पुण्यतिथि: 44 चीनी मिलों से लेकर किसान कर्ज तक, जानिए किसानों के लिए क्या-क्या कर गए अजीत सिंह

चौधरी अजीत सिंह को हमेशा किसान और मजदूर वर्ग के नेता के रूप में देखा गया. उन्होंने राजनीति को केवल सत्ता तक सीमित नहीं रखा, बल्कि इसे किसानों की समस्याओं को उठाने का माध्यम बनाया. जब भी उन्हें सरकार में जिम्मेदारी मिली, उन्होंने किसानों के हित में फैसले लेने की कोशिश की. यही वजह थी कि ग्रामीण इलाकों में उनकी पकड़ बेहद मजबूत मानी जाती थी.

नई दिल्ली | Published: 6 May, 2026 | 10:11 AM

Ajit Singh farmer leader: देश की राजनीति में कुछ नेता ऐसे होते हैं, जिनकी पहचान सिर्फ राजनीति तक सीमित नहीं रहती, बल्कि वे आम लोगों के दिलों में अपनी अलग जगह बना लेते हैं. अजीत सिंह ऐसे ही नेताओं में शामिल थे. शांत स्वभाव, साफ छवि और किसानों के हितों के लिए लगातार संघर्ष करने वाले चौधरी अजीत सिंह आज भले ही हमारे बीच नहीं हैं, लेकिन उनके काम और विचार आज भी लाखों किसानों को याद हैं.

6 मई 2021 को कोरोना संक्रमण से लड़ते हुए उनका निधन हो गया था. उनके जाने से सिर्फ एक राजनीतिक नेता का नहीं, बल्कि किसानों की मजबूत आवाज का भी अंत हो गया. पश्चिमी उत्तर प्रदेश से लेकर देशभर के किसान आज भी उन्हें अपने नेता के रूप में याद करते हैं. आज उनकी पुण्यतिथि पर जानते हैं कि उन्हें क्यों किसानों का साथी कहा जाता था.

किसानों और मजदूरों की आवाज बने अजीत सिंह

चौधरी अजीत सिंह को हमेशा किसान और मजदूर वर्ग के नेता के रूप में देखा गया. उन्होंने राजनीति को केवल सत्ता तक सीमित नहीं रखा, बल्कि इसे किसानों की समस्याओं को उठाने का माध्यम बनाया.

जब भी उन्हें सरकार में जिम्मेदारी मिली, उन्होंने किसानों के हित में फैसले लेने की कोशिश की. यही वजह थी कि ग्रामीण इलाकों में उनकी पकड़ बेहद मजबूत मानी जाती थी. पश्चिमी उत्तर प्रदेश में उन्होंने किसान राजनीति को नई दिशा दी. वे हमेशा गांव, खेती और किसान की बात करते थे. उनकी सभाओं में बड़ी संख्या में किसान पहुंचते थे क्योंकि लोग मानते थे कि अजीत सिंह उनकी समस्याओं को समझते हैं.

कौमी एकता और भाईचारे के पक्षधर

चौधरी अजीत सिंह केवल किसान राजनीति तक सीमित नहीं थे. वे हिंदू-मुस्लिम एकता और सामाजिक भाईचारे के भी मजबूत समर्थक माने जाते थे. उन्होंने हमेशा समाज को जोड़ने वाली राजनीति की बात की. पश्चिमी उत्तर प्रदेश में कई बार तनावपूर्ण हालात बने, लेकिन उन्होंने लोगों को शांति और भाईचारे का संदेश दिया.

बेदाग राजनीतिक जीवन की मिसाल

आज के दौर में जहां राजनीति में आरोप-प्रत्यारोप आम हो गए हैं, वहीं चौधरी अजीत सिंह का राजनीतिक जीवन काफी हद तक बेदाग माना जाता है. उन्होंने लंबे समय तक राजनीति की, लेकिन उनकी छवि एक ईमानदार और सादगी पसंद नेता की रही. लोग उन्हें उनकी साफगोई और सरल व्यवहार के लिए भी याद करते हैं.

केंद्रीय मंत्री रहते किसानों के लिए लिए कई बड़े फैसले

चौधरी अजीत सिंह ने अलग-अलग सरकारों में कई अहम मंत्रालय संभाले. उन्होंने हर जिम्मेदारी में किसानों और ग्रामीण विकास को प्राथमिकता देने की कोशिश की.

चीनी मिलों की स्थापना से किसानों को मिला फायदा

साल 1989 में जब वे वीपी सिंह सरकार में केंद्रीय वाणिज्य एवं उद्योग मंत्री बने, तब उन्होंने देश में 44 चीनी मिलों की स्थापना कराई. इस फैसले का सबसे बड़ा फायदा गन्ना किसानों को मिला. चीनी मिलें बढ़ने से किसानों को अपनी फसल बेचने के ज्यादा अवसर मिले और रोजगार के नए रास्ते भी खुले.

गेहूं और चीनी के आयात पर लगवाई रोक

पीवी नरसिम्हा राव सरकार में खाद्य प्रसंस्करण उद्योग मंत्री रहते हुए उन्होंने विदेशों से गेहूं और चीनी के आयात पर रोक लगवाने में अहम भूमिका निभाई. इस फैसले का उद्देश्य देश के किसानों को नुकसान से बचाना था, ताकि विदेशी उत्पादों की वजह से भारतीय किसानों की फसल के दाम प्रभावित न हों.

किसान क्रेडिट कार्ड पर ब्याज कम कराया

अटल बिहारी वाजपेयी सरकार में कृषि मंत्री के रूप में भी उन्होंने कई महत्वपूर्ण फैसले लिए. उन्होंने किसान क्रेडिट कार्ड पर मिलने वाले कर्ज के ब्याज को कम कराने का काम किया. इससे छोटे और मध्यम किसानों को राहत मिली और खेती के लिए सस्ता कर्ज उपलब्ध हो सका.

जमीन अधिग्रहण में किसानों को दिलाया ज्यादा मुआवजा

मनमोहन सिंह सरकार में उड्डयन मंत्री रहते हुए उन्होंने भूमि अधिग्रहण कानून में बदलाव करवाने में भूमिका निभाई. इस बदलाव के बाद किसानों की जमीन सर्किल रेट से ज्यादा कीमत पर अधिग्रहित होने लगी. इससे किसानों को पहले के मुकाबले बेहतर मुआवजा मिलने लगा.

बागपत और पश्चिमी यूपी के विकास में अहम योगदान

चौधरी अजीत सिंह ने अपने क्षेत्र बागपत और आसपास के इलाकों के विकास के लिए भी कई काम कराए. उन्होंने प्रधानमंत्री ग्राम सड़क योजना के तहत बागपत जिले को सबसे पहले संतृप्त कराया. इससे गांवों की सड़क व्यवस्था मजबूत हुई और लोगों को बेहतर कनेक्टिविटी मिली.

इसके अलावा बागपत में चौधरी चरण सिंह राष्ट्रीय पशु स्वास्थ्य संस्थान की स्थापना, सिंचाई विभाग के भवनों का विकास, पीडब्ल्यूडी गेस्ट हाउस का सुधार और बिजरौल में बड़े पशु अस्पताल के निर्माण जैसे कई कार्य कराए गए.

नहर परियोजना से किसानों को मिला पानी

देवबंद से 55 किलोमीटर लंबी नहर की खुदाई भी उनके बड़े कार्यों में गिनी जाती है. इससे हजारों किसानों को सिंचाई की सुविधा मिली और खेती को बड़ा सहारा मिला.

छोटे राज्यों के समर्थक थे अजीत सिंह

चौधरी अजीत सिंह हमेशा छोटे राज्यों के पक्षधर रहे. वे मानते थे कि छोटे राज्यों में विकास तेजी से हो सकता है. उन्होंने पश्चिमी उत्तर प्रदेश को अलग राज्य बनाने की मांग को लेकर कई बार आंदोलन भी किए.

किसानों के दिलों में आज भी जिंदा हैं अजीत सिंह

भले ही चौधरी अजीत सिंह अब इस दुनिया में नहीं हैं, लेकिन किसानों के बीच उनकी पहचान आज भी मजबूत बनी हुई है. किसान उन्हें ऐसे नेता के रूप में याद करते हैं, जिसने सत्ता में रहते हुए भी गांव, खेती और किसान को कभी नहीं भुलाया. उनकी राजनीति केवल भाषणों तक सीमित नहीं रही, बल्कि जमीन पर काम करने वाली राजनीति रही. यही वजह है कि उनका नाम आज भी किसान राजनीति के बड़े नेताओं में लिया जाता है.

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