झींगा किसानों का फूटा गुस्सा, सड़क पर फेंका माल… उत्पादन बंद करने की चेतावनी
किसानों का कहना है कि यदि सरकार ने जल्द हस्तक्षेप नहीं किया तो वे मजबूरी में "क्रॉप हॉलिडे" यानी एक सीजन तक उत्पादन पूरी तरह बंद करने का फैसला ले सकते हैं. इससे न केवल किसानों की आय प्रभावित होगी बल्कि एक्वा उद्योग और निर्यात क्षेत्र पर भी असर पड़ सकता है.
Andhra Pradesh shrimp farmers: देश में एक्वा खेती यानी झींगा उत्पादन किसानों की आय का एक बड़ा स्रोत माना जाता है, लेकिन आंध्र प्रदेश के हजारों झींगा उत्पादक इन दिनों गंभीर आर्थिक संकट से गुजर रहे हैं. बढ़ती लागत और लगातार गिरते बाजार भाव के कारण किसानों का मुनाफा तेजी से घट रहा है. हालात इतने खराब हो गए हैं कि कई किसान आगामी मानसून सीजन में अपने तालाब खाली छोड़ने और उत्पादन बंद करने की चेतावनी दे रहे हैं.
किसानों का कहना है कि यदि सरकार ने जल्द हस्तक्षेप नहीं किया तो वे मजबूरी में “क्रॉप हॉलिडे” यानी एक सीजन तक उत्पादन पूरी तरह बंद करने का फैसला ले सकते हैं. इससे न केवल किसानों की आय प्रभावित होगी बल्कि एक्वा उद्योग और निर्यात क्षेत्र पर भी असर पड़ सकता है.
पांच साल से बढ़ रही लागत, नहीं मिल रहा उचित दाम
झींगा उत्पादकों का कहना है कि पिछले पांच वर्षों से उत्पादन लागत लगातार बढ़ रही है. सबसे बड़ी समस्या झींगा चारे (फीड) की कीमतों में लगातार हो रही बढ़ोतरी है. दूसरी ओर बाजार में झींगा के दाम लगातार घट रहे हैं. किसानों के अनुसार वर्तमान स्थिति में उत्पादन लागत निकालना भी मुश्किल हो गया है. कई किसानों का कहना है कि वे कर्ज लेकर खेती कर रहे हैं, लेकिन बिक्री के समय मिलने वाली कीमत लागत के मुकाबले काफी कम है. इसी वजह से किसानों में नाराजगी बढ़ती जा रही है और वे सरकार से राहत पैकेज तथा बाजार में हस्तक्षेप की मांग कर रहे हैं.
किसान संगठनों ने शुरू किया आंदोलन
आंध्र प्रदेश के पश्चिम गोदावरी और डॉ. बी.आर. अंबेडकर कोनासीमा जिलों में किसान संगठनों ने इस मुद्दे पर कई बैठकें की हैं. इन बैठकों में किसानों ने एकजुट होकर अपनी रणनीति तैयार की है. पालकोलु जय भारत क्षीर राम एक्वा फार्मर्स एसोसिएशन के नेतृत्व में किसानों ने विरोध प्रदर्शन भी शुरू कर दिया है. प्रदर्शन के दौरान किसानों ने सड़क पर झींगा फेंककर अपना गुस्सा जाहिर किया. इतना ही नहीं, कई जगहों पर उन्होंने लोगों को मुफ्त में झींगा बांटा ताकि सरकार और उद्योग जगत का ध्यान उनकी समस्याओं की ओर आकर्षित हो सके. किसानों का कहना है कि यदि समय रहते समाधान नहीं निकला तो वे बड़े स्तर पर आंदोलन शुरू कर सकते हैं.
झींगे के दाम में भारी गिरावट
किसान नेताओं के अनुसार पिछले कुछ समय में झींगे की कीमतों में लगभग 70 रुपये प्रति किलोग्राम तक की गिरावट आई है. इससे किसानों को भारी नुकसान उठाना पड़ रहा है.
किसानों का सवाल है कि जब उत्पादन लागत लगातार बढ़ रही है और बाजार में कीमतें घट रही हैं, तो वे अपनी मूल लागत भी कैसे निकालेंगे. उनका कहना है कि इस स्थिति में खेती जारी रखना आर्थिक रूप से संभव नहीं रह गया है. विशेषज्ञों का मानना है कि यदि कीमतों में सुधार नहीं हुआ तो कई किसान झींगा उत्पादन से दूरी बना सकते हैं.
उद्योग का पक्ष भी अलग
दूसरी ओर झींगा प्रोसेसिंग कंपनियों का कहना है कि कीमतों पर उनका सीधा नियंत्रण नहीं है. उनका तर्क है कि झींगा उद्योग काफी हद तक अंतरराष्ट्रीय बाजार पर निर्भर करता है. कंपनियों के प्रतिनिधियों का कहना है कि अमेरिका और अन्य देशों में मांग तथा वैश्विक प्रतिस्पर्धा के आधार पर कीमतें तय होती हैं. यदि भारतीय निर्यातक अधिक कीमत वसूलने की कोशिश करेंगे तो विदेशी खरीदार दूसरे देशों से झींगा खरीदना शुरू कर सकते हैं. इस कारण कंपनियां भी खुद को सीमित विकल्पों के बीच काम करने को मजबूर बता रही हैं.
फीड कंपनियों ने भी रखी अपनी बात
फीड कंपनियों का कहना है कि उनके सामने भी लागत बढ़ने की चुनौती है. उनका दावा है कि मौजूदा परिस्थितियों में चारे की कीमतों में लगभग 20 रुपये प्रति किलोग्राम तक बढ़ोतरी होनी चाहिए थी. हालांकि किसानों के दबाव और बाजार की स्थिति को देखते हुए उन्होंने केवल 8 रुपये प्रति किलोग्राम की वृद्धि की है. कंपनियों का कहना है कि कच्चे माल की कीमतें बढ़ने से उनकी लागत भी काफी बढ़ गई है.
प्रशासन ने की मध्यस्थता
किसानों के बढ़ते विरोध को देखते हुए पश्चिम गोदावरी जिले की कलेक्टर सी. नागरानी ने भीमावरम में एक अहम बैठक आयोजित की. इसमें किसान संगठनों, फीड कंपनियों और झींगा प्रोसेसिंग उद्योग के प्रतिनिधियों को बुलाया गया. बैठक के दौरान सभी पक्षों ने अपनी-अपनी समस्याएं और सुझाव रखे. प्रशासन ने किसानों से अपील की कि वे कोई कठोर कदम उठाने से पहले सरकार को समाधान निकालने का अवसर दें. कलेक्टर ने यह भी कहा कि किसानों की चिंताओं को राज्य सरकार तक पहुंचाया जाएगा और समाधान के लिए आवश्यक प्रयास किए जाएंगे.
जल्द होगा बड़ा फैसला
किसान नेताओं के अनुसार जल्द ही राज्य स्तर की एक बड़ी बैठक आयोजित की जाएगी. इस बैठक में “क्रॉप हॉलिडे” लागू करने या न करने पर अंतिम निर्णय लिया जाएगा. यदि किसान बड़े पैमाने पर तालाब खाली छोड़ने का फैसला लेते हैं तो इसका असर राज्य के एक्वा उद्योग, रोजगार और निर्यात आय पर पड़ सकता है. ऐसे में सरकार, उद्योग और किसानों के बीच संतुलित समाधान निकालना बेहद जरूरी हो गया है. फिलहाल आंध्र प्रदेश के झींगा किसान राहत की उम्मीद लगाए बैठे हैं और चाहते हैं कि सरकार उनकी समस्याओं को गंभीरता से लेकर जल्द ठोस कदम उठाए.