जलगांव में 200 करोड़ की लागत से बनेगा केला क्लस्टर, केंद्र से मिली मंजूरी.. इस तरह की होंगी लेटेस्ट सुविधाएं

केद्रीय कृषि मंत्री शिवराज सिंह चौहान ने कहा कि अक्सर किसान जहां फसल उगाते हैं, वहां उन्हें कम दाम मिलता है, जबकि वही फसल शहरों में महंगे दाम पर बिकती है. इस अंतर को कम करने के लिए सरकार काम कर रही है और राज्य सरकारों के साथ मिलकर समाधान निकाला जाएगा.

नोएडा | Updated On: 19 Mar, 2026 | 11:05 PM

Maharashtra News: केंद्र सरकार ने महाराष्ट्र के जलगांव के केला किसानों को बहुत बड़ा गिफ्ट दिया है. सरकार ने किसानों की मांग पर 200 करोड़ रुपये के केला क्लस्टर को मंजूरी दे दी है. इस क्लस्टर में आधुनिक खेती को बढ़ावा देने के लिए गुड एग्रीकल्चर प्रैक्टिस के साथ सभी जरूरी सुविधाएं विकसित की जाएंगी. सरकार को उम्मीद है कि उसके इस फैसले से केला किसानों को काफी फायदा होगा. उन्हें उनकी उपज का उचित रेट मिलेगा और उनकी कमाई बढ़ेगी.

इस क्लस्टर के बनने से किसान अपनी उपज को लंबे समय तक स्टोर कर सकते हैं. इससे फसल की बर्बादी  में कमी आएगी और किसानों को बेहतर मार्केट मिलेगा. साथ ही किसानों को यहां पर फ्रूट कवर, बायो-कंट्रोल, मैकेनाइजेशन और प्री-कूलिंग यूनिट जैसी सुविधाएं मिलेंगी. इसके अलावा MIDH और एग्रीकल्चर इन्फ्रास्ट्रक्चर फंड के तहत कोल्ड स्टोरेज बनाने पर भारी सब्सिडी दी जाएगी. स्थानीय किसानों का कहना है कि कोल्ड स्टोरे की सुविधा होने पर अब उनकी फसल की शेल्फ लाइफ बढ़ जाएगी.

क्लस्टर में होंगी इस तरह की सुविधाएं

दरअसल, इसकी जानकारी केंद्रीय कृषि मंत्री शिवराज सिंह चौहान ने अपने जलगांव दौरे के दौरान दी. कृषि मंत्री ने कहा कि जलगांव, जिसे खानदेश की धरती, स्वर्ण नगरी और बनाना सिटी के नाम से जाना जाता है, वहां केला उत्पादक किसानों के लिए बड़ी पहल की जा रही है. किसानों की मांग पर सरकार ने 200 करोड़ रुपये के केला क्लस्टर को मंजूरी दे दी है. इस क्लस्टर में आधुनिक खेती  को बढ़ावा देने के लिए गुड एग्रीकल्चर प्रैक्टिस के साथ सभी जरूरी सुविधाएं विकसित की जाएंगी. उन्होंने केला किसानों से चर्चा की और उनकी परेशानियों को जाना. कृषि मंत्री शिवराज सिंह चौहान ने जानकारी देते हिए कहा कि इस क्लस्टर में राइपनिंग चेंबर, रेफ्रिजरेटेड वैन, एक्सपोर्ट और प्रोसेसिंग की सुविधाएं भी विकसित की जाएंगी, जिससे किसानों को बेहतर दाम मिल सके.

क्या बोले केंद्रीय कृषि मंत्री

कृषि मंत्री ने कहा कि अक्सर किसान जहां फसल उगाते हैं, वहां उन्हें कम दाम मिलता है, जबकि वही फसल शहरों में महंगे दाम पर बिकती है. इस अंतर को कम करने के लिए सरकार काम कर रही है और राज्य सरकारों के साथ मिलकर समाधान निकाला जाएगा. उन्होंने बताया कि केला जैसी फसलों को गेहूं-चावल की तरह MSP पर लंबे समय तक स्टोर नहीं किया जा सकता, इसलिए ऐसा मॉडल तैयार किया जा रहा है जिसमें बाजार भाव कम होने पर लागत और बाजार कीमत के बीच का अंतर किसानों को दिया जा सके.

‘पीएम आशा’ योजना के तहत नए विकसित होंगे मॉडल

उन्होंने कहा कि इस तरह के प्रयोग मिर्च और आम में किए जा चुके हैं और ‘पीएम आशा’ योजना के तहत नए मॉडल विकसित किए जा रहे हैं. साथ ही उन्होंने ज्यादा कीटनाशक और रासायनिक खाद के इस्तेमाल पर चिंता जताते हुए कहा कि इससे मिट्टी की सेहत खराब हो रही है, ऑर्गेनिक कार्बन घट रहा है और जमीन धीरे-धीरे कठोर होती जा रही है. उन्होंने किसानों से अपील की कि वे धरती की सेहत का ध्यान रखें, ताकि खेती लंबे समय तक टिकाऊ बनी रहे.

प्राकृतिक खेती को अपनाएं किसान

कृषि मंत्री ने कहा कि हमें यह संकल्प लेना चाहिए कि हम धरती माता का शोषण नहीं, बल्कि संतुलित उपयोग करेंगे और उनकी सेहत का ध्यान रखेंगे. हमें खेती ऐसे करनी चाहिए जिससे मिट्टी को नुकसान न पहुंचे. उन्होंने कहा कि सही तरीके से की गई प्राकृतिक खेती  से उत्पादन कम नहीं होता, बल्कि जमीन की क्षमता बढ़ती है. किसानों से अपील करते हुए उन्होंने कहा कि वे पहले थोड़ी जमीन पर प्राकृतिक खेती का प्रयोग करें. साथ ही उन्होंने बताया कि प्रधानमंत्री के नेतृत्व में प्राकृतिक खेती मिशन भी शुरू किया गया है, ताकि इसे आगे बढ़ाया जा सके.

 

 

Published: 20 Mar, 2026 | 06:15 AM

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