मछुआरों के लिए खुशखबरी! 500 जलाशयों और अमृत सरोवरों के विकास से बढ़ेगी आय, सरकार का बड़ा ऐलान
Fisheries Development: केंद्र सरकार ने बजट 2026-27 में 500 जलाशयों और अमृत सरोवरों के विकास के जरिए मत्स्य पालन को बढ़ावा देने की घोषणा की है. इस योजना के तहत 27 राज्यों में 351 जलाशय और 21 राज्यों में 100 अमृत सरोवर चुने गए हैं. सरकार का लक्ष्य मछली उत्पादन बढ़ाना, मछुआरों की आय में वृद्धि करना और ग्रामीण क्षेत्रों में रोजगार के नए अवसर पैदा करना है.
Fisheries Reservoir: केंद्र सरकार ने मत्स्य पालन को बढ़ावा देने और मछुआरों की आय बढ़ाने के लिए बड़ा कदम उठाया है. केंद्रीय बजट 2026-27 में देशभर के 500 जलाशयों और अमृत सरोवरों के एकीकृत विकास की घोषणा की गई है. सरकार का मानना है कि, इस योजना से जलाशयों का बेहतर उपयोग होगा, मछली उत्पादन बढ़ेगा और ग्रामीण इलाकों में रोजगार के नए अवसर पैदा होंगे.
इस योजना में केवल सरकारी एजेंसियां ही नहीं, बल्कि महिला स्वयं सहायता समूह (SHG), मत्स्य सहकारी समितियां और मत्स्य किसान उत्पादक संगठन (FFPO) भी महत्वपूर्ण भूमिका निभाएंगे. इसकी जानकारी मत्स्य पालन, पशुपालन एवं डेयरी मंत्री राजीव रंजन सिंह (ललन सिंह) ने राज्यसभा में लिखित जवाब के जरिए दी.
कैसे लागू होगी यह योजना?
सरकार के अनुसार, इस योजना के तहत विकास कार्य राज्यों और केंद्र शासित प्रदेशों की ओर से तैयार की जाने वाली विस्तृत परियोजना रिपोर्ट (DPR) के आधार पर किए जाएंगे. यानी हर राज्य अपने यहां की जरूरत और संभावनाओं के हिसाब से योजना तैयार करेगा. जलाशयों और अमृत सरोवरों का चयन भी उनकी बारहमासी जल उपलब्धता, मत्स्य पालन की क्षमता और स्थानीय जरूरतों को ध्यान में रखकर किया गया है. इससे उन स्थानों पर ज्यादा ध्यान दिया जाएगा, जहां मछली उत्पादन बढ़ाने की अच्छी संभावना है.
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किन राज्यों को मिलेगा सबसे ज्यादा लाभ?
सरकार ने बताया कि अब तक 27 राज्यों और केंद्र शासित प्रदेशों में 351 जलाशयों तथा 21 राज्यों में 100 अमृत सरोवरों को इस योजना के लिए चुना गया है.
- जलाशयों की संख्या के मामले में झारखंड (41) सबसे आगे है.
- इसके बाद महाराष्ट्र (34)
- केरल (28)
- छत्तीसगढ़ (27)
- तेलंगाना (27)
- ओडिशा (25)
- मध्य प्रदेश (22
- उत्तर प्रदेश (19) शामिल हैं.
वहीं अमृत सरोवरों में उत्तर प्रदेश (12) पहले स्थान पर है. इसके अलावा तेलंगाना और महाराष्ट्र में 6-6 तथा बिहार, मध्य प्रदेश, राजस्थान, ओडिशा, झारखंड, छत्तीसगढ़, असम और नागालैंड में 5-5 अमृत सरोवर इस योजना में शामिल किए गए हैं.
महिला समूहों और FFPO को मिलेगा बढ़ावा
इस योजना की खास बात यह है कि इसमें महिला स्वयं सहायता समूहों और मत्स्य किसान उत्पादक संगठनों (FFPO) की भागीदारी बढ़ाई जाएगी. सरकार नए FFPO और महिला नेतृत्व वाले समूहों के गठन को प्रोत्साहित करेगी. साथ ही पहले से काम कर रहे संगठनों को भी जरूरी सहायता और संसाधन उपलब्ध कराए जाएंगे. सरकार का मानना है कि इससे वैज्ञानिक तरीके से मत्स्य पालन को बढ़ावा मिलेगा और मछुआरों की कमाई में भी सुधार होगा.
रोजगार और आय बढ़ाने पर रहेगा फोकस
सरकार के अनुसार, इस पहल का मुख्य उद्देश्य जलाशयों और अमृत सरोवरों का बेहतर उपयोग करना, मत्स्य उत्पादन बढ़ाना और ग्रामीण अर्थव्यवस्था को मजबूत बनाना है. इससे गांवों में रोजगार के नए अवसर पैदा होंगे और मछुआरा समुदाय की आर्थिक स्थिति मजबूत होगी.
केंद्र सरकार का कहना है कि अगर जलाशयों का सही तरीके से उपयोग किया जाए तो देश में मछली उत्पादन बढ़ाने के साथ-साथ लाखों लोगों के लिए स्थायी रोजगार भी तैयार किया जा सकता है. इसी लक्ष्य को ध्यान में रखते हुए यह योजना शुरू की जा रही है.