सूखा स्थिति के चलते खरीफ फसलों की बुवाई रोकने के निर्देश, इमर्जेंसी फसल मॉडल अपनाएंगे किसान

Kharif Crop Sowing: किसानों के लिए कोंकण कृषि विश्वविद्यालय की ओर से जारी मौसम आधारित कृषि सलाह का सख्ती से पालन करना चाहिए. जबकि, राज्य कृषि विभाग ने सूखे की स्थिति को देखते हुए आपातकालीन फसल योजना मॉडल अपनाने की सलाह किसानों को दी है.

रिजवान नूर खान
नई दिल्ली | Published: 17 Jun, 2026 | 07:28 PM

महाराष्ट्र में सामान्य से कम बारिश दर्ज किए जाने के बाद कृषि विभाग के अधिकारियों और किसानों की चिंता बढ़ गई है. थाने जिला प्रशासन ने किसानों को अभी खरीफ फसलों की बुवाई नहीं करने के निर्देश दिए हैं. इसके साथ ही प्रशासन ने कोंकण कृषि विश्वविद्यालय की ओर से किसानों को उत्पादन घटने और कृषि लागत बढ़ने की चिंताओं के बीज खेती के लिए सलाह जारी की गई है. वहीं, कृषि विभाग ने बारिश में देरी के असर को कम करने के लिए एक आपातकालीन फसल योजना मॉडल भी तैयार किया है और इसके पालन के निर्देश दिए हैं.

समान्य से 74 फीसदी कम बारिश हुई

महाराष्ट्र में जून के पहले पखवाड़े में सामान्य से महज 26 फीसदी बारिश हुई है, जो 74 फीसदी कम है. राज्य मंत्रिमंडल में फसल की स्थिति की समीक्षा रिपोर्ट में बताया गया कि एक जून से 15 जून के बीच राज्य में सामान्य 103.8 मिलीमीटर के मुकाबले 27.4 मिमी बारिश हुई. महाराष्ट्र में जून के पहले हिस्से में सामान्य बारिश का सिर्फ़ 26 फीसदी ही पानी बरसा है, जिसके चलते राज्य सरकार ने किसानों को सलाह दी है कि वे जल्दबाजी में बुवाई न करें.

थाने के किसानों से खरीफ की बुआई रोकने के निर्देश

बारिश में देरी होने के कारण थाने जिला प्रशासन ने किसानों को खरीफ फसलों की बुआई स्थगित करने की सलाह दी है. अधिकारियों ने बुधवार को यह जानकारी देते हुए कहा कि अभी बुवाई करने से अंकुरण नहीं होने का खतरा पैदा हो गया है. जबकि, उत्पादन घटने और कृषि लागत बढ़ने की चिंता है. प्रशासन ने किसानों को खरीफ फसलों की बुवाई टालने की सलाह दी है.

अल नीनो के असर से बारिश न होने के चलते मिट्टी में नमी नहीं

जिला कृषि अधीक्षण अधिकारी रामेश्वर पाचे ने किसानों से अपील की है कि वे बुआई तब तक न करें जब तक कि इलाके में कम से कम 100 मिलीमीटर बारिश न हो जाए, ताकि पौधों के जीवित रहने की संभावना बनी रहे. उन्होंने कहा कि अल नीनो के असर के चलते मॉनसूनी बारिशें शुरू नहीं हुई हैं. इसके चलते बीज को अंकुरित होने के लिए जरूरी नमी नहीं मिलेगी और बीज मर जाएगा. किसानों के लिए डॉ. बालासाहेब सावंत कोंकण कृषि विश्वविद्यालय द्वारा जारी मौसम आधारित कृषि सलाह का सख्ती से पालन करना चाहिए.

आपातकालीन फसल योजना मॉडल अपनाएंगे किसान

कृषि विभाग ने बारिश में देरी के असर को कम करने के लिए एक आपातकालीन फसल योजना मॉडल भी तैयार किया है. इसके तहत सूखे जैसे हालात से निपटने के लिए प्रशासन ने जल्दी तैयार होने वाली धान की किस्मों को अपनाने की सलाह दी है. सलाह में कहा गया है कि नर्सरी के चरण में एक फीसदी यूरिया घोल का छिड़काव किया जाए ताकि पौधों में पानी की कमी सहने की क्षमता विकसित हो सके.

अल नीनो से फसलों के साथ पशुओं की सुरक्षा जरूरी

अधिकारियों ने बताया कि जिला परिषद आधुनिक खेती के तरीकों को बढ़ावा देने के लिए सेस ग्रांट (उपकर अनुदान) के तहत 500 टिलर मशीनें बांटेगी. अधिकारियों ने खरीफ सीजन के उत्पादन को स्थिर करने के लिए सब्सिडी वाले बीज बांटने के साथ-साथ कई तकनीकी और ‘अल नीनो’ जागरूकता अभियान भी चलाए जा रहे हैं. इसके तहत किसानों को फसलों के साथ ही पशुओं के स्वास्थ्य का ध्यान रखने की सलाह दी गई है.

अनाज, खाद और जल भंडार का समझदारी से इस्तेमाल करें

राज्य कैबिनेट की फसल की स्थिति की समीक्षा के अनुसार महाराष्ट्र में जून के पहले पखवाड़े में सामान्य बारिश का केवल 26 फीसदी ही हुआ, जिसके कारण सरकार ने किसानों को फसल की बुवाई में “जल्दबाजी न करने” की सलाह दी है. मॉनसून में देरी और पानी के घटते अनाज, खाद और जल भंडार पर चिंता व्यक्त की और पानी का समझदारी से इस्तेमाल करने की जरूरत पर जोर दिया.

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