अब मछली पालन में नुकसान की चिंता खत्म, बीमा योजना से मत्स्य पालकों को मिलेगा सुरक्षा कवच

मछली पालन करने वाले किसानों के लिए अब बीमा सुविधा शुरू की गई है. मोबाइल एप के जरिए तालाब और मछली उत्पादन को बीमा सुरक्षा मिल सकेगी. प्राकृतिक आपदा या बीमारी से नुकसान होने पर आर्थिक सहायता दी जाएगी. इससे मत्स्य पालन का कारोबार सुरक्षित और भरोसेमंद बनेगा.

नई दिल्ली | Updated On: 14 Feb, 2026 | 04:13 PM

Fish Farming: तालाब में मछलियां पालना आज कई किसानों और युवाओं के लिए कमाई का अच्छा जरिया बन चुका है. लेकिन इस काम में जोखिम भी कम नहीं होते. कभी बाढ़, कभी पानी की बीमारी और कभी तकनीकी गड़बड़ी से मछलियां मर जाती हैं, जिससे भारी नुकसान उठाना पड़ता है. अब इस परेशानी को कम करने के लिए उत्तर प्रदेश सरकार ने मत्स्य पालकों के लिए बीमा की सुविधा शुरू की है. इसके लिए एक खास मोबाइल एप तैयार किया गया है, जिससे मछली पालन का कारोबार पहले से ज्यादा सुरक्षित हो सकेगा.

एप के जरिए होगा मत्स्य पालकों का बीमा

मीडिया रिपोर्ट के अनुसार, उत्तर प्रदेश सरकार की इस नई व्यवस्था के तहत मत्स्य पालक एक मोबाइल एप के माध्यम से अपने तालाब और मछली पालन  इकाई का बीमा करा सकेंगे. प्राकृतिक आपदा, बीमारी या किसी अन्य कारण से मछलियों के नुकसान पर उन्हें मुआवजा मिलेगा. बीमा की सुविधा एक सरकारी बीमा कंपनी के माध्यम से दी जा रही है और प्रीमियम का बड़ा हिस्सा सरकार द्वारा जमा किया जाएगा इस योजना से मत्स्य पालकों को आर्थिक सुरक्षा मिलेगी और वे बिना डर के अपने कारोबार को आगे बढ़ा सकेंगे. बीमा से जुड़े लाभ पाने के लिए सबसे पहले मत्स्य पालकों को एप पर पंजीकरण कराना जरूरी होगा.

तेजी से बढ़ रहा मत्स्य पालन का कारोबार

क्षेत्र में मत्स्य पालन तेजी से फैल रहा है. सरकारी और निजी मिलाकर लगभग 1000 हेक्टेयर तालाबों में मछली पालन किया जा रहा है. एक हेक्टेयर तालाब में करीब 50 कुंतल मछलियों का उत्पादन  होता है. पूरे क्षेत्र में सालाना लगभग 10 हजार टन मछली का उत्पादन हो रहा है. मछली पालन को बढ़ावा देने के लिए पहले भी कई योजनाएं चलाई जा चुकी हैं, जिनकी मदद से लोगों ने तालाब बनाकर इस व्यवसाय की शुरुआत की. लेकिन नुकसान का डर हमेशा बना रहता था, जिसे अब बीमा योजना से कम करने की कोशिश की जा रही है.

चार हेक्टेयर तक मिलेगा योजना का लाभ

इस बीमा योजना के तहत मत्स्य पालकों  को एक हेक्टेयर तालाब पर करीब 25 हजार रुपये तक की प्रोत्साहन राशि मिल सकती है. कोई भी मत्स्य पालक अधिकतम चार हेक्टेयर तक इस योजना का लाभ ले सकता है. यानी एक से ज्यादा तालाब को भी बीमा सुरक्षा में शामिल किया जा सकता है. अगर कोई किसान बड़े स्तर पर मछली पालन करता है, तो उसे लाखों रुपये तक का बीमा कवर मिल सकता है. उदाहरण के तौर पर, बड़े उत्पादन पर लगभग 50 लाख रुपये तक का बीमा सुरक्षा कवच मिलना संभव है.

जोखिम कम, कारोबार ज्यादा सुरक्षित

मत्स्य पालन में सबसे बड़ा खतरा प्राकृतिक आपदाओं और बीमारियों  से होता है. कई बार पानी खराब होने या बाढ़ आने से पूरा उत्पादन खत्म हो जाता है. ऐसी स्थिति में यह बीमा योजना किसानों के लिए सहारा बनेगी. प्रीमियम की कुल राशि का करीब 40 प्रतिशत हिस्सा सरकार अनुदान के रूप में दे रही है, जिससे मत्स्य पालकों पर आर्थिक बोझ कम पड़ता है. किसान विभाग में संपर्क करके या ऑनलाइन आवेदन के जरिए बीमा करा सकते हैं. कुल मिलाकर, यह योजना मत्स्य पालन को सुरक्षित और भरोसेमंद व्यवसाय बनाने की दिशा में एक बड़ा कदम मानी जा रही है. बीमा सुविधा मिलने से अब मत्स्य पालक बिना डर के उत्पादन बढ़ाने पर ध्यान दे सकेंगे और भविष्य में होने वाले नुकसान से खुद को बचा पाएंगे.

एनएफडीपी पंजीकरण के लिए जरूरी जानकारी

एनएफडीपी NFDB के वेबसाइट पर जाकर आप आवेदन कर सकते हैं. पंजीकरण फॉर्म भरते समय कुछ जरूरी जानकारियां देनी होती हैं. सबसे पहले आधार कार्ड से जुड़ा आपका पूरा नाम दर्ज करना होता है. इसके साथ बैंक खाता विवरण जैसे खाता संख्या और आईएफएससी कोड देना जरूरी है. आपको अपनी उद्यम श्रेणी और किस प्रकार की गतिविधि करते हैं, यह भी बताना होगा. इसके अलावा मोबाइल नंबर, ईमेल आईडी और पूरा पता सही-सही भरना अनिवार्य है. सही जानकारी देने पर पंजीकरण प्रक्रिया आसान हो जाती है.

 

Published: 14 Feb, 2026 | 04:30 PM

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