Success Story: कभी गरीबी, अभाव और सीमित साधनों के बीच जिंदगी गुजारने वाली हर महिला के मन में एक सवाल जरूर होता है कि क्या हालात कभी बदल सकते हैं? मध्य प्रदेश के हरदोली गांव की भगवती देवी ने इसी सवाल का जवाब अपनी मेहनत और हिम्मत से दिया है. एक साधारण ग्रामीण महिला से लेकर सफल ट्रैक्टर उद्यमी बनने तक का उनका सफर न सिर्फ प्रेरणादायक है, बल्कि यह भी साबित करता है कि सही अवसर और मजबूत इच्छाशक्ति किसी की भी तकदीर बदल सकती है.
SHG से जुड़कर मिली नई दिशा
मध्य प्रदेश सरकार के अनुसार साल 2018 में भगवती देवी ने मध्यप्रदेश राज्य ग्रामीण आजीविका मिशन (NRLM) के तहत ‘विकास स्व-सहायता समूह’ से जुड़ने का फैसला किया. यही उनके जीवन का पहला बड़ा टर्निंग पॉइंट साबित हुआ.
समूह से जुड़ने के बाद उन्होंने:
- बचत करना सीखा
- आर्थिक प्रबंधन की समझ विकसित की
- छोटे स्वरोजगार के अवसरों की जानकारी पाई
धीरे-धीरे आत्मविश्वास बढ़ने लगा और बदलाव की शुरुआत हो गई.
छोटे काम से बड़ी शुरुआत
शुरुआत में भगवती देवी ने बहुत छोटे स्तर से काम शुरू किया. उन्होंने थोड़ा-थोड़ा कर्ज लेकर बकरी पालन और खेती करना शुरू किया, ताकि घर की आमदनी बढ़ सके. इसी बीच उन्हें सरकारी योजनाओं से भी मदद मिली, जिसमें समूह से लोन और आसान पैसे की सुविधा मिली. इस मदद से उनका हौसला बढ़ा और उन्हें आगे बढ़ने का भरोसा मिला.
ट्रैक्टर बना जिंदगी बदलने वाला फैसला
आजिविका मिशन के तहत भगवती देवी को कई योजनाओं से आर्थिक मदद मिली. इसमें सीआईएफ से 10 हजार रुपये, समूह ऋण से 2 हजार रुपये और सीसीएल के तहत 1 लाख रुपये की सहायता शामिल थी. इस मदद का सही उपयोग करते हुए उन्होंने एक बड़ा और सोच-समझकर लिया गया फैसला किया ट्रैक्टर खरीदने का. ट्रैक्टर लेने के बाद उन्होंने अपने गांव में किसानों के लिए जुताई, बुवाई और खेती से जुड़े दूसरे काम शुरू कर दिए. यही कदम उनकी जिंदगी का सबसे बड़ा टर्निंग पॉइंट साबित हुआ. अब उन्हें हर महीने नियमित और सम्मानजनक कमाई होने लगी.
आय में जबरदस्त बढ़ोतरी
ट्रैक्टर से काम शुरू करने के बाद भगवती देवी की आमदनी धीरे-धीरे बढ़ने लगी. सिर्फ ट्रैक्टर सेवा से ही उनकी मासिक कमाई करीब 12 हजार रुपये तक पहुंच गई. इसके साथ ही बकरी पालन और खेती से भी उन्हें अतिरिक्त आमदनी होने लगी. पहले जहां पूरे परिवार की आय सिर्फ लगभग 5 हजार रुपये प्रति माह थी, वहीं अब यह बढ़कर 20 हजार रुपये से भी ज्यादा हो गई है. इस आर्थिक सुधार के साथ उनका आत्मविश्वास भी काफी बढ़ गया है.
आज वे अपने बच्चों को अच्छी शिक्षा दिला रही हैं और परिवार की जरूरतों को सम्मान के साथ पूरा कर रही हैं. गांव में अब उनकी पहचान एक सफल और आत्मनिर्भर महिला उद्यमी के रूप में बन चुकी है.
आत्मनिर्भरता और सम्मान की नई पहचान
आज भगवती देवी न सिर्फ अपने परिवार को बेहतर जीवन दे रही हैं, बल्कि अपने बच्चों को अच्छी शिक्षा भी दिला रही हैं. गांव में उनकी पहचान एक सफल महिला उद्यमी के रूप में बन चुकी है. उनका आत्मविश्वास और सामाजिक सम्मान दोनों बढ़े हैं. भगवती देवी की सफलता ने गांव की अन्य महिलाओं को भी प्रेरित किया है. अब कई महिलाएं स्व-सहायता समूहों से जुड़कर स्वरोजगार की ओर कदम बढ़ा रही हैं.
भगवती देवी की कहानी साबित करती है कि सही मार्गदर्शन, सरकारी सहायता और मजबूत इच्छाशक्ति से कोई भी व्यक्ति अपनी जिंदगी बदल सकता है.