आंध्र प्रदेश के झींगा उत्पादकों की बढ़ेगी कमाई, रेसिप्रोकल टैक्स कम होने से निर्यात में आएगी तेजी

अप्रैल 2025 से पहले, अमेरिका को झींगा निर्यात पर कुल 10 फीसदी टैक्स लगता था, जिसमें 3.76 फीसदी एंटी-डंपिंग ड्यूटी (ADD) और 5.77 फीसदी काउंटरवेलिंग ड्यूटी (CVD) शामिल थी. लेकिन ट्रम्प प्रशासन ने 25 फीसदी रेसिप्रोकल टैक्स लगाया, जिसे अगस्त 2025 में और 25 फीसदी बढ़ा दिया गया.

Kisan India
नोएडा | Updated On: 4 Feb, 2026 | 04:36 PM

Andhra Pradesh New: आंध्र प्रदेश में एक्वाकल्चर यानी जल-खेती को फिर से बढ़ावा मिलने की उम्मीद है, क्योंकि अमेरिका ने झींगा (श्रीम्प) के निर्यात पर लगाए गए रेसिप्रोकल टैक्स को कम कर दिया है. इससे राज्य के लाखों जल-कृषि किसानों को राहत मिली है, जो पिछले साल आर्थिक अनिश्चितता में फंसे थे. राज्य में लगभग 8 लाख लोग मुख्य रूप से किसान, मजदूर और व्यापारी एक्वाकल्चर पर निर्भर हैं. ट्रम्प प्रशासन के दौरान यह टैक्स 7 फीसदी से बढ़ाकर लगभग 60 फीसदी कर दिया गया था, जिससे निर्यात प्रभावित हुआ और किसानों के सामने खेती जारी रखने या बंद करने का संकट खड़ा हो गया. अमेरिका भारत के एक्वाकल्चर उत्पादों का सबसे बड़ा बाजार है, जिसमें आंध्र प्रदेश की हिस्सेदारी 80-90 फीसदी है.

भारत में सालाना लगभग 12-14 लाख मीट्रिक टन एक्वाकल्चर उत्पाद तैयार होते हैं, जिसमें झींगा 8-10 लाख टन है. आंध्र प्रदेश अकेले 5-6 लाख टन झींगा देता है. झींगा की प्रोसेसिंग (सिर हटाना, छीलना और डेवाइनिंग) के बाद निर्यात योग्य मात्रा करीब 30 फीसदी कम हो जाती है. भारत-यूएस व्यापार समझौते  के बाद अब रेसिप्रोकल टैक्स घटाकर 18 फीसदी कर दिया गया है, जिससे कुल टैक्स बोझ 28 फीसदी रह गया है.

झींगा निर्यात में तेज गिरावट आई है

द न्यू इंडियन एक्सप्रेस की रिपोर्ट के मुताबिक, अप्रैल 2025 से पहले, अमेरिका को झींगा निर्यात पर कुल 10 फीसदी टैक्स लगता था, जिसमें 3.76 फीसदी एंटी-डंपिंग ड्यूटी (ADD) और 5.77 फीसदी काउंटरवेलिंग ड्यूटी (CVD) शामिल थी. लेकिन ट्रम्प प्रशासन ने 25 फीसदी रेसिप्रोकल टैक्स लगाया, जिसे अगस्त 2025 में और 25 फीसदी बढ़ा दिया गया, जिससे कुल टैक्स लगभग 60 फीसदी हो गया और झींगा निर्यात में तेज गिरावट  आई.

उद्योग को फिर से जीवित होने का अवसर मिलेगा

आंध्र प्रदेश सी फूड एक्सपोर्टर्स एसोसिएशन के सचिव दिलीप ने कहा कि इस टैक्स में कमी एक्वाकल्चर उद्योग और किसानों के लिए बड़ा बढ़ावा होगी. भारी टैक्स के कारण इस क्षेत्र को गंभीर संकट का सामना करना पड़ा था. चूंकि हमारी अधिकांश निर्यात अमेरिका के लिए होती है, इसलिए कोई और देश इस बाजार की बराबरी नहीं कर सकता. चीन और यूरोपीय देशों के बाजार में कम कीमतें मांगी जाती हैं, जो टिकाऊ व्यवसाय के लिए संभव नहीं. इस फैसले से उद्योग को फिर से जीवित होने का अवसर मिलेगा.

एक्वाकल्चर सेक्टर को मजबूत समर्थन दिया

उन्होंने कराकि संकट के दौरान मुख्यमंत्री एन. चंद्रबाबू नायडू और प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने एक्वाकल्चर सेक्टर  को मजबूत समर्थन दिया, जिससे किसानों और निर्यातकों को संकट से बाहर आने में मदद मिली. आंध्र प्रदेश स्टेट एक्वाकल्चर डेवलपमेंट अथॉरिटी के उपाध्यक्ष अनाम वेंकट रामा रेड्डी ने कहा कि भारत-यूएस ट्रेड डील से एक्वाकल्चर सेक्टर को नई ऊर्जा मिलेगी और किसानों को बड़ा लाभ होगा. राज्य सरकार भी इस क्षेत्र की सुरक्षा और समर्थन के लिए विशेष कदम उठा रही है.

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Published: 4 Feb, 2026 | 04:23 PM

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