मई की गर्मी में मछलियों पर बड़ा खतरा, मत्स्य विभाग ने किसानों को जारी की जरूरी चेतावनी

मई महीने की तेज गर्मी और मौसम बदलाव के कारण तालाबों में मछलियों के लिए खतरा बढ़ गया है. मत्स्य विभाग ने मछली पालकों को पानी में ऑक्सीजन संतुलित रखने, दवा छिड़काव करने और तालाब की नियमित निगरानी करने की सलाह दी है ताकि नुकसान से बचा जा सके.

Saurabh Sharma
नोएडा | Published: 10 May, 2026 | 08:22 PM

Fish Farming: बिहार सरकार के डेयरी, मत्स्य एवं पशु संसाधन विभाग के मत्स्य निदेशालय ने मई महीने में मछली पालकों के लिए जरूरी सलाह जारी की है. विभाग के अनुसार इस समय तेज गर्मी, ज्यादा आर्द्रता और असमय बारिश के कारण तालाबों के पानी में घुलनशील ऑक्सीजन की मात्रा तेजी से कम हो सकती है. इससे मछलियों की सेहत पर बुरा असर पड़ता है और कई बार बड़े नुकसान की स्थिति भी बन जाती है. ऐसे मौसम में मछली पालकों को तालाब की देखभाल और पानी की गुणवत्ता पर खास ध्यान देने की जरूरत है.

तालाब के पानी में क्यों घटती है ऑक्सीजन

मई महीने में तापमान काफी बढ़ जाता है. गर्मी के कारण तालाब का पानी  जल्दी गर्म हो जाता है, जिससे पानी में ऑक्सीजन की मात्रा कम होने लगती है. इसके साथ ही अगर बारिश हो जाए तो तालाब का संतुलन और बिगड़ सकता है. ऑक्सीजन कम होने पर मछलियां पानी की सतह पर आने लगती हैं और कई बार उनकी मौत भी हो सकती है. मत्स्य विभाग ने बताया कि मछली पालकों को सुबह और शाम तालाब की स्थिति जरूर देखनी चाहिए. अगर मछलियां बार-बार ऊपर आ रही हों तो यह ऑक्सीजन की कमी का संकेत हो सकता है. ऐसी स्थिति में तुरंत जरूरी कदम उठाने चाहिए ताकि नुकसान से बचा जा सके.

फाइटोप्लैंक्टन बनाए रखने के लिए करें यह काम

मत्स्य निदेशालय ने सलाह दी है कि तालाब के पानी में फाइटोप्लैंक्टन की मात्रा बनी रहनी चाहिए. फाइटोप्लैंक्टन पानी को स्वस्थ रखने में मदद करता है और मछलियों के लिए भी फायदेमंद होता है. इसके लिए हर महीने प्रति एकड़ तालाब में 15 किलोग्राम सिंगल सुपर फॉस्फेट घोलकर छिड़काव करना चाहिए. विभाग के अनुसार सही मात्रा में फॉस्फेट डालने से पानी की गुणवत्ता बेहतर रहती है और मछलियों का विकास भी अच्छा होता है. इससे तालाब का वातावरण संतुलित  बना रहता है और मछलियों को पर्याप्त पोषण मिलता है.

ऑक्सीजन बढ़ाने के लिए अपनाएं ये तरीके

अगर तालाब में ऑक्सीजन की कमी महसूस हो रही हो तो तुरंत घुलनशील ऑक्सीजन  बढ़ाने वाली दवा का सूखा छिड़काव करना चाहिए. विभाग ने प्रति एकड़ 500 ग्राम दवा डालने की सलाह दी है. इसके अलावा एयरेटर और एयर ब्लोयर मशीन का इस्तेमाल भी काफी फायदेमंद माना गया है. मत्स्य विभाग के अनुसार सुबह और शाम 4 से 6 घंटे तक एयरेटर चलाने से पानी में ऑक्सीजन की मात्रा बढ़ती है. इससे मछलियों को राहत मिलती है और उनकी मृत्यु का खतरा कम होता है. जिन मछली पालकों के पास बड़ी संख्या में मछलियां हैं, उन्हें इन मशीनों का उपयोग जरूर करना चाहिए.

समय पर सावधानी से होगा फायदा

विशेषज्ञों का कहना है कि मौसम बदलने के समय मछली पालन  में थोड़ी सी लापरवाही भी भारी नुकसान पहुंचा सकती है. इसलिए तालाब की नियमित जांच जरूरी है. पानी का रंग, मछलियों की गतिविधियां और तालाब की सफाई पर लगातार ध्यान देना चाहिए. मत्स्य विभाग ने मछली पालकों से अपील की है कि वे विभाग द्वारा जारी सलाह का पालन करें और किसी भी समस्या की स्थिति में तुरंत स्थानीय मत्स्य कार्यालय से संपर्क करें. सही समय पर उठाए गए कदम मछलियों को सुरक्षित रखने के साथ-साथ बेहतर उत्पादन और ज्यादा कमाई में भी मदद करेंगे.

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Published: 10 May, 2026 | 08:22 PM
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