पेट्रोल की बजाय इथेनॉल से चलने वाले वाहन लॉन्च होंगे! केंद्र ने मोटर वाहन संशोधन ड्राफ्ट पेश किया
Ethanol & Flex Fuel Vehicle: केंद्र सरकार ने मोटर वाहन के नए ड्राफ्ट नोटीफिकेशन पेश किया है, जिससे 100 फीसदी इथेनॉल और फ्लेक्स फ्यूल से चलने वाले वाहनों का रास्ता और साफ हो गया है. इससे आयातित कच्चे तेल पर निर्भरता कम होगी और 22 लाख करोड़ रुपये विदेश जाने से बच सकेंगे.
केंद्र सरकार ने मोटर वाहन नियम (CMVR) 1989 में संशोधन का ड्राफ्ट नोटीफिकेशन पेश किया है. इस ड्राफ्ट में औपचारिक रूप से भारत के नियामक ढांचे में E100 (शुद्ध इथेनॉल), E85 और हाइड्रोजन-CNG को शामिल किया गया है. इससे पूरी तरह इथेनॉल से चलने वाले वाहनों को लॉन्च करने का रास्ता खुल गया है. हालांकि, अभी इस ड्राफ्ट पर इंडस्ट्री की आपत्तियों लेने के बाद लागू करने की प्रक्रिया शुरू होगी. केंद्र के इस फैसले का ऑल इंडिया डिस्टिलर्स एसोसिएशन (AIDA) ने स्वागत किया है.
भारत के डिस्टिलरी क्षेत्र की शीर्ष संस्था ऑल इंडिया डिस्टिलर्स एसोसिएशन (AIDA) ने आज सड़क परिवहन और राजमार्ग मंत्रालय (MoRTH) के केंद्रीय मोटर वाहन नियम (CMVR), 1989 में संशोधन करने के निर्णायक कदम का आधिकारिक तौर पर स्वागत किया. यह ड्राफ्ट नोटिफिकेशन औपचारिक रूप से भारत के नियामक ढांचे में E100 (शुद्ध इथेनॉल), E85 और हाइड्रोजन-CNG को शामिल करता है. AIDA इसे इथेनॉल मिश्रण कार्यक्रम की शुरुआत के बाद से सबसे अहम नीतिगत बदलाव मानता है, जो प्रभावी रूप से इथेनॉल को पेट्रोल की जगह स्वतंत्र प्राथमिक ईंधन में बदल देता है.
फ्लेक्स-फ्यूल वाहनों के लिए एक नया युग
एसोसिएशन ने बयान में कहा कि यह नोटिफिकेशन E100 को कानूनी “पहचान पत्र” प्रदान करता है. यह उस नियामक अनिश्चितता को दूर करता है जिसने पहले ऑटोमोबाइल निर्माताओं को ऐसे वाहन लॉन्च करने से रोका था जो पूरी तरह से इथेनॉल पर चलते हैं. इस ड्राफ्ट से पूरी तरह इथेनॉल पर चलने वाले वाहनों को लॉन्च करने का रास्ता खुल गया है.
AIDA के अध्यक्ष विजेंद्र सिंह ने कहा कि “AIDA सरकार के इस दूरदर्शी कदम का स्वागत करता है. वर्षों से इथेनॉल को केवल एक मिश्रण एजेंट के रूप में देखा जाता था. E100 को कानूनी रूप से एक प्राथमिक ईंधन के रूप में मान्यता देकर, सरकार ने डिस्टिलरी उद्योग को उत्पादन बढ़ाने के लिए दीर्घकालिक निश्चितता दे दी है. अब हम विदेशी तेल से स्वतंत्र होकर भारत के परिवहन क्षेत्र को शक्ति देने के लिए तैयार हैं.
वैश्विक अस्थिरता के विरुद्ध आर्थिक कवच
22 लाख करोड़ रुपये के राष्ट्रीय जीवाश्म ईंधन आयात बिल के साथ E100 के लिए यह प्रयास एक रणनीतिक आर्थिक कवच के रूप में कार्य करता है. इथेनॉल मिश्रण कार्यक्रम ने पहले ही 1.70 लाख करोड़ रुपये की विदेशी मुद्रा बचाई है, और ये नए नियम बचत को और बढ़ा देंगे. AIDA के वाइस प्रेसिडेंट कुशल मित्तल ने कहा कि “हम इस ड्राफ्ट की तकनीकी बारीकियों का स्वागत करते हैं. नियम 115 को साफ करके और एमिशन टेस्टिंग के नोटेशन को आसान बनाकर सरकार ने ARAI जैसी टेस्टिंग एजेंसियों के लिए ‘नौकरशाही की रुकावट’ को दूर कर दिया है. इससे यह पक्का होता है कि फ्लेक्स फ्यूल और हाइब्रिड गाड़ियां रिकॉर्ड समय में ड्राइंग बोर्ड से भारतीय सड़कों तक पहुंच सकती हैं.
किसानों के लिए सीधा फायदा
हाई ब्लेंड इथेनॉल एक 100% स्वदेशी फ्यूल है जो गन्ने और अनाज से बनता है. नया ड्राफ्ट नोटीफिकेशन यह पक्का करता है कि एनर्जी पर होने वाला खर्च देश के अंदर ही रहे, जिससे ग्रामीण अर्थव्यवस्था को सीधा फायदा हो. AIDA की डिप्टी डायरेक्टर जनरल भारती बालाजी ने आगे कहा कि “AIDA इस कदम का भारतीय किसानों के लिए एक ऐतिहासिक जीत के तौर पर स्वागत करती है. E100 की हर बूंद विदेशी तेल उत्पादकों से हमारे अपने कृषि प्रधान क्षेत्रों की ओर धन के बदलाव को दिखाती है. हम E85 और E100 फ्यूल की इस नई मांग को पूरा करने के लिए एक मजबूत और बिना रुकावट वाली सप्लाई चेन पक्का करने के लिए प्रतिबद्ध हैं.
केंद्र के ड्राफ्ट की प्रमुख बातें
- कानूनी मान्यता: E100 और हाइड्रोजन-CNG अब आधिकारिक तौर पर “टाइप अप्रूव्ड” ऑटोमोटिव फ्यूल हैं.
- व्यावसायिक लॉन्चपैड: ऑटोमोबाइल OEM अब कानूनी तौर पर बड़े पैमाने पर फ्लेक्स फ्यूल गाड़ियां (FFVs) बना सकते हैं और उन्हें सर्टिफाई कर सकते हैं.
- ऊर्जा संप्रभुता: कच्चे तेल के आयात में भारी कमी, जिससे भारत की मैक्रोइकोनॉमिक स्थिरता मजबूत होती है.
- जीरो-कार्बन की ओर कदम: हाई-ब्लेंड इथेनॉल भारत के लिए अपने ‘नेट जीरो’ जलवायु लक्ष्यों को पाने का एक अहम जरिया है.