सिर्फ चारा नहीं संतुलित आहार खिलाएं, पशु रहेंगे स्वस्थ और डेयरी की कमाई तेजी से बढ़ेगी
पशुओं को बार-बार बीमारियों से बचाने के लिए संतुलित आहार सबसे आसान उपाय माना गया है. प्रोटीन, खनिज और विटामिन से भरपूर भोजन पशुओं की रोग प्रतिरोधक क्षमता बढ़ाता है. इससे वे संक्रमण से सुरक्षित रहते हैं, दूध उत्पादन बेहतर होता है और पशुपालकों का इलाज खर्च कम होकर मुनाफा बढ़ सकता है.
Animal Health: पशुपालन में सबसे बड़ा नुकसान तब होता है जब पशु बार-बार बीमार पड़ने लगते हैं. कई बार किसान दवा और इलाज पर अच्छा-खासा पैसा खर्च कर देते हैं, फिर भी पशु जल्दी ठीक नहीं होते. ऐसे में अच्छी खबर यह है कि बिहार डेयरी, मत्स्य एवं पशु संसाधन विभाग के अनुसार, कई संक्रामक बीमारियों से बचाव का सबसे आसान और असरदार तरीका पशुओं को संतुलित आहार देना है. ऐसे अगर पशु को रोज सही मात्रा में प्रोटीन, खनिज और विटामिन मिल जाएं, तो उसका शरीर अंदर से मजबूत रहता है. इससे उसकी रोगों से लड़ने की ताकत बढ़ती है और वह जल्दी बीमार नहीं पड़ता. यही छोटी सी सावधानी पशुपालकों के खर्च को कम कर सकती है और दूध उत्पादन को भी बेहतर बनाए रख सकती है.
संतुलित आहार क्यों है सबसे जरूरी
बिहार डेयरी, मत्स्य एवं पशु संसाधन विभाग के अनुसार, पशु का शरीर भी इंसानों की तरह सही पोषण मांगता है. अगर खाने में सिर्फ भूसा या सूखा चारा दिया जाए और जरूरी पोषक तत्व न मिलें, तो पशु कमजोर होने लगता है. संतुलित आहार का मतलब है ऐसा भोजन जिसमें हरा चारा, सूखा चारा, दाना, खनिज मिश्रण और साफ पानी सब सही मात्रा में हो. इससे पशु के शरीर को ताकत मिलती है, पाचन अच्छा रहता है और शरीर की रोग प्रतिरोधक क्षमता मजबूत होती है.
संक्रामक रोगों से बचाव में कैसे करता है मदद
विभाग के अनुसार, कई बार पशु मौसम बदलने, गंदगी या कमजोर शरीर की वजह से जल्दी संक्रमण की चपेट में आ जाते हैं. लेकिन जब उनके शरीर में प्रोटीन, मिनरल और विटामिन की कमी नहीं होती, तो वे संक्रमण से बेहतर तरीके से लड़ पाते हैं. जिन पशुओं को संतुलित आहार मिलता है, उनमें बुखार, कमजोरी, खुरपका-मुंहपका जैसे रोगों का असर कम देखा जाता है. खासकर दूध देने वाले पशुओं के लिए यह और जरूरी हो जाता है, क्योंकि कमजोर शरीर में बीमारी जल्दी पकड़ लेती है. यही वजह है कि विभाग ने पशुपालकों को सलाह दी है कि हर दिन आहार में पोषक तत्व जरूर शामिल करें.
किन चीजों को आहार में जरूर शामिल करें
आसान भाषा में समझें तो पशुओं के खाने में सिर्फ एक तरह का चारा नहीं होना चाहिए. हरा चारा जैसे नेपियर, बरसीम, ज्वार या बाजरा, सूखा भूसा, दाना और मिनरल मिक्स साथ में देना चाहिए. दूध देने वाली गाय-भैंस के लिए सरसों खली, चना चूरी, मक्का दाना और मिनरल मिक्स बहुत फायदेमंद माना जाता है. इससे शरीर में प्रोटीन की कमी नहीं होती. इसके साथ साफ और ताजा पानी भी बेहद जरूरी है. कई पशुपालक चारे पर ध्यान देते हैं लेकिन पानी की अनदेखी कर देते हैं, जिससे पोषण का पूरा फायदा नहीं मिल पाता.
संतुलित आहार से बढ़ेगा दूध और मुनाफा
जब पशु स्वस्थ रहता है तो उसका सीधा असर दूध उत्पादन पर भी दिखता है. अच्छा आहार मिलने से पशु ज्यादा ऊर्जा महसूस करता है, चारा ठीक से खाता है और दूध देने की क्षमता भी बेहतर रहती है. बिहार डेयरी, मत्स्य एवं पशु संसाधन विभाग के अनुसार, संतुलित आहार सिर्फ बीमारी से बचाने का तरीका नहीं, बल्कि डेयरी मुनाफा बढ़ाने का आसान फॉर्मूला भी है. कम बीमारी का मतलब कम इलाज खर्च और ज्यादा दूध का मतलब ज्यादा कमाई. तो अगर पशु को रोज ताकत वाला खाना, मिनरल और साफ पानी दिया जाए, तो वह कम बीमार होगा, ज्यादा दूध देगा और पशुपालक का मुनाफा भी बढ़ेगा. यही वजह है कि आज संतुलित आहार को पशुपालन का सबसे आसान और सबसे सस्ता “सुरक्षा कवच” माना जा रहा है.