वर्षा आधारित क्षेत्र विकास योजना से 15.73 लाख किसानों को फायदा, 2,251 करोड़ की मदद से बढ़ी आय
बारिश पर निर्भर किसानों के लिए एकीकृत खेती कमाई बढ़ाने का मजबूत विकल्प बन रही है. वर्षा आधारित क्षेत्र विकास कार्यक्रम के तहत किसान फसल के साथ पशुपालन, मछली पालन, बागवानी और मधुमक्खी पालन जोड़ सकते हैं. सरकार किसान परिवार को 30 हजार रुपये की आर्थिक सहायता भी देती है.
बारिश पर निर्भर किसानों के लिए खेती को सिर्फ एक फसल तक सीमित रखने के बजाय अब खेती के साथ पशुपालन, मछली पालन, बागवानी और मधुमक्खी पालन जैसी गतिविधियों को जोड़ने पर जोर दिया जा रहा है. वर्ष 2014-15 से चल रहा वर्षा आधारित क्षेत्र विकास कार्यक्रम किसानों को एकीकृत खेती अपनाने के लिए आर्थिक सहायता और प्रशिक्षण देता है. इससे खेती की लागत और मौसम के जोखिम को संभालने के साथ आय के नए रास्ते तैयार करने की कोशिश की जा रही है.
एक खेत में कई काम, बढ़ेगी किसान की कमाई
वर्षा आधारित क्षेत्र विकास यानी RAD कार्यक्रम का मुख्य उद्देश्य बारिश पर निर्भर क्षेत्रों में किसानों की आमदनी बढ़ाना और खेती को मौसम के उतार-चढ़ाव से सुरक्षित बनाना है. इसके तहत किसानों को एक ही खेत में अलग-अलग फसलों की खेती करने के साथ पशुपालन, बागवानी, मछली पालन और मधुमक्खी पालन जैसी गतिविधियों को जोड़ने के लिए प्रोत्साहित किया जाता है. कार्यक्रम में मल्टी-क्रॉपिंग यानी एक से ज्यादा फसलें, क्रॉप रोटेशन यानी फसल बदल-बदलकर बोना, इंटर-क्रॉपिंग और मिक्स्ड क्रॉपिंग जैसी तकनीकों को बढ़ावा दिया जाता है. इससे किसान केवल एक फसल की कमाई पर निर्भर नहीं रहता और किसी एक फसल को नुकसान होने पर दूसरी गतिविधियों से आय मिल सकती है.
20 हेक्टेयर के क्लस्टर में तैयार होता है मॉडल
RAD कार्यक्रम को क्लस्टर यानी छोटे समूह के रूप में लागू किया जाता है. इसके तहत एक या उससे अधिक आसपास के गांवों को मिलाकर करीब 20 हेक्टेयर का क्लस्टर तैयार किया जाता है. इस पूरे क्षेत्र में स्थानीय जरूरत और मौसम के हिसाब से एकीकृत खेती का मॉडल विकसित किया जाता है. इस व्यवस्था से अलग-अलग सरकारी योजनाओं को एक साथ जोड़ने में मदद मिलती है. साथ ही किसानों की भागीदारी बढ़ती है और सफल खेती मॉडल को दूसरे किसानों तक पहुंचाना आसान होता है.
किसान परिवार को 30 हजार रुपये की आर्थिक मदद
एकीकृत कृषि प्रणाली अपनाने वाले किसानों को आर्थिक सहायता भी दी जाती है. RAD के तहत प्रति किसान परिवार 30,000 रुपये की मदद दी जाती है, ताकि किसान IFS मॉडल को अपनाने के लिए जरूरी गतिविधियां शुरू कर सके. इसके अलावा प्रशिक्षण और क्षमता बढ़ाने से जुड़ी गतिविधियों के लिए प्रत्येक क्लस्टर को 10,000 रुपये की अतिरिक्त सहायता दी जाती है. इसका उद्देश्य किसानों को केवल आर्थिक मदद देना नहीं, बल्कि उन्हें नई तकनीक और बेहतर खेती प्रबंधन की जानकारी देना भी है.
15.73 लाख किसानों को मिला लाभ
कार्यक्रम की शुरुआत से दिसंबर 2025 तक राज्यों को एकीकृत कृषि प्रणाली को बढ़ावा देने के लिए 2,251.98 करोड़ रुपये की केंद्रीय सहायता दी जा चुकी है. इस योजना के तहत करीब 9.53 लाख हेक्टेयर भूमि को शामिल किया गया और 15.73 लाख किसानों को लाभ मिला. कृषि विज्ञान केंद्र यानी KVK भी इस अभियान को आगे बढ़ाने में महत्वपूर्ण भूमिका निभा रहे हैं. KVK किसानों को उनके इलाके और मौसम के अनुसार अलग-अलग IFS मॉडल का प्रदर्शन और प्रशिक्षण देते हैं. वर्ष 2024-25 में KVK ने 4,416 प्रदर्शन किए और विभिन्न IFS मॉडल पर 96,013 किसानों को प्रशिक्षण दिया. वित्त वर्ष 2025-26 में RAD को लागू करने के लिए राज्यों और केंद्र शासित प्रदेशों को 343.86 करोड़ रुपये आवंटित किए गए.