ICAR ने पेश की गन्ने की नई किस्म, रोग लगने का खतरा भी बहुत कम.. होगी बंपर पैदावार

ICAR-SBI के निदेशक डॉ. पी गोविंदराज ने कहा कि अब किसानों को नई किस्म विकसित करने की प्रक्रिया में भी शामिल किया जाएगा. इसी के तहत Co 18009 किस्म के बीज और जरूरी जानकारी किसानों को दी गई. बन्नारी अममन शुगर लिमिटेड के उपाध्यक्ष एस. शन्मुगसुंदरम ने फैक्ट्री की सब्सिडी योजनाओं के बारे में बताया और ICAR-SBI से स्थानीय मौसम के अनुसार जल्दी तैयार होने वाली नई किस्में विकसित करने की बात कही.

Kisan India
नोएडा | Updated On: 23 Mar, 2026 | 03:57 PM

Tamil Nadu News: गन्ना की खेती करने वाले किसानों के लिए खुशखबरी है. ICAR और शुगरकेन ब्रीडिंग इंस्टीट्यूट (SBI) ने गन्ने की एक ऐसी किस्म पेश की है, जिससे फसल पहले के मुकाले अब कम समय में तैयार हो जाएगी. इससे खेती में लागत पहले के मुकाबले कम होगी और किसानों को ज्यादा फायदा होगा. कृषि अधिकारियों का कहना है कि पुरानी गन्ने की किस्मों में पैदावार समय के साथ धीरे-धीरे कम हो रही है. इसलिए किसानों को अधिक पैदावार देने वाली किस्म Co 18009 की खेती करनी चाहिए.

दरअसल, तमिलनाडु सरकार गन्ने की खेती को बढ़ावा दे रही है. इसी के तहत ICAR और शुगरकेन ब्रीडिंग इंस्टीट्यूट  (SBI) ने कोयम्बटूर के अन्नूर तालुक के कंजापल्ली गांव में एक कार्यक्रम के दौरान मध्यम-देरी से पकने वाली गन्न की नई किस्म Co 18009 को किसानों के सामने पेश किया. इस दौरान संस्थान के निदेशक डॉ. पी गोविंदराज ने किसानों को Co 18009, Co 11015 और Co 14012 जैसी नई किस्में अपनाने की सलाह दी. उन्होंने कहा कि पुरानी किस्मों की उत्पादकता कम हो रही है और उनमें बीमारियों का खतरा ज्यादा है, जिससे किसानों की कमाई प्रभावित होती है.

गन्ने की खेती में मशीनीकरण है जरूरी

उन्होंने यह भी कहा किआज गन्ना किसानों को मजदूरों की कमी की समस्या से गुजरना पड़ रहा है. मजदूरों की कमी के चलते कई किसान गन्ने की खेती  करने से कतरा रहे हैं. इसलिए गन्ना खेती को लाभकारी बनाए रखने के लिए किसानों को तकनीकों का सहारा लेना चाहिए. उन्होंने कहा कि गन्ने की खेती में करीब 75 फीसदी काम का मशीनीकरण जरूरी है.

नई किस्म विकसित करने की प्रक्रिया में किसान होंगे शामिल

डॉ. पी गोविंदराज ने कहा कि अब किसानों को नई किस्म विकसित करने की प्रक्रिया में भी शामिल किया जाएगा. इसी के तहत Co 18009 किस्म के बीज और जरूरी जानकारी किसानों को दी गई. बन्नारी अममन शुगर लिमिटेड के उपाध्यक्ष एस. शन्मुगसुंदरम ने फैक्ट्री की सब्सिडी योजनाओं के बारे में किसानों को बताया और ICAR-SBI से स्थानीय मौसम के अनुसार जल्द तैयार होने वाली नई किस्में विकसित करने की बात कही. वहीं, ICAR-SBI के प्रधान वैज्ञानिक डॉ. डी पुथिरा प्रताप ने कहा कि इस कार्यक्रम का मकसद Co 18009 किस्म पर किसानों से फीडबैक लेना था, जिसका प्रदर्शन निवार्था दुरैसामी के 1.9 एकड़ खेत में किया गया.

940 एकड़ में गन्ने की खेती हो रही है

कार्यक्रम के दौरान एक किसान ने 11 महीने पुरानी फसल का अपना अनुभव साझा किया और बताया कि यह किस्म बिना फूल आए तैयार हो जाती है. बड़ी बात यह है कि इसमें कांटे कम होते हैं और ज्यादा टिलरिंग होती है. किसानों ने कहा कि इस किस्म में ज्यादा इंटरनोड्स बनते हैं और उपज भी बहुत अच्छी मिलती है. डॉ. गोविंदराज ने उम्मीद जताई कि ऐसे नए प्रयोग गन्ने खेती में किसानों का भरोसा फिर से बढ़ाएंगे. फिलहाल कोयम्बटूर जिले में करीब 940 एकड़ में गन्ने की खेती हो रही है, जिससे लगभग 38,000 टन उत्पादन मिल रहा है. यह पहल तमिलनाडु में आधुनिक, ज्यादा उत्पादन देने वाली और मशीनों से होने वाली गन्ना खेती को बढ़ावा देने की दिशा में एक महत्वपूर्ण कदम है.

तमिलनाडु में गन्ने का रकबा

PIB की रिपोर्ट के मुताबिक, तमिलनाडु में 2023-24 के दौरान गन्ने की खेती का रकबा  करीब 1.52 लाख हेक्टेयर से घटकर लगभग 1.30 लाख हेक्टेयर रह गया था, यानी पिछले वर्षों की तुलना में थोड़ी कमी आई है. वहीं 2024 में राज्य का कुल गन्ना उत्पादन लगभग 159 लाख टन रहा. किसानों को समर्थन देने के लिए सरकार ने 2024-25 सत्र में करीब 1.30 लाख किसानों के लिए 297 करोड़ रुपये का विशेष प्रोत्साहन भी तय किया था.

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Published: 23 Mar, 2026 | 03:55 PM
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