ग्राफ्टेड बैगन की खेती से रिकॉर्ड 155 क्विंटल उत्पादन, किसान ने मॉडर्न तरीके से पाया लाखों का मुनाफा
Chhattisgarh Success Farmer: परंपरागत धान के बदले उद्यानिकी को अपनाकर छत्तीसगढ़ के किसान ने बैंगन की खेती में रिकॉर्ड उत्पादन हासिल किया है. इतना ही नहीं मॉडर्न तकनीकों के जरिए उगाई गई फसल से किसान ने 2.45 लाख रुपये का नेट प्रॉफिट हासिल किया है. अब उससे खेती की तकनीक सीखने दूसरे किसान पहुंच रहे हैं.
छत्तीसगढ़ के किसान नवीन साव ने ग्राफ्टेड विधि के जरिए बैंगन की खेती करके उत्पादन का नया रिकॉर्ड बनाया है. उन्होंने प्रति एकड़ 155 क्विंटल उत्पादन हासिल किया है, जो सामान्य तरीके से केवल 21 क्विंटल तक ही हो सकता है. नवीन ने मॉडर्न खेती की तकनीक में ड्रिप इरीगेशन, ग्राफ्टिंग विधि, मल्चिंग और उन्नत किस्म के बीज बोकर यह उत्पादन हासिल किया है. उन्होंने बैंगन की खेती से 2.45 लाख रुपये का मुनाफा हासिल किया है.
छत्तीसगढ़ सरकार के कृषि विभाग के अनुसार महासमुंद जिले के बसना विकासखंड के ग्राम बोहारपार के प्रगतिशील किसान नवीन साव ने पारंपरिक खेती के ढर्रे से आगे बढ़ते हुए नई तकनीक और विधियों को अपनाकर खेती में मिसाल पेश की है. उन्होंने उद्यानिकी विभाग के मार्गदर्शन में ग्राफ्टेड बैगन की उन्नत खेती को अपनाया है. आज वे अपनी इस अनूठी पहल से अंचल के अन्य किसानों के लिए प्रेरणास्रोत बन गए हैं.
ग्राफ्टिंग विधि से 30 फीसदी तक बढ़ा उत्पादन
ग्राफ्टेड बैंगन की खेती पारंपरिक विधि की तुलना में कहीं अधिक लाभकारी है. इसमें दो अलग-अलग पौधों को जोड़कर एक नया पौधा तैयार किया जाता है, जिससे पौधे की रोग-प्रतिरोधक क्षमता कई गुना बढ़ जाती है और उपज 20-30 प्रतिशत तक अधिक मिलती है. कठिन परिश्रम, नवाचार और आधुनिक कृषि तकनीक के बेहतर समन्वय से किसान किस तरह अपनी तकदीर बदल सकते हैं.
धान की तुलना में पांच गुना से अधिक का मुनाफा
कृषक नवीन साव ने कहा कि वे पूर्व में अपने खेतों में केवल पारंपरिक धान की खेती करते थे, जिससे उन्हें काफी सीमित आय प्राप्त होती थी. धान की फसल से उन्हें प्रति एकड़ लगभग 21 क्विंटल का उत्पादन और करीब 45 हजार 600 रुपए का लाभ मिल पाता था. अपनी आय बढ़ाने के उद्देश्य से उन्होंने वर्ष 2025-26 में राष्ट्रीय कृषि विकास योजना के अंतर्गत ग्राफ्टेड बैगन की खेती प्रारंभ की. उन्होंने अपनी 1.31 हेक्टेयर भूमि पर वैज्ञानिक पद्धति का अनुसरण करते हुए ड्रिप सिंचाई (टपक सिंचाई) और मल्चिंग तकनीक का उपयोग किया. इस आधुनिक प्रबंधन के फलस्वरूप उन्हें बम्पर पैदावार मिली और प्रति एकड़ लगभग 155 क्विंटल बैगन का उत्पादन मिला.
ओडिशा की मंडियों में बेचकर 2.45 लाख मुनाफा कमाया
ग्राफ्टेड बैंगन की फसल रोपाई के लगभग 45-50 दिनों बाद तुड़ाई के लिए तैयार हो जाती है. इसके एक पौधे से 50 किलो तक पैदावार प्राप्त की जा सकती है. पारंपरिक खेती की तुलना में इसका मुनाफा लगभग दोगुना तक हो सकता है. नवीन साव ने अपने इस उन्नत उत्पाद को स्थानीय सरायपाली और पड़ोसी राज्य ओडिशा की प्रमुख मंडियों में लगभग 30 रुपए प्रति किलोग्राम की थोक दर पर विक्रय किया. सभी खर्चों को काटकर उन्होंने इस फसल से 2 लाख 45 हजार रुपए का शुद्ध लाभ हासिल किया है, जो धान की तुलना में पांच गुना से भी अधिक है.
उद्यानिकी विभाग की मदद से मिली सफलता
किसान साव अपनी इस सफलता का श्रेय उद्यानिकी विभाग के अधिकारियों के तकनीकी मार्गदर्शन, शासकीय योजनाओं के समय पर मिले लाभ और आधुनिक कृषि पद्धतियों को सीखने को देते हैं. वे नियमित रूप से कृषि क्षेत्र में हो रहे नए अनुसंधानों की जानकारी रखते हैं और खेतों में नए प्रयोगों को प्राथमिकता देते हैं. कच्चापाल और बोहारपार के आसपास के क्षेत्र के किसान अब लगातार उनके प्रक्षेत्र (फार्म) का भ्रमण कर इन आधुनिक तकनीकों को बारीकी से समझ रहे हैं. नवीन साव की इस आर्थिक प्रगति को देखकर अंचल के कई अन्य किसान भी पारंपरिक फसलों को छोड़कर मुनाफे वाली उद्यानिकी फसलों की ओर तेजी से आकर्षित हो रहे हैं.