खाद संकट पर भड़के किसानों का देशव्यापी आंदोलन, हरियाणा से राजस्थान तक नारेबाजी-पुतले जलाए
किसानों ने देश के पांच राज्यों में बड़े पैमाने पर पुतला दहन प्रदर्शन किया. पंजाब के 74, हरियाणा के 5 तथा राजस्थान के 9 स्थानों सहित अनेक जगहों पर विरोध प्रदर्शन किए गए और केंद्र सरकार के खिलाफ नारेबाजी करते हुए बड़े आंदोलन की चेतावनी दी है.
खाद किल्लत समेत अन्य मुद्दों को लेकर नाराज किसानों ने देशभर में विरोध प्रदर्शन किया. किसानों ने पंजाब, मध्य प्रदेश, राजस्थान, हरियाणा समेत अन्य हिस्सों में केंद्र सरकार के पुतले जलाए और नारेबाजी की. ऑल इंडिया किसान मजदूर मोर्चा की कॉल पर जुटे किसानों ने कहा कि केंद्र की किसान विरोधी नीतियों ने खेती को बर्बाद कर दिया है. किसान कर्ज के जाल में फंसे हुए हैं और उनकी फसलों का सही दाम नहीं मिल रहा है. किसानों ने कहा कि जबरन भूमि अधिग्रहण बंद किया जाए तथा डीजल-पेट्रोल-रसोई गैस की बढ़ती कीमतों पर रोक लगाई जाए.
ऑल इंडिया किसान मजदूर मोर्चा (केएमएम) के आह्वान पर आज पंजाब, हरियाणा, राजस्थान, मध्य प्रदेश और बिहार सहित देश के 5 राज्यों में किसानों और मजदूरों के ज्वलंत मुद्दों को लेकर बड़े पैमाने पर पुतला दहन और विरोध प्रदर्शन किए गए. मोर्चा नेताओं ने कहा कि देशभर में यूरिया खाद का गंभीर संकट पैदा हो चुका है. किसानों को सरकारी दरों पर यूरिया उपलब्ध नहीं हो रहा है, जबकि अनेक स्थानों पर निजी डीलरों द्वारा यूरिया की कालाबाजारी की जा रही है. सहकारी समितियों में भी किसानों को यूरिया के साथ जबरन नैनो यूरिया और अन्य अनावश्यक सामग्री दी जा रही है. कृषि विभाग इस मामले में अपनी जिम्मेदारी निभाने में पूरी तरह विफल रहा है. मोर्चा ने मांग की कि किसानों को उनकी आवश्यकता के अनुसार तुरंत यूरिया उपलब्ध कराया जाए तथा कालाबाजारी करने वालों के खिलाफ सख्त कार्रवाई की जाए.
खेती की लागत बढ़ने से कर्ज में जा रहे किसान
नेताओं ने कहा कि डीजल, पेट्रोल और रसोई गैस की कीमतों में लगातार वृद्धि हो रही है, जिससे खेती की लागत और आम लोगों का घरेलू खर्च बेतहाशा बढ़ गया है. अंतरराष्ट्रीय बाजार में कच्चे तेल की कीमतों में गिरावट के बावजूद जनता को कोई राहत नहीं दी जा रही. दूसरी ओर किसानों को फसलों के न्यूनतम समर्थन मूल्य में नाममात्र की वृद्धि दी जाती है, जबकि खेती के लिए आवश्यक बीज, खाद, कीटनाशक, डीजल और अन्य सभी इनपुट की कीमतों में भारी बढ़ोतरी की जा रही है.
कई राज्यों में जबरन भूमि अधिग्रहण नीति पर नाराजगी
मोर्चा ने राजस्थान, मध्य प्रदेश, बिहार, पंजाब, हरियाणा तथा अन्य राज्यों में किसानों की इच्छा के विरुद्ध जबरन भूमि अधिग्रहण की नीति की कड़ी निंदा की. नेताओं ने कहा कि विकास के नाम पर कॉर्पोरेट घरानों को लाभ पहुंचाने के लिए उपजाऊ कृषि भूमि छीनी जा रही है, जिससे लाखों किसान और ग्रामीण परिवार बेरोजगारी तथा विस्थापन का शिकार हो रहे हैं. उन्होंने मांग की कि किसानों की सहमति के बिना कोई भी भूमि अधिग्रहित न की जाए.
अमेरिकी एग्री ट्रेड डील किसानों को बर्बाद कर देगी
नेताओं ने भारत-अमेरिका व्यापार एवं कृषि समझौते का भी विरोध किया. उन्होंने कहा कि अंतिम चरण में पहुंच चुका यह समझौता भारतीय कृषि के लिए घातक सिद्ध होगा. पहले से ही किसानों को अपनी फसलों का लाभकारी मूल्य नहीं मिल रहा है. ऐसे में विदेशों से सस्ते कृषि उत्पादों के आयात से भारतीय किसानों की आर्थिक स्थिति और खराब होगी। इसलिए इस समझौते को तुरंत रद्द किया जाए.
मांगों को पूरा नहीं किया तो बड़े स्तर पर आंदोलन की चेतावनी
मोर्चा ने पटियाला में आंदोलनकारियों पर किए गए पुलिस लाठीचार्ज की कड़े शब्दों में निंदा करते हुए कहा कि लोकतंत्र में शांतिपूर्ण संघर्ष करना प्रत्येक नागरिक का संवैधानिक अधिकार है. सरकारों को जनसंगठनों की जायज मांगों को स्वीकार करना चाहिए तथा आंदोलनकारियों पर पुलिस दमन बंद करना चाहिए. ऑल इंडिया किसान मजदूर मोर्चा ने चेतावनी दी कि यदि खाद की कमी, महंगाई, भूमि अधिग्रहण तथा किसान-मजदूरों से संबंधित अन्य मांगों का शीघ्र समाधान नहीं किया गया तो आंदोलन को और तेज तथा व्यापक बनाया जाएगा.