पशुपालक सावधान! कीचड़ और नमी से बढ़ रहा खुर गलन का खतरा, ऐसे करें बचाव

बरसात में गीली जमीन और कीचड़ पशुओं के लिए खुर गलन की बड़ी वजह बन सकते हैं. समय पर पहचान न होने पर संक्रमण बढ़कर दूध उत्पादन घटा सकता है. पशु चिकित्सक की सलाह, साफ-सफाई और सूखे वातावरण से गाय-भैंस को इस बीमारी से सुरक्षित रखा जा सकता है.

Saurabh Sharma
नोएडा | Published: 3 Aug, 2026 | 09:45 PM

Foot Rot Disease: बरसात का मौसम जहां पशुओं के लिए राहत लेकर आता है, वहीं कई बीमारियों का खतरा भी बढ़ा देता है. लगातार गीली जमीन, कीचड़ और खराब साफ-सफाई के कारण गाय-भैंस के खुरों में संक्रमण की समस्या तेजी से बढ़ सकती है. शुरुआत में पशु का बार-बार पैर उठाना या लंगड़ाकर चलना सामान्य लग सकता है, लेकिन यह खुर गलन (Foot Rot) जैसी गंभीर बीमारी का संकेत हो सकता है. समय पर ध्यान नहीं देने पर पशु दर्द के कारण चारा कम खाने लगता है और दूध उत्पादन भी प्रभावित हो सकता है. पशु चिकित्सक कुंवर घनश्याम (KVK Noida) के अनुसार, बरसात में पशुओं की सही देखभाल, साफ-सफाई और सूखा वातावरण देकर खुर गलन की समस्या से काफी हद तक बचाव किया जा सकता है.

गीली जमीन और कीचड़ से बढ़ता है खुर गलन का खतरा

पशु चिकित्सक कुंवर घनश्याम के अनुसार, बरसात के मौसम में पशुओं  के खुरों की देखभाल सबसे ज्यादा जरूरी होती है. जब गाय-भैंस लंबे समय तक गीली जमीन, कीचड़ या गंदे पानी में खड़े रहते हैं, तो खुरों में लगातार नमी बनी रहती है. इससे बैक्टीरिया तेजी से पनपते हैं और खुरों के बीच संक्रमण शुरू हो सकता है. धीरे-धीरे खुर नरम होने लगते हैं और उनमें दरार, सूजन या घाव की समस्या पैदा हो सकती है. इसलिए पशुशाला में पानी जमा न होने दें और फर्श को हमेशा सूखा रखने की कोशिश करें. बरसात में थोड़ी-सी लापरवाही पशुपालकों के लिए बड़ा नुकसान बन सकती है.

पैर उठाना और लंगड़ाना बीमारी के शुरुआती संकेत

अगर गाय या भैंस  बार-बार पैर उठा रही है, चलने में परेशानी महसूस कर रही है या लंगड़ाकर चल रही है, तो इसे नजरअंदाज नहीं करना चाहिए. यह खुर गलन की शुरुआत हो सकती है. इसके अलावा खुरों के बीच लालपन, सूजन, बदबू या घाव दिखाई देना भी संक्रमण के लक्षण हो सकते हैं. बीमारी बढ़ने पर पशु दर्द के कारण कम चलना पसंद करता है और चारा खाना भी कम कर सकता है. इसका सीधा असर दूध उत्पादन पर पड़ता है. इसलिए शुरुआती लक्षण दिखते ही पशु की जांच और उपचार शुरू कर देना चाहिए.

सफाई और सही देखभाल से आसानी से करें बचाव

पशु चिकित्सक के अनुसार, खुर गलन से बचाव  के लिए केवल दवा ही नहीं बल्कि साफ-सफाई भी बेहद जरूरी है. पशुशाला में रोजाना गोबर और गंदा पानी साफ करें. पशुओं को सूखे बिछावन पर रखें और कोशिश करें कि वे ज्यादा समय तक कीचड़ या गीली जगह पर खड़े न रहें. यदि खुरों में गंदगी जमा हो गई है तो उन्हें साफ पानी से धोकर अच्छी तरह सुखाएं. पशु चिकित्सक की सलाह के अनुसार हल्के एंटीसेप्टिक घोल या पोटेशियम परमैंगनेट के हल्के घोल से खुरों की सफाई की जा सकती है. किसी भी दवा का इस्तेमाल बिना सलाह के नहीं करना चाहिए.

संतुलित आहार और समय पर इलाज से बचेंगे पशु

खुरों को मजबूत रखने के लिए पशुओं को संतुलित आहार देना भी जरूरी है. हरे चारे के साथ सूखा चारा, खनिज मिश्रण और जरूरी पोषक तत्व देने से पशुओं की रोग प्रतिरोधक क्षमता बेहतर होती है. खराब, सड़ा या फफूंदी लगा चारा पशुओं को नहीं खिलाना चाहिए. अगर किसी पशु में खुर गलन के गंभीर लक्षण दिखाई दें, जैसे गहरा घाव या पस निकलना, तो घरेलू उपायों पर निर्भर नहीं रहना चाहिए और तुरंत पशु चिकित्सक से संपर्क करना चाहिए. संक्रमित पशु को कुछ समय के लिए अलग रखना भी बेहतर होता है, ताकि बीमारी दूसरे पशुओं में न फैले. बरसात के मौसम में नियमित जांच, साफ वातावरण और सही खान-पान अपनाकर पशुपालक अपने पशुओं को खुर गलन जैसी समस्या से बचा सकते हैं. इससे पशु स्वस्थ रहेंगे और दूध उत्पादन भी लगातार बना रहेगा.

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Published: 3 Aug, 2026 | 09:45 PM

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