गांव में शुरू करें यह बिजनेस, ‘सोने के अंडे’ देने वाली मुर्गी से होगी शानदार कमाई

कैरी निर्भीक मुर्गी लगभग 5 महीने यानी 170 से 180 दिनों के भीतर अंडे देना शुरू कर देती है. यह सालभर में करीब 170 से 200 अंडे दे सकती है. देसी अंडों की बाजार में कीमत सामान्य अंडों से अधिक मिलती है, जिससे किसानों को बेहतर लाभ मिलता है.

नई दिल्ली | Updated On: 14 Feb, 2026 | 12:55 PM

poultry farming: आज के समय में खेती के साथ-साथ पशुपालन भी किसानों की आय बढ़ाने का मजबूत जरिया बन चुका है. खासकर मुर्गी पालन ऐसा व्यवसाय है, जिसे कम जगह और सीमित निवेश में शुरू किया जा सकता है. अगर सही नस्ल का चुनाव कर लिया जाए तो कम समय में अच्छी कमाई संभव है. ऐसी ही एक खास देसी नस्ल है कैरी निर्भीक मुर्गी, जिसे कई लोग “सोने के अंडे देने वाली मुर्गी” भी कहते हैं. यह नस्ल तेजी से बढ़ती है, कम समय में अंडे देना शुरू कर देती है और इसके मांस की भी बाजार में जबरदस्त मांग रहती है.

क्या है कैरी निर्भीक मुर्गी?

कैरी निर्भीक एक उन्नत देसी नस्ल की मुर्गी है, जिसे खासतौर पर ग्रामीण और छोटे किसानों की आय बढ़ाने के लिए विकसित किया गया है. यह नस्ल अंडे और मांस दोनों के लिए उपयुक्त मानी जाती है. इसकी सबसे बड़ी खासियत यह है कि यह कम देखभाल में भी अच्छी वृद्धि करती है और स्थानीय वातावरण के अनुसार खुद को आसानी से ढाल लेती है. देसी नस्ल होने के कारण यह सामान्य बीमारियों के प्रति अधिक प्रतिरोधक क्षमता रखती है. यही वजह है कि इसका पालन जोखिम कम और फायदा ज्यादा माना जाता है.

क्यों कहलाती है “सोने के अंडे देने वाली” मुर्गी?

कैरी निर्भीक मुर्गी लगभग 5 महीने यानी 170 से 180 दिनों के भीतर अंडे देना शुरू कर देती है. यह सालभर में करीब 170 से 200 अंडे दे सकती है. देसी अंडों की बाजार में कीमत सामान्य अंडों से अधिक मिलती है, जिससे किसानों को बेहतर लाभ मिलता है. कम लागत में ज्यादा अंडे मिलने के कारण इसे “सोने के अंडे देने वाली मुर्गी” कहा जाता है. ग्रामीण बाजारों में देसी अंडों की मांग हमेशा बनी रहती है, खासकर स्वास्थ्य के प्रति जागरूक लोगों में इनकी लोकप्रियता ज्यादा है.

मांस भी देता है अच्छा दाम

कैरी निर्भीक मुर्गी का मांस भी बाजार में महंगे दाम पर बिकता है. इस नस्ल के मुर्गों का वजन तेजी से बढ़ता है. करीब 20 सप्ताह में इनका वजन 1350 से 1850 ग्राम तक पहुंच सकता है. मजबूत शरीर, लंबी गर्दन और ताकतवर टांगें इसकी पहचान हैं.

इस नस्ल के मांस में प्रोटीन की मात्रा अधिक होती है, जिसके कारण स्वास्थ्य के प्रति जागरूक लोग इसे पसंद करते हैं. देसी मुर्गे का स्वाद भी अलग होता है, जिससे होटल और ढाबों में इसकी खास मांग रहती है.

पालन में आसान और कम खर्च

कैरी निर्भीक मुर्गी का पालन ज्यादा खर्चीला नहीं है. इसे खुले वातावरण में भी पाला जा सकता है. देसी होने के कारण इसे महंगे फीड की जरूरत कम पड़ती है. घर के बचे हुए अनाज, हरा चारा और सामान्य दाना भी इनके लिए पर्याप्त होता है.

रोग प्रतिरोधक क्षमता अच्छी होने के कारण दवाइयों पर भी कम खर्च आता है. यही कारण है कि छोटे और सीमांत किसान भी इस नस्ल को आसानी से पाल सकते हैं.

लड़ाकू स्वभाव लेकिन मजबूत नस्ल

इस नस्ल को कभी-कभी “लड़ाकू मुर्गी” भी कहा जाता है, क्योंकि इसका स्वभाव थोड़ा सक्रिय और सतर्क होता है. यह अन्य मुर्गियों की तुलना में ज्यादा चुस्त और मजबूत होती है. लाल और पीले रंग के पंख तथा सुनहरे आभा वाले मुर्गे ग्राहकों को आकर्षित करते हैं.

किसानों के लिए सुनहरा मौका

अगर किसान कम समय में अच्छी कमाई करना चाहते हैं तो कैरी निर्भीक मुर्गी पालन एक बेहतर विकल्प हो सकता है. अंडे और मांस दोनों से आय के दोहरे स्रोत बनते हैं. कम निवेश, तेज वृद्धि, ज्यादा अंडे और बाजार में ऊंची कीमत ये सभी बातें इसे लाभकारी बनाती हैं.

Published: 14 Feb, 2026 | 01:15 PM

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