बस्ती के शीरे ने विदेश में मचाई धूम! 25 हजार कुंतल निर्यात से यूपी को मिले 5 लाख डॉलर

उत्तर प्रदेश के बस्ती जिले से 25 हजार कुंतल शीरा विदेश भेजा गया है. सरकार के मुताबिक, इससे करीब 5 लाख डॉलर की विदेशी मुद्रा मिली. वहीं पहली तिमाही में यूपी के आबकारी निर्यात में 45.4 प्रतिशत की बढ़ोतरी हुई, जिससे किसानों और जुड़े कारोबारों को फायदा मिल रहा है.

नोएडा | Updated On: 8 Sep, 2026 | 08:00 PM

उत्तर प्रदेश के खेतों में पैदा होने वाला गन्ना अब सिर्फ चीनी बनाने तक सीमित नहीं रह गया है. गन्ने से निकलने वाले शीरे की भी विदेशों में मांग बढ़ रही है. इसी कड़ी में उत्तर प्रदेश के बस्ती जिले से हाल ही में 25 हजार कुंतल शीरा विदेश भेजा गया है. सरकार के अनुसार, इस निर्यात से प्रदेश को करीब 5 लाख अमेरिकी डॉलर की विदेशी मुद्रा मिली है. खास बात यह है कि शीरे से हुई यह कमाई प्रदेश के मुख्य आबकारी निर्यात के आंकड़ों से अलग और अतिरिक्त है.

पहली तिमाही में 45.4 प्रतिशत बढ़ा यूपी का आबकारी निर्यात

उत्तर प्रदेश सरकार की नई तीन वर्षीय आबकारी निर्यात नीति 2026-29 के तहत राज्य से होने वाले निर्यात  को बढ़ावा दिया जा रहा है. सरकारी आंकड़ों के अनुसार, वित्तीय वर्ष 2026-27 की पहली तिमाही यानी अप्रैल से जून 2026 के दौरान उत्तर प्रदेश के आबकारी निर्यात में 45.4 प्रतिशत की बढ़ोतरी दर्ज की गई है. इस दौरान देश के स्तर पर आबकारी निर्यात में 18.3 प्रतिशत की वृद्धि हुई. वहीं, उत्तर प्रदेश का आबकारी निर्यात अप्रैल-जून 2026 में बढ़कर 127.8 लाख डॉलर पहुंच गया, जबकि पिछले साल इसी अवधि में यह 87.9 लाख डॉलर था. यानी एक साल में करीब 39.9 लाख डॉलर की अतिरिक्त बढ़ोतरी दर्ज की गई. बस्ती से मिले शीरे के 5 लाख डॉलर इस आंकड़े से अलग हैं.

गन्ने से विदेशी बाजार तक बन रही पूरी कड़ी

गन्ने से चीनी  बनाने के दौरान शीरा एक महत्वपूर्ण उप-उत्पाद के रूप में निकलता है. अब इसी शीरे को विदेशों में भेजकर उत्तर प्रदेश के लिए अतिरिक्त कमाई का रास्ता तैयार हो रहा है. बस्ती से हुआ 25 हजार कुंतल शीरे का निर्यात इसी बदलती तस्वीर को दिखाता है. किसी कृषि उत्पाद के खेत से निकलकर विदेशी बाजार तक पहुंचने के पीछे कई लोगों और कारोबारों की भूमिका होती है. इसमें उत्पादन के साथ प्रसंस्करण, पैकेजिंग, भंडारण, परिवहन और माल पहुंचाने की व्यवस्था भी शामिल होती है. निर्यात बढ़ने से इन क्षेत्रों में भी काम और कारोबार बढ़ने की उम्मीद रहती है.

किसानों से लेकर पैकेजिंग कारोबार तक फायदा

आबकारी विभाग के अनुसार, प्रदेश में निर्यात बढ़ने का फायदा केवल फैक्ट्रियों और निर्यातकों  तक सीमित नहीं है. इसका असर गन्ने, शीरे और अनाज जैसे कृषि उत्पादों से जुड़े लोगों तक भी पहुंचता है. निर्यात की मांग बढ़ने पर कच्चे माल की जरूरत बढ़ती है, जिससे इससे जुड़े कारोबार को गति मिल सकती है. इसके अलावा कांच की बोतल, ढक्कन, लेबल, पैकेजिंग सामग्री, भंडारण और परिवहन से जुड़े कारोबारों को भी फायदा मिल रहा है. इस तरह खेत में तैयार होने वाले गन्ने से निकलने वाला शीरा अब प्रदेश की ग्रामीण अर्थव्यवस्था को विदेशी बाजार से जोड़ने में अहम भूमिका निभा रहा है. उत्तर प्रदेश में बढ़ता कृषि और आबकारी निर्यात यह संकेत दे रहा है कि राज्य के कृषि उत्पादों के लिए विदेशी बाजार में नए अवसर बन रहे हैं. बस्ती से शीरे का निर्यात इसी बढ़ती निर्यात श्रृंखला की एक अहम कड़ी माना जा रहा है.

Published: 8 Sep, 2026 | 09:30 PM

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