झींगा चारे की बढ़ती कीमतों से परेशान किसान, आंध्र प्रदेश सरकार ने केंद्र से मांगी मदद

खारे पानी में मत्स्यपालन पर काम करने वाले वैज्ञानिक संस्थान के विशेषज्ञों  के अनुसार, जनवरी से मई 2026 के बीच चारे में इस्तेमाल होने वाले प्रमुख कच्चे माल की कीमतों में भारी बढ़ोतरी हुई है. विशेषज्ञों के मुताबिक सोया, मछली पाउडर और मछली तेल जैसे जरूरी उत्पाद पहले के मुकाबले काफी महंगे हो गए हैं.

Kisan India
नई दिल्ली | Published: 18 May, 2026 | 08:12 AM

Andhra Pradesh fisheries: आंध्र प्रदेश में झींगा पालन करने वाले किसानों की मुश्किलें लगातार बढ़ती जा रही हैं. झींगा और मछलियों को खिलाए जाने वाले चारे की कीमतों में भारी बढ़ोतरी होने से मत्स्यपालन का खर्च तेजी से बढ़ गया है. इससे हजारों किसानों की कमाई प्रभावित हो रही है और कई किसान आर्थिक दबाव महसूस कर रहे हैं.

इसी गंभीर स्थिति को देखते हुए आंध्र प्रदेश के मुख्यमंत्री एन. चंद्रबाबू नायडू ने केंद्रीय कृषि मंत्री शिवराज सिंह चौहान को पत्र लिखकर मत्स्यपालन किसानों के हित में जरूरी कदम उठाने की मांग की है. राज्य सरकार चाहती है कि केंद्र सरकार ऐसे फैसले ले जिससे झींगा पालन करने वाले किसानों को राहत मिल सके और चारे की कीमतों पर नियंत्रण हो.

सचिवालय में हुई बड़ी समीक्षा बैठक

झींगा पालन से जुड़े संकट पर चर्चा करने के लिए राज्य सचिवालय में एक अहम बैठक आयोजित की गई. इस बैठक की अध्यक्षता विशेष मुख्य सचिव बी. राजशेखर ने की. बैठक में मत्स्यपालन विभाग के अधिकारी, वैज्ञानिक, चारा बनाने वाली कंपनियों के प्रतिनिधि और किसान संगठनों के लोग शामिल हुए. सभी ने झींगा पालन उद्योग पर बढ़ती लागत के असर को लेकर चिंता जताई.

बैठक में यह फैसला लिया गया कि किसानों के हितों को ध्यान में रखते हुए केंद्र सरकार से कुछ खास मांगें की जाएंगी. इनमें मछली चारे के निर्यात को बढ़ावा देना और सोया आयात पर रोक लगाने जैसे मुद्दे शामिल हैं.

झींगा पालन पर बढ़ता खर्च बना बड़ी परेशानी

अधिकारियों के अनुसार, पिछले कुछ महीनों में झींगा पालन का खर्च तेजी से बढ़ा है. खासतौर पर चारे में इस्तेमाल होने वाले कच्चे माल की कीमतों में लगातार उछाल देखा गया है.

मत्स्य आयुक्त रामाशंकर नाइक ने बैठक में राज्य में मत्स्यपालन की मौजूदा स्थिति के बारे में विस्तार से जानकारी दी. उन्होंने बताया कि झींगा उत्पादन, चारे की खपत और मौजूदा कीमतों में लगातार बदलाव हो रहा है. उन्होंने कहा कि चारा बनाने वाली कंपनियां भी कीमतें बढ़ाने की तैयारी में हैं, जिससे किसानों की चिंता और बढ़ गई है.

जनवरी से मई के बीच तेजी से बढ़ीं कीमतें

खारे पानी में मत्स्यपालन पर काम करने वाले वैज्ञानिक संस्थान के विशेषज्ञों  के अनुसार, जनवरी से मई 2026 के बीच चारे में इस्तेमाल होने वाले प्रमुख कच्चे माल की कीमतों में भारी बढ़ोतरी हुई है. विशेषज्ञों के मुताबिक सोया, मछली पाउडर और मछली तेल जैसे जरूरी उत्पाद पहले के मुकाबले काफी महंगे हो गए हैं.

आंकड़ों के अनुसार मछली पाउडर की कीमत 1.5 लाख रुपये प्रति टन से बढ़कर 2.4 लाख रुपये प्रति टन पहुंच गई है. इसी तरह मछली तेल की कीमत 2.8 लाख रुपये से बढ़कर 4.4 लाख रुपये प्रति टन हो गई. सोया की कीमत में भी भारी उछाल आया है. पहले इसकी कीमत करीब 68 हजार रुपये प्रति टन थी, जो अब बढ़कर 1.1 लाख रुपये प्रति टन तक पहुंच गई है.

चारा उत्पादन लागत में भारी बढ़ोतरी

वैज्ञानिकों के अनुसार. कच्चे माल की महंगाई के कारण चारा बनाने की लागत में औसतन 31.03 रुपये प्रति किलोग्राम की बढ़ोतरी हुई है. इसका सीधा असर किसानों पर पड़ रहा है क्योंकि झींगा पालन में सबसे ज्यादा खर्च चारे पर ही होता है. अगर यही स्थिति बनी रही तो छोटे और मध्यम किसान सबसे ज्यादा प्रभावित होंगे.

चारा कंपनियों ने भी मानी कीमत बढ़ने की बात

बैठक में शामिल चारा उत्पादन कंपनियों के प्रतिनिधियों ने भी माना कि जनवरी से अप्रैल 2026 के बीच कच्चे माल की कीमतों में 20 प्रतिशत से ज्यादा की बढ़ोतरी हुई है. कंपनियों का कहना है कि बढ़ती लागत के कारण चारे की कीमत बढ़ाना मजबूरी बन गया है. हालांकि किसानों ने सरकार से मांग की है कि गर्मियों की फसल पूरी होने तक कम से कम दो महीने तक मौजूदा दरें ही जारी रखी जाएं.

किसानों ने बिजली में राहत की भी मांग की

झींगा पालन करने वाले किसान केवल चारे की महंगाई से ही परेशान नहीं हैं, बल्कि बिजली खर्च भी उनके लिए बड़ी समस्या बनता जा रहा है. किसान संगठनों ने सरकार से मांग की है कि लाइसेंस प्राप्त मत्स्यपालन फार्मों को रियायती दर पर बिजली उपलब्ध कराई जाए. किसानों ने 1.50 रुपये प्रति यूनिट की दर से बिजली देने की मांग रखी है. उनका कहना है कि अगर बिजली और चारे दोनों की लागत बढ़ती रही तो झींगा पालन का कारोबार नुकसान में चला जाएगा.

हर महीने तय होगी चारे की कीमत

बैठक में एक अहम फैसला यह भी लिया गया कि अब झींगा चारे की कीमत हर महीने तय करने की व्यवस्था लागू की जाएगी. यह व्यवस्था मुर्गी पालन उद्योग की तर्ज पर होगी, जहां कच्चे माल की कीमतों के आधार पर हर महीने चारे के दाम तय किए जाते हैं. सरकार का मानना है कि इससे कीमतों में पारदर्शिता आएगी और किसानों को अचानक बढ़ोतरी का सामना नहीं करना पड़ेगा.

आंध्र प्रदेश की अर्थव्यवस्था से जुड़ा है मत्स्यपालन

आंध्र प्रदेश देश के बड़े मत्स्यपालन राज्यों में गिना जाता है. यहां हजारों परिवार झींगा और मछली पालन से अपनी आजीविका चलाते हैं. राज्य का समुद्री उत्पाद निर्यात भी देश की अर्थव्यवस्था में अहम योगदान देता है. ऐसे में चारे की बढ़ती कीमतें केवल किसानों ही नहीं बल्कि पूरे मत्स्य उद्योग के लिए चिंता का विषय बन गई हैं.

किसानों और उद्योग से जुड़े लोगों को उम्मीद है कि केंद्र और राज्य सरकार मिलकर जल्द ऐसे फैसले लेंगी जिससे मत्स्यपालन क्षेत्र को राहत मिल सके और किसानों की आय सुरक्षित रह सके.

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