Telangana Government: तेलंगाना सरकार ने किसानों को बड़ी राहत देते हुए रायथु भरोसा योजना के तहत करीब 9,000 करोड़ रुपये की सहायता राशि जारी करने का फैसला किया है. यह राशि 30 जून से किसानों के बैंक खातों में भेजी जाएगी और नौ दिनों के भीतर वितरण पूरा कर लिया जाएगा. सरकार का मानना है कि इस आर्थिक सहायता से किसानों को खरीफ सीजन की बुवाई समय पर करने और कृषि कार्यों के लिए जरूरी निवेश जुटाने में मदद मिलेगी. साथ ही किसानों की आर्थिक स्थिति भी मजबूत होगी.
यह फैसला मुख्यमंत्री ए. रेवंत रेड्डी की अध्यक्षता में हुई कैबिनेट बैठक में लिया गया. बैठक के बाद मंत्री एन. उत्तम कुमार रेड्डी, थुम्मला नागेश्वर राव और दानसारी अनसूया ने कहा कि मुख्यमंत्री 30 जून को खम्मम जिले के मधिरा में आयोजित किसान सम्मेलन में रायथु भरोसा योजना के तहत सहायता राशि जारी करने की औपचारिक शुरुआत करेंगे. बैठक में केंद्र सरकार द्वारा मनरेगा में प्रस्तावित बदलावों की समीक्षा करने के लिए एक कैबिनेट उपसमिति बनाने का भी निर्णय लिया गया. यह समिति इन बदलावों के तेलंगाना पर पड़ने वाले प्रभावों का अध्ययन करेगी. इसके अलावा, राज्य सरकार ने केंद्र से मांग करने का फैसला किया है कि रामागुंडम स्थित उर्वरक संयंत्र में बनने वाले यूरिया का बड़ा हिस्सा तेलंगाना को दिया जाए, ताकि किसानों को समय पर पर्याप्त उर्वरक उपलब्ध हो सके.
VB-GRAMG योजना का विरोध भी दर्ज कराएगी सरकार
दरअसल, समिति पहले यह देखेगी कि मनरेगा में प्रस्तावित बदलावों का दूसरे राज्यों पर क्या असर पड़ रहा है. साथ ही यह भी आकलन करेगी कि इन बदलावों से तेलंगाना सरकार पर कितना अतिरिक्त खर्च आएगा. इसके बाद समिति सरकार को आगे की रणनीति के बारे में सुझाव देगी. मंत्रियों ने कहा कि राज्य सरकार केंद्र सरकार को पत्र लिखकर VB-GRAMG योजना का विरोध भी दर्ज कराएगी. सरकार का मानना है कि प्रस्तावित बदलावों से ग्रामीण क्षेत्रों में रोजगार के अवसर कम हो सकते हैं और राज्यों पर आर्थिक बोझ बढ़ सकता है. समिति सभी संबंधित पक्षों से चर्चा करने के बाद अपनी रिपोर्ट और सिफारिशें जल्द सरकार को सौंपेगी.
रामागुंडम उर्वरक संयंत्र में राज्य को मिले हिस्सा
मंत्री थुम्मला नागेश्वर राव ने कहा कि तेलंगाना सरकार केंद्र से मांग करेगी कि रामागुंडम उर्वरक संयंत्र में बनने वाले यूरिया का अधिक हिस्सा राज्य के किसानों को दिया जाए. उनका कहना है कि जब यूरिया तेलंगाना में ही बन रहा है, तो उसे दूसरे राज्यों में भेजने के बजाय स्थानीय किसानों को उपलब्ध कराया जाना चाहिए. इससे परिवहन खर्च कम होगा और खेती के मौसम में उर्वरक की कमी की समस्या भी नहीं होगी. उन्होंने कहा कि केंद्र सरकार ने हर महीने करीब 2 लाख मीट्रिक टन यूरिया देने का वादा किया था, लेकिन पिछले कुछ महीनों से तय मात्रा में आपूर्ति नहीं हो रही है.
मंत्री ने फसलों की खरीद को लेकर भी चिंता जताई. उन्होंने कहा कि राज्य सरकार ने बड़ी मात्रा में धान और करीब 15 लाख मीट्रिक टन मक्का खरीदा है, लेकिन केंद्र की एजेंसियों ने किसानों की फसलों की खरीद उम्मीद के मुताबिक नहीं की. इससे किसानों को अपनी उपज बेचने में परेशानी का सामना करना पड़ रहा है.
फसलों की खरीद सरकारी एजेंसियों के माध्यम से सुनिश्चित हो
मंत्री थुम्मला नागेश्वर राव ने केंद्र सरकार से मांग की कि किसानों की फसलों की खरीद सरकारी एजेंसियों के माध्यम से सुनिश्चित की जाए. उन्होंने कहा कि धान की खरीद भारतीय खाद्य निगम, कपास की खरीद भारतीय कपास निगम और अन्य फसलों की खरीद राष्ट्रीय कृषि सहकारी विपणन संघ के जरिए की जानी चाहिए. उन्होंने कहा कि इस मुद्दे को उठाने के लिए तेलंगाना के मंत्री और सांसद जल्द ही नई दिल्ली जाकर केंद्र सरकार से मुलाकात करेंगे.
सरकार ने किसानों को दी ये सलाह
मंत्री ने किसानों को मौसम को लेकर भी सलाह दी. उन्होंने कहा कि मौसम विभाग के अनुमान के अनुसार इस बार सामान्य से कम बारिश और बीच-बीच में सूखे जैसी स्थिति बनने की आशंका है. ऐसे में किसान पहली बारिश होते ही बुवाई शुरू करने की जल्दबाजी न करें. उन्होंने किसानों से कृषि विभाग के अधिकारियों की सलाह मानने और खेत में पर्याप्त नमी बनने के बाद ही बुवाई करने को कहा. उनके अनुसार, फसल के अच्छे अंकुरण और शुरुआती विकास के लिए आमतौर पर कम से कम 7-7 मिमी की दो अच्छी बारिश होना जरूरी है, ताकि मिट्टी में पर्याप्त नमी बन सके.