पशुपालकों के लिए खुशखबरी, KCC से 50 लाख किसानों को फायदा, सरकार ने आय बढ़ाने का बनाया प्लान

Animal Husbandry Schemes: केंद्र सरकार पशुपालकों की आय बढ़ाने के लिए KCC, बेहतर पशु नस्ल, चारा, प्रशिक्षण और पशु चिकित्सा सेवाओं पर जोर दे रही है. 2025-26 में KCC से 50.42 लाख किसान जुड़े, जबकि तमिलनाडु में 245 मोबाइल पशु चिकित्सा इकाइयों के जरिए किसानों तक इलाज की सुविधा पहुंचाई जा रही है.

नोएडा | Updated On: 15 Aug, 2026 | 08:10 PM

KCC For Livestock Farmers: देश में खेती के साथ पशुपालन भी किसानों की कमाई का अहम जरिया है. ऐसे में केंद्र सरकार पशुपालकों को कर्ज, बेहतर नस्ल, चारा और पशु चिकित्सा जैसी सुविधाओं से जोड़ने पर जोर दे रही है. केंद्रीय मत्स्य पालन, पशुपालन और डेयरी मंत्री राजीव रंजन सिंह उर्फ ललन सिंह ने पशुधन क्षेत्र को लेकर सरकार की प्रमुख योजनाओं और अब तक की प्रगति की जानकारी दी है.

KCC से 50 लाख से ज्यादा किसानों को मिला फायदा

पशुपालकों को आसानी से कर्ज मिल सके, इसके लिए किसान क्रेडिट कार्ड यानी KCC की सुविधा पर जोर दिया जा रहा है. आंकड़ों के मुताबिक, 2021-22 में जहां 15.08 लाख पशुपालक KCC से जुड़े थे, वहीं 2025-26 में यह संख्या बढ़कर 50.42 लाख हो गई. इसका मतलब है कि, अब पहले के मुकाबले ज्यादा पशुपालकों को खेती की तरह पशुपालन के लिए भी संस्थागत कर्ज मिल पा रहा है. सरकार का फोकस सिर्फ कर्ज देने तक सीमित नहीं है. करीब 6.4 लाख किसानों को डिजिटल प्रशिक्षण भी दिया गया है, ताकि वे नई तकनीक और आधुनिक तरीकों को समझकर पशुपालन में इस्तेमाल कर सकें.

दूध उत्पादन में देश ने बनाया मजबूत आधार

भारत दुनिया के प्रमुख दुग्ध उत्पादक देशों में शामिल है. सरकार के आंकड़ों के अनुसार, 2024-25 में देश का सालाना दूध उत्पादन 247.87 मिलियन टन रहा. यह घरेलू मांग 243 मिलियन टन से ज्यादा है. डेयरी क्षेत्र का फायदा सिर्फ देश के बाजार तक सीमित नहीं है. वित्त वर्ष 2025-26 में भारत ने करीब 407.18 मिलियन डॉलर के डेयरी उत्पादों का निर्यात किया. इससे साफ है कि, पशुपालन और डेयरी किसानों के लिए कमाई का बड़ा क्षेत्र बन सकता है.

देशी नस्लों को बेहतर बनाने पर जोर

पशुधन की उत्पादकता बढ़ाने के लिए सरकार राष्ट्रीय गोकुल मिशन (RGM) चला रही है. दिसंबर 2014 से चल रही इस योजना का मकसद देशी पशु नस्लों का संरक्षण और उनका सुधार करना है. सरकार बेहतर नस्ल के पशुओं को बढ़ावा देकर दूध उत्पादन और पशुओं की उत्पादकता बढ़ाने की कोशिश कर रही है. इससे लंबे समय में पशुपालकों की कमाई बढ़ाने में मदद मिल सकती है.

चारा, रोजगार और छोटे कारोबार को बढ़ावा

राष्ट्रीय पशुधन मिशन (NLM) के जरिए वैज्ञानिक तरीके से पशु प्रजनन, बेहतर चारा और पशु आहार पर काम किया जा रहा है. योजना का एक उद्देश्य पशुपालन से जुड़े छोटे कारोबार और रोजगार के अवसर बढ़ाना भी है. इसके तहत मांस, बकरी के दूध, अंडे और ऊन जैसे क्षेत्रों को बढ़ावा देने के साथ किसानों को बाजार से जोड़ने पर भी ध्यान दिया जा रहा है.

तमिलनाडु में 50 फीसदी तक पूंजी सब्सिडी

तमिलनाडु में NLM के तहत पशुपालन और मुर्गीपालन से जुड़े कई कामों के लिए 50 प्रतिशत तक पूंजी सब्सिडी दी जा रही है. इसका लाभ व्यक्ति, FPO, स्वयं सहायता समूह, संयुक्त देयता समूह, किसान सहकारी संगठन और धारा 8 के तहत आने वाली कंपनियां उठा सकती हैं. यह सहायता नस्ल सुधार, चारा, पशु आहार, अनुसंधान, बीमा और किसानों तक जानकारी पहुंचाने जैसी गतिविधियों के लिए दी जाती है.

पशुओं को बीमारी से बचाने पर भी फोकस

पशुओं की बीमारी से किसानों को होने वाले नुकसान को कम करने के लिए पशुधन स्वास्थ्य एवं रोग नियंत्रण कार्यक्रम (LHDCP) के तहत राज्यों को मदद दी जा रही है. खुरपका-मुंहपका, ब्रुसेलोसिस, PPR और क्लासिकल स्वाइन फीवर जैसी बीमारियों से बचाव के लिए टीकाकरण पर 100 प्रतिशत वित्तीय सहायता दी जाती है. इसके अलावा रोगों की निगरानी, जांच प्रयोगशालाओं को मजबूत करने, प्रशिक्षण और जागरूकता के लिए भी सहायता दी जा रही है.

घर तक पहुंच रही पशु चिकित्सा सेवा

तमिलनाडु में पशुपालकों को इलाज के लिए दूर न जाना पड़े, इसके लिए 245 मोबाइल पशु चिकित्सा इकाइयां (MVU) संचालित की जा रही हैं. केंद्र सरकार इन इकाइयों के संचालन में साझा आधार पर आर्थिक मदद दे रही है. कुल मिलाकर सरकार का जोर पशुपालन को सिर्फ सहायक काम के बजाय किसानों की नियमित कमाई का मजबूत जरिया बनाने पर है. आसान कर्ज, बेहतर नस्ल, चारा, प्रशिक्षण और समय पर पशु चिकित्सा सेवाएं मिलने से पशुपालकों की आय और पशुधन क्षेत्र दोनों को मजबूती मिलने की उम्मीद है.

Published: 15 Aug, 2026 | 10:02 PM

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