गाय से याक तक.. देसी पशुओं को मिली बड़ी पहचान! ICAR ने 16 नई नस्लों को किया रजिस्टर्ड
New Livestock Breeds: ICAR ने 16 नई देसी पशुधन नस्लों को आधिकारिक मान्यता दी है. इनमें गाय, भैंस, बकरी, भेड़, गधा, घोड़ा, सूअर और याक की नस्लें शामिल हैं. इसके साथ देश में पंजीकृत पशुधन नस्लों की संख्या बढ़कर 262 हो गई है.
ICAR Registered Breeds 2026: भारत में पशुधन की कई ऐसी देसी नस्लें हैं, जो अपने इलाके के मौसम और खेती-किसानी के हिसाब से लंबे समय से विकसित हुई हैं. इन नस्लों में स्थानीय परिस्थितियों के मुताबिक खास खूबियां पाई जाती हैं. अब ऐसी ही कुछ देसी पशुधन नस्लों को आधिकारिक पहचान देने की दिशा में बड़ा कदम उठाया गया है. भारतीय कृषि अनुसंधान परिषद (ICAR) ने 16 नई देसी पशुधन और अन्य पशु नस्लों को मान्यता दी है. इनमें चार मवेशी, एक भैंस, दो बकरी, चार भेड़, एक गधा, एक घोड़ा, एक सूअर और एक याक की नस्ल शामिल हैं. इन नई नस्लों के जुड़ने के बाद देश में ICAR द्वारा पंजीकृत पशुधन नस्लों की कुल संख्या बढ़कर 262 हो गई है.
13 राज्यों और एक केंद्र शासित प्रदेश की नस्लें शामिल
इन नई नस्लों की पहचान देश के अलग-अलग हिस्सों में की गई है. ये नस्लें कुल 13 राज्यों और एक केंद्र शासित प्रदेश में पाई जाती हैं. नस्लों के पंजीकरण की सिफारिश 7 अगस्त को नई दिल्ली में हुई नस्ल पंजीकरण समिति की 14वीं बैठक में की गई. इस प्रक्रिया का मकसद देश में मौजूद स्थानीय पशुधन की पहचान करना, उनका रिकॉर्ड तैयार करना और भविष्य के लिए उनका संरक्षण सुनिश्चित करना है.
इन राज्यों की मवेशी नस्लों को मिली पहचान
नई मान्यता प्राप्त मवेशी नस्लों में कर्नाटक की कोप्पल, मध्य प्रदेश की महाकौशली, केरल की पेरियार और महाराष्ट्र की उमरदा शामिल हैं. इसके अलावा गोवा की गोमंचली भैंस नस्ल को भी आधिकारिक पहचान दी गई है. बकरी की नई नस्लों में राजस्थान और उत्तर प्रदेश की बत्तीसी तथा राजस्थान की तोतापुरी शामिल हैं.
#ICAR registers 16 new indigenous livestock & dog breeds—advancing conservation, sustainable use of animal genetic resources, self-reliance & food security for Viksit Bharat@2047.@ChouhanShivraj @PIB_India @AgriGoI @Dept_of_AHD@mpbhagirathbjp pic.twitter.com/jeErcM2oVD
— Indian Council of Agricultural Research. (@icarindia) August 22, 2026
भेड़ की चार देसी नस्लें भी सूची में
ICAR ने चार नई भेड़ नस्लों को भी पंजीकृत किया है. इनमें असम की असोमी, उत्तराखंड की कोव देबार, महाराष्ट्र और कर्नाटक की मडग्याल तथा बिहार की सीमांचली नस्ल शामिल है. इसके अलावा उत्तर प्रदेश की ब्रज गधा, जम्मू-कश्मीर की कश्मीरी घोड़ा, नगालैंड की नगाल सूअर और सिक्किम की सिक्किमी याक नस्ल को भी आधिकारिक मान्यता मिली है.
देसी नस्लों की पहचान क्यों जरूरी?
देश के अलग-अलग हिस्सों में पशुपालक पीढ़ियों से स्थानीय नस्लों को पालते और विकसित करते आए हैं. इनमें कई नस्लें गर्मी, ठंड, पहाड़ी इलाकों या स्थानीय चारे जैसी परिस्थितियों के अनुसार खुद को ढाल चुकी हैं. इनकी आधिकारिक पहचान होने से ऐसी नस्लों का रिकॉर्ड तैयार करना आसान होगा. साथ ही, जिन पशुओं की नस्ल अभी तक स्पष्ट रूप से दर्ज नहीं थी, उन्हें पहचान देने में भी मदद मिलेगी. इससे इनका संरक्षण और बेहतर तरीके से इस्तेमाल किया जा सकेगा.
पशुपालकों और रिसर्च को मिलेगा फायदा
करनाल स्थित ICAR-NBAGR पशुधन और पोल्ट्री नस्लों के पंजीकरण की नोडल संस्था है. नई नस्लों का आधिकारिक रिकॉर्ड भी यही संस्था तैयार करेगी. नए पंजीकरण के बाद देश में कुल 262 पंजीकृत नस्लें हो गई हैं, जिनमें 258 देसी और चार सिंथेटिक नस्लें हैं. इन नस्लों की पहचान और दस्तावेज तैयार करने में पशुपालकों, प्रजनकों, राज्य पशुपालन विभागों, विश्वविद्यालयों और शोध संस्थानों की अहम भूमिका रही है. आने वाले समय में इन नस्लों की जानकारी से बेहतर प्रजनन कार्यक्रम, रिसर्च और संरक्षण योजनाएं बनाने में मदद मिल सकती है.