अंडा ज्यादा, खर्चा कम! मुर्गीपालन में गेम चेंजर बनी फर्मेंटेड फीड

मुर्गीपालन में फर्मेंटेड फीड अंडा उत्पादन बढ़ाने और खर्च घटाने का नया तरीका बन रही है. इससे मुर्गियों की सेहत सुधरती है और अंडों की गुणवत्ता बेहतर होती है.

नोएडा | Updated On: 17 May, 2025 | 10:35 AM

मुर्गीपालन करने वालों के बीच इन दिनों फर्मेंटेड फीड की खूब चर्चा हो रही है. यह फीड मुर्गी आहार होता है, इसे एक खास तरीके से कुछ समय के लिए बिना हवा वाली जगह में रखकर तैयार किया जाता है. इस प्रक्रिया के दौरान फायदेमंद सूक्ष्मजीव (जैसे लैक्टिक एसिड बैक्टीरिया) उस आहार को तोड़ते हैं और उसे ज्यादा पौष्टिक बना देते हैं. इस प्रक्रिया को फर्मेंटेशन कहा जाता है. इससे फीड थोड़ा खट्टा हो जाता है और उसमें अम्ल (एसिड) बढ़ जाता है. इसका असर ये होता है कि मुर्गियों का पाचन ठीक होता है, उनकी सेहत सुधरती है और अंडा उत्पादन भी बढ़ता है. यही वजह है कि आज इसे गेम चेंजर माना जा रहा है.

कैसे बनता है फर्मेंटेड फीड

फर्मेंटेड फीड मतलब ऐसा आहार जो कुछ समय तक बिना हवा वाली जगह में रखा जाता है. इस दौरान उसमें मौजूद अच्छे बैक्टीरिया काम करते हैं और आहार में लैक्टिक एसिड बनाते हैं. इससे फीड खट्टा और आसानी से पचने लायक बन जाता है. यह फीड मुर्गियों की आंतों की सेहत को ठीक रखती है और उन्हें बीमारियों से बचाती है.

फर्मेंटेशन के दो तरीके

सॉलिड-स्टेट फर्मेंटेशन (SSF)- इसमें सूखे अनाज या भूसी को थोड़ा गीला करके रखा जाता है. इसमें कम पानी लगता है और यह फीड सुखा ही रहता है. इसमें फफूंदी और बैक्टीरिया मिलकर काम करते हैं.

सबमर्ज्ड फर्मेंटेशन (SMF)- इसमें गीले सामान जैसे मोलासेस (गुड़ का घोल), शोरबा या खाद्य उद्योग के बचा हुआ पदार्थ डाले जाते हैं। यह तरीका बड़ी कंपनियों या फार्मों में उपयोग होता है.

फायदे क्या हैं

इसके नुकसान?

हालांकि फर्मेंटेड फीड के कई फायदे हैं, लेकिन इसके कुछ नुकसान भी हो सकते हैं. इसकी सही तरीके से तैयारी और रखरखाव में अतिरिक्त समय और मेहनत लगती है. इसके अलावा, यदि सही तापमान और ह्यूमैनिटीज का ध्यान न रखा जाए तो फर्मेंटेशन की प्रक्रिया सही नहीं हो पाती, जिससे सूक्ष्मजीवों का संतुलन गड़बड़ा सकता है.

Published: 17 May, 2025 | 08:30 AM

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