक प्रबंधन में करना चाहिए. उन्होंने विभाग के अधिकारियों को भी निर्देश दिए हैं कि वे इस योजना के बारे में ज्यादा से ज्यादा जागरूकता फैलाएं, ताकि अधिक किसान इसका लाभ ले सकें और इसे प्रभावी तरीके से लागू किया जा सके.

जागरूकता फैलाने के दिए निर्देश

उन्होंने विभाग के फील्ड स्टाफ को भी निर्देश दिया कि वे किसानों के बीच इस योजना के बारे में ज्यादा से ज्यादा जागरूकता फैलाएं. अधिकारियों का मानना है कि अगर ज्यादा किसान इस योजना से जुड़ते हैं, तो उनकी आय बढ़ेगी, वे आर्थिक रूप से आत्मनिर्भर बनेंगे और ग्रामीण क्षेत्रों का समग्र विकास भी तेजी से होगा. इसके अलावा, सरकार हर जिले में मनरेगा के तहत पांच गौशाला (पशु आश्रय स्थल) बनाएगी. हर गौशाला आधा एकड़ जमीन पर करीब 10 लाख रुपये की लागत से बनेगी, जिसमें 20- 25 बड़े पशुओं को रखने की व्यवस्था होगी. इसका उद्देश्य आवारा और छोड़े गए पशुओं की देखभाल करना और पशुपालन क्षेत्र को मजबूत बनाना है.

1.5 करोड़ मीट्रिक टन दूध का उत्पादन

बता दें कि आंध्र प्रदेश भारत के प्रमुख दूध उत्पादक  राज्यों में शामिल है और यह देश में चौथे या पांचवें स्थान पर आता है. यहां हर साल लगभग 1.5 करोड़ मीट्रिक टन से ज्यादा दूध का उत्पादन होता है. राज्य में 90 लाख से अधिक गायें और 1 करोड़ से ज्यादा भैंसें हैं, जो डेयरी उत्पादन में अहम योगदान देती हैं. इस पूरे डेयरी क्षेत्र से करीब 24 लाख किसान जुड़े हुए हैं, जिनकी आजीविका इसी पर निर्भर करती है.

Published: 21 Apr, 2026 | 05:03 PM

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