अब झीलों और बांधों पर लगेंगे सोलर पैनल, केंद्र सरकार की 5,070 करोड़ रुपये की नई योजना से बढ़ेगी स्वच्छ ऊर्जा
Surya Sarovar Yojana: केंद्र सरकार ने 5,070 करोड़ रुपये की प्रधानमंत्री सूर्य सरोवर योजना को मंजूरी दे दी है. इस योजना के तहत देश के बांधों, झीलों और जलाशयों पर फ्लोटिंग सोलर पैनल लगाए जाएंगे. सरकार का लक्ष्य 2030 तक 5,000 मेगावाट फ्लोटिंग सोलर क्षमता विकसित करना है.
PM Surya Sarovar Yojana: देश में स्वच्छ ऊर्जा को बढ़ावा देने के लिए केंद्र सरकार ने एक बड़ा फैसला लिया है. केंद्रीय मंत्रिमंडल ने 5,070 करोड़ रुपये की प्रधानमंत्री सूर्य सरोवर योजना को मंजूरी दे दी है. इस योजना के तहत देशभर के बांधों, झीलों, जलाशयों और अन्य बड़े जल स्रोतों पर फ्लोटिंग सोलर पैनल लगाए जाएंगे. सरकार का लक्ष्य साल 2030 तक 5,000 मेगावाट (5 गीगावाट) फ्लोटिंग सोलर बिजली उत्पादन क्षमता तैयार करना है. सरकार का मानना है कि इस योजना से एक ओर स्वच्छ बिजली का उत्पादन बढ़ेगा, वहीं दूसरी ओर जमीन पर सोलर प्लांट लगाने की जरूरत भी कम होगी.
क्या है प्रधानमंत्री सूर्य सरोवर योजना?
प्रधानमंत्री सूर्य सरोवर योजना का उद्देश्य देश के जलाशयों और झीलों की खाली सतह का उपयोग बिजली उत्पादन के लिए करना है. इसके तहत पानी की सतह पर खास फ्लोटिंग प्लेटफॉर्म लगाए जाएंगे, जिन पर सोलर पैनल स्थापित किए जाएंगे. इन सोलर पैनलों से बनने वाली बिजली का उपयोग राज्यों की बिजली जरूरतों को पूरा करने और स्वच्छ ऊर्जा उत्पादन बढ़ाने में किया जाएगा. इससे पारंपरिक ऊर्जा स्रोतों पर निर्भरता भी कम होगी.
सरकार देगी आर्थिक सहायता
इस योजना के तहत सरकार परियोजनाओं को आर्थिक सहायता भी देगी. किसी भी फ्लोटिंग सोलर परियोजना के शुरू होने और सफलतापूर्वक चालू होने के बाद प्रति मेगावाट एक करोड़ रुपये की केंद्रीय वित्तीय सहायता दी जाएगी. इसके अलावा परियोजना शुरू होने से पहले व्यवहार्यता अध्ययन (फीजिबिलिटी स्टडी), जोखिम आकलन और पर्यावरणीय प्रभाव के रिसर्च के लिए भी 50 लाख रुपये तक की अतिरिक्त सहायता मिलेगी. इससे परियोजनाओं की बेहतर योजना बनाने और संभावित चुनौतियों को पहले ही समझने में मदद मिलेगी.
2030 तक 5,000 मेगावाट का लक्ष्य
सरकार ने इस योजना के तहत अगले कुछ सालों में 5,000 मेगावाट फ्लोटिंग सोलर क्षमता विकसित करने का लक्ष्य रखा है. वर्तमान में देश में लगभग 700 मेगावाट फ्लोटिंग सोलर क्षमता मौजूद है. यानी आने वाले सालों में इस क्षमता को करीब सात गुना बढ़ाने की तैयारी की जा रही है. इस लक्ष्य को हासिल करने के लिए केंद्र और राज्य सरकारें मिलकर अलग-अलग जलाशयों और बांधों पर नई परियोजनाएं शुरू करेंगी.
मध्य प्रदेश बना फ्लोटिंग सोलर का बड़ा केंद्र
देश का सबसे बड़ा फ्लोटिंग सोलर प्रोजेक्ट मध्य प्रदेश के ओंकारेश्वर फ्लोटिंग सोलर पार्क में बनाया जा रहा है. इसकी क्षमता लगभग 600 मेगावाट है और इसका निर्माण वर्ष 2022 में शुरू हुआ था. यह परियोजना मध्य प्रदेश सरकार और सोलर एनर्जी कॉरपोरेशन ऑफ इंडिया (SECI) के सहयोग से विकसित की जा रही है. सरकार को उम्मीद है कि इस तरह की बड़ी परियोजनाएं अन्य राज्यों में भी शुरू होंगी.
भारत में है बड़ी संभावना
सरकार के मुताबिक, नेशनल इंस्टीट्यूट ऑफ सोलर एनर्जी (NISE) ने हाल ही में देश के जलाशयों और अन्य उपयुक्त जल स्रोतों का अध्ययन किया है. इस अध्ययन में अनुमान लगाया गया है कि भारत में फ्लोटिंग सोलर ऊर्जा उत्पादन की क्षमता करीब 102.18 गीगावाट पीक (GWp) है. यानी अगर इस क्षमता का पूरा उपयोग किया जाए तो देश में स्वच्छ ऊर्जा उत्पादन में बड़ी बढ़ोतरी हो सकती है. इससे बिजली उत्पादन के साथ-साथ कार्बन उत्सर्जन कम करने और हरित ऊर्जा को बढ़ावा देने में भी मदद मिलेगी.
किसानों और आम लोगों को कैसे मिलेगा फायदा?
फ्लोटिंग सोलर परियोजनाओं से बिजली का उत्पादन बढ़ेगा और जलाशयों का पानी भी लंबे समय तक बचा रहेगा. क्योंकि पानी की सतह पर सोलर पैनल लगे होने से पानी कम मात्रा में भाप बनकर उड़ेगा, जिससे पानी की बचत होगी. इससे राज्यों को ज्यादा बिजली मिलेगी और भविष्य में बढ़ती ऊर्जा जरूरतों को पूरा करना भी आसान होगा. सरकार का मानना है कि प्रधानमंत्री सूर्य सरोवर योजना देश में स्वच्छ ऊर्जा को बढ़ावा देने में बड़ी भूमिका निभाएगी. अगर यह योजना तय समय पर पूरी हो जाती है, तो आने वाले वर्षों में भारत फ्लोटिंग सोलर ऊर्जा के क्षेत्र में दुनिया के प्रमुख देशों में अपनी मजबूत पहचान बना सकता है.