बकरी पालन में ये 5 गलतियां पड़ सकती हैं भारी! अपनाएं एक्सपर्ट के बताए ये टिप्स, नहीं तो होगा बड़ा नुकसान

Bakri Palan In Hindi: बकरी पालन में सही देखभाल और प्रबंधन बेहद जरूरी होता है. खासकर ब्रीडिंग का सही समय, गर्भावस्था में पोषण और मेमनों की सुरक्षा पर ध्यान देकर किसान मृत्यु दर कम कर सकते हैं और उत्पादन बढ़ा सकते हैं. अगर इन बातों का ध्यान रखा जाए, तो बकरी पालन से अच्छा मुनाफा कमाया जा सकता है.

नोएडा | Updated On: 29 Mar, 2026 | 07:19 PM

Goat Farming Tips: भारत में बकरी पालन तेजी से लोकप्रिय हो रहा है, क्योंकि इसे कम लागत में शुरू किया जा सकता है और यह अच्छा मुनाफा भी देता है. केंद्रीय बकरी अनुसंधान संस्थान के वैज्ञानिक डॉ. वाई. के. सोनी ने किसान इंडिया (Kisan India) को बताया कि, बकरी को ‘भविष्य का पशु’ भी कहा जाता है, क्योंकि इसकी रोग प्रतिरोधक क्षमता ज्यादा होती है और यह कठिन परिस्थितियों में भी अच्छी तरह उत्पादन देती है. हालांकि, बेहतर उत्पादन और कम नुकसान के लिए किसानों को बकरियों की सही देखभाल करना बेहद जरूरी है.

क्यों खास है बकरी पालन

बकरी पालन छोटे और सीमांत किसानों के लिए आय का अच्छा स्रोत बनता जा रहा है. डॉ. वाई. के. सोनी के अनुसार यह पशु कम संसाधनों में भी जीवित रह सकता है और जल्दी बढ़ता है. लेकिन यदि सही प्रबंधन न किया जाए, तो बच्चों (मेमनों) की मृत्यु दर बढ़ सकती है, जिससे किसानों को नुकसान उठाना पड़ता है.

मेमनों की सुरक्षा पर दें खास ध्यान

बकरी पालन में सबसे ज्यादा ध्यान मेमनों की देखभाल पर देना जरूरी होता है. खासकर ठंड और बारिश के मौसम में पैदा होने वाले बच्चे कमजोर होते हैं और जल्दी बीमार पड़ सकते हैं. इसलिए किसानों को बकरियों की ब्रीडिंग इस तरह प्लान करनी चाहिए कि बच्चों का जन्म अनुकूल मौसम में हो. बहुत ज्यादा ठंड या मानसून के दौरान जन्म लेने वाले मेमनों में बीमारी का खतरा अधिक रहता है.

बकरी पालन में सफल होने के लिए सही समय पर ब्रीडिंग कराना बेहद जरूरी है. यदि ब्रीडिंग सही समय पर की जाए, तो बच्चों का जन्म ऐसे मौसम में होगा जब वातावरण उनके लिए अनुकूल होगा. इससे मेमनों की सेहत बेहतर रहती है और उनकी जीवित रहने की संभावना भी बढ़ जाती है.

गर्भावस्था में खानपान का रखें ध्यान

अक्सर देखा जाता है कि किसान गर्भवती (गाभिन) बकरियों के खानपान पर पर्याप्त ध्यान नहीं देते. जबकि यह समय सबसे महत्वपूर्ण होता है. विशेषज्ञों के अनुसार, गर्भावस्था के आखिरी 50 दिनों में बकरी के आहार को बढ़ाना चाहिए. इस दौरान 100 से 150 ग्राम अतिरिक्त दाना देना फायदेमंद होता है, जिससे बकरी को पर्याप्त ऊर्जा और प्रोटीन मिल सके.

स्वस्थ बच्चे और बेहतर दूध उत्पादन

गर्भावस्था के अंतिम चरण में सही पोषण मिलने से बकरी के बच्चे स्वस्थ पैदा होते हैं. साथ ही मां का पहला दूध (कोलोस्ट्रम) भी पौष्टिक होता है, जो मेमनों की रोग प्रतिरोधक क्षमता बढ़ाने में मदद करता है. इससे बच्चे तेजी से बढ़ते हैं और भविष्य में अच्छा उत्पादन देते हैं. बकरी पालन में सफलता पाने के लिए सिर्फ पशु रखना ही काफी नहीं है, बल्कि सही देखभाल और प्रबंधन भी उतना ही जरूरी है. अगर किसान ब्रीडिंग, पोषण और मौसम का सही ध्यान रखें, तो वे न केवल मेमनों की मृत्यु दर कम कर सकते हैं, बल्कि उत्पादन और मुनाफा भी बढ़ा सकते हैं.

 

Published: 29 Mar, 2026 | 03:19 PM

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