कम खर्चे में लखपति बनाएगी ये खास नस्ल की बकरी, जिसे गांव के लोग कहते हैं चलता-फिरता एटीएम!
अगर आप भी पशुपालन से मोटी कमाई करना चाहते हैं, तो ये बकरी आपके लिए सबसे बेहतरीन विकल्प है. कम देखभाल और मामूली चारे में पलने वाली यह नस्ल अपनी मजबूती के लिए मशहूर है. इसके दूध का औषधीय महत्व और बाजार में मांस की भारी मांग इसे किसानों के लिए एक भरोसेमंद ग्रामीण एटीएम बनाती है.
Ganjam Goat Farming : आज के दौर में हर कोई अच्छा पैसा कमाना चाहता है. ऐसे में आप अगर खेती-किसानी और पशुपालन से जुड़े है, तो आपके लिए एक शानदार विकल्प बन कर सानने आया है. जी हां हम बात करे रहें हैं बकरी पालन की. बकरी पालन के लिए सबसे पहला कदम होता है सही नस्ल का चुनाव करना. आज हम आपको एक ऐसी नस्ल के बारे में बताएंगे जिसे पालकर आप आपनी जेब आसानी से भर सकते है. तो ऐसे में गंजाम नस्ल की बकरी से बेहतर शायद ही कुछ और हो. इसे गांव की भाषा में लोग चलता-फिरता एटीएम भी कहते हैं, क्योंकि जरूरत पड़ने पर यह बकरी किसानों की आर्थिक स्थिति को तुरंत संभाल लेती है.
कम देखभाल, ज्यादा टिकाऊ
गंजाम बकरी की सबसे बड़ी खासियत इसकी सहनशीलता है. चाहे तपती गर्मी हो या ऊबड़-खाबड़ पहाड़ियां, यह नस्ल हर माहौल में खुद को ढाल लेती है. जहां अन्य विदेशी नस्लें बीमार पड़ जाती हैं या उन्हें महंगे चारे की जरूरत होती है, वहां गंजाम बकरी झाड़ियों और कम संसाधनों में भी हंसते-खेलते पल जाती है. छोटे और सीमांत किसानों के लिए यह एक भरोसेमंद साथी है क्योंकि इसकी रोग प्रतिरोधक क्षमता बहुत अधिक होती है, जिससे दवाइयों और रखरखाव का खर्च न के बराबर आता है.
मांस के शौकीनों की पहली पसंद और बेहतरीन बनावट
बाजार में गंजाम बकरे की मांग हमेशा तेज रहती है. इसका शरीर दुबला-पतला लेकिन लंबी टांगों वाला होता है, जो इसे फुर्तीला बनाता है. मुख्य रूप से काले और भूरे रंग में पाई जाने वाली इन बकरियों के लंबे और घुमावदार सींग इनकी पहचान हैं, जो पीछे की ओर मुड़े होते हैं. मांस (चेवन) की गुणवत्ता इतनी शानदार होती है कि कसाई से लेकर आम खरीदार तक सबसे पहले इसी की मांग करते हैं. नर बकरों में दिखने वाली दाढ़ी और गले के नीचे लटकते वॉटल्स इन्हें एक अलग और रौबीला लुक देते हैं.
औषधीय दूध और अनमोल घी का खजाना
सिर्फ मांस ही नहीं, गंजाम बकरी का दूध भी गुणों की खान है. हालांकि यह रोजाना करीब आधा लीटर दूध ही देती है, लेकिन वह दूध पोषण से भरपूर होता है. ग्रामीण इलाकों में ऐसी मान्यता है कि इसके दूध से बना घी औषधीय गुणों से युक्त होता है. स्थानीय लोग बताते हैं कि इस घी का इस्तेमाल कई छोटे-मोटे रोगों के उपचार में किया जाता है. यही कारण है कि यह नस्ल केवल एक पशु नहीं, बल्कि सेहत का छोटा सा दवाखाना भी मानी जाती है.
किसानों की आजीविका का मजबूत आधार
आज के दौर में जब खेती में जोखिम बढ़ रहा है, तब गंजाम बकरी पालन एक सुरक्षित निवेश बनकर उभरा है. मीडिया रिपोर्ट के अनुसार, ओडिशा और आंध्र प्रदेश के हजारों परिवार आज इसी के दम पर अपने बच्चों को पढ़ा रहे हैं और पक्के मकान बनवा रहे हैं. चूंकि यह नस्ल स्थानीय जलवायु के लिए बिल्कुल सटीक है, इसलिए इसके मरने का खतरा कम होता है. कम निवेश में अच्छी नस्ल के बकरे तैयार कर किसान सालाना लाखों रुपये की कमाई कर रहे हैं. संक्षेप में कहें तो, गंजाम बकरी ग्रामीण भारत की खुशहाली का एक काला-भूरा चमकता सितारा है.