Success Story: पोल्ट्री वेस्ट से पलटी किस्मत! कचरे से बनाई ऑर्गेनिक खाद, हर सीजन में हो रहा तगड़ा मुनाफा

MP News: मध्य प्रदेश की किसान सरवर जहां ने पोल्ट्री फार्म के कचरे को बेकार समझने की बजाय उसे ऑर्गेनिक खाद में बदलकर नई मिसाल पेश की है. उन्होंने वैज्ञानिक तरीके से इस वेस्ट का उपयोग कर अपनी खेती को ज्यादा उपजाऊ और केमिकल-फ्री बनाया. इससे उनकी लागत कम हुई और आय में भी बढ़ोतरी हुई. आज उनकी यह पहल न सिर्फ पर्यावरण के लिए फायदेमंद है, बल्कि दूसरे किसानों, खासकर महिलाओं के लिए एक बड़ी प्रेरणा बन चुकी है.

नोएडा | Published: 15 Apr, 2026 | 02:24 PM

Women Success Story: मध्य प्रदेश के नौगांव (छतरपुर) की किसान सरवर जहां ने यह साबित कर दिया है कि अगर सोच अलग हो, तो कचरा भी कमाई का बड़ा साधन बन सकता है. जहां अधिकतर लोग पोल्ट्री फार्म से निकलने वाले वेस्ट को बेकार समझकर फेंक देते हैं, वहीं सरवर ने इसी वेस्ट को ऑर्गेनिक खाद में बदलकर कमाल कर दिखाया. उनकी इस अनोखी पहल ने न सिर्फ उनकी खेती को मजबूत और केमिकल-फ्री बनाया, बल्कि उनकी आय में भी शानदार बढ़ोतरी की. आज सरवर की यह सोच और मेहनत कई किसानों, खासकर महिलाओं के लिए एक बड़ी प्रेरणा बन चुकी है.

पोल्ट्री वेस्ट का स्मार्ट उपयोग

पोल्ट्री फार्म में मुर्गियों से निकलने वाला वेस्ट (बीट और बुरादा) आमतौर पर गंदगी और बदबू का कारण बनता है. लेकिन सरवर इसे बेकार नहीं जाने देतीं. वह इसे एक खास प्रक्रिया के जरिए इकट्ठा करती हैं और उसका सही तरीके से उपयोग करती हैं. उनका मानना है कि, हर वेस्ट में एक अवसर छिपा होता है, बस उसे पहचानने की जरूरत होती है.

वैज्ञानिक तरीके से तैयार होती है खाद

सरवर इस वेस्ट को सीधे खेत में इस्तेमाल नहीं करतीं, बल्कि इसे वैज्ञानिक प्रक्रिया से कंपोस्ट में बदलती हैं.

करीब तीन महीनों में यह वेस्ट पूरी तरह सड़कर हाई क्वालिटी वाली जैविक खाद में बदल जाता है.

वैज्ञानिक तरीके से तैयार होती है खाद

खेती में मिला जबरदस्त फायदा

इस ऑर्गेनिक खाद के इस्तेमाल से सरवर की खेती में काफी अच्छे बदलाव आए. सबसे पहले उनकी जमीन ज्यादा उपजाऊ हो गई, जिससे फसल अच्छी होने लगी. फसलों की क्वालिटी भी बेहतर हो गई, इसलिए उन्हें बाजार में अच्छे दाम मिलने लगे. अब उन्हें रासायनिक खाद पर ज्यादा निर्भर नहीं रहना पड़ता, जिससे उनकी खेती ज्यादा प्राकृतिक और सुरक्षित बन गई. साथ ही, खेती में खर्च भी कम हो गया, जिससे उनका मुनाफा बढ़ गया.

आय बढ़ाने का बना नया रास्ता

सरवर ने सिर्फ अपने खेतों तक ही सीमित नहीं रखा, बल्कि अतिरिक्त तैयार खाद को बेचकर अतिरिक्त आय भी कमाना शुरू कर दिया. यानी जो पहले कचरा था, वही अब उनके लिए कमाई का मजबूत सोर्स बन गया है.

पर्यावरण के लिए भी वरदान

यह पहल सिर्फ कमाई तक सीमित नहीं है, बल्कि पर्यावरण के लिए भी बेहद फायदेमंद है:

इस तरह सरवर की यह पहल इको-फ्रेंडली खेती का बेहतरीन उदाहरण बन गई है.

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