उत्तर प्रदेश में योगी आदित्यनाथ सरकार के 10 वर्ष पूरे होने के साथ कृषि क्षेत्र की उपलब्धियों और चुनौतियों पर चर्चा तेज हो गई है. किसानों के बीच आधुनिक, प्राकृतिक और लाभकारी खेती के लिए पहचान बनाने वाले पद्मश्री से सम्मानित प्रगतिशील किसान भारत भूषण त्यागी ने इस विषय पर अपनी राय रखी. उनका मानना है कि सरकार ने कई महत्वपूर्ण कदम उठाए हैं, लेकिन अब खेती को लाभकारी बनाने के लिए सामूहिक मॉडल और किसानों की अपनी कंपनियों पर काम करना होगा.
नमामि गंगे और प्राकृतिक खेती को बताया मजबूत पहल
पद्मश्री भारत भूषण त्यागी ने किसान इंडिया को दिए इंटरव्यू में बताया कि योगी सरकार ने गंगा के तटीय क्षेत्रों में टिकाऊ खेती का मॉडल विकसित करने के लिए गंभीर प्रयास किए हैं. उन्होंने कहा कि नमामि गंगे और परंपरागत कृषि विकास योजना (PKVY) के तहत किसानों को प्राकृतिक और जैविक खेती से जोड़ने का काम हुआ है. उनके अनुसार यह परियोजना अभी पहले चरण में है. किसानों ने नई खेती को अपनाना शुरू किया है, लेकिन दूसरे चरण में इसे व्यावसायिक रूप देकर बाजार, प्रोसेसिंग और मूल्य संवर्धन से जोड़ना जरूरी होगा.
पांच से दस गांव मिलकर बनाएं किसान कंपनी
भारत भूषण त्यागी ने सबसे बड़ा सुझाव छोटे किसानों के लिए सामूहिक कृषि मॉडल का दिया. उन्होंने कहा कि आधा या एक एकड़ का किसान अकेले न तो आधुनिक तकनीक अपना पाता है और न ही बाजार में मजबूत स्थिति बना पाता है. उन्होंने प्रस्ताव रखा कि पांच से दस गांवों को मिलाकर किसानों की एक कंपनी बनाई जाए, जो उत्पादन, तकनीक, खरीद, प्रोसेसिंग और तैयार माल की बिक्री तक पूरा काम संभाले. उनका कहना है कि यदि मुनाफे में किसानों की हिस्सेदारी होगी तो ग्रामीण अर्थव्यवस्था भी मजबूत होगी.
समय पर खरीद और संसाधनों की व्यवस्था बनी उपलब्धि
त्यागी ने सरकारी वितरण प्रणाली को भी पिछले वर्षों की बड़ी उपलब्धियों में शामिल किया. उन्होंने कहा कि पहले अक्सर शिकायत रहती थी कि बुवाई के बाद बीज पहुंचता था या खाद समय पर नहीं मिलती थी, लेकिन अब सरकार का फोकस समय पर व्यवस्था बनाने पर है. उन्होंने कहा कि गेहूं और धान की खरीद व्यवस्था में सुधार हुआ है, वहीं बिजली और उर्वरकों की मांग को ब्लॉक स्तर पर पहचानकर आपूर्ति की योजना तैयार की जा रही है. इससे संसाधनों के बेहतर प्रबंधन में मदद मिल रही है.
खाद संकट पर बोले-यह चूक नहीं, अधूरापन है
रासायनिक खाद की कमी पर पूछे गए सवाल के जवाब में भारत भूषण त्यागी ने कहा कि असली समस्या केवल आपूर्ति नहीं, बल्कि वर्षों से चला आ रहा असंतुलित रासायनिक उर्वरक उपयोग है. अधिक उत्पादन की दौड़ में किसानों ने ज्यादा रसायनों का इस्तेमाल किया, लेकिन उसके दुष्परिणाम बाद में सामने आए. उन्होंने कहा कि अब वैज्ञानिक, सरकार और किसान तीनों प्राकृतिक एवं रसायन-मुक्त खेती की दिशा में सोच रहे हैं. उनके मुताबिक इसे सरकार की विफलता नहीं कहा जा सकता, बल्कि यह पहला चरण पूरा होने के बाद अगले चरण में सुधार का अवसर है. आने वाले समय में सामूहिक खेती, किसान कंपनियां और प्राकृतिक खेती का व्यावसायिक मॉडल ही उत्तर प्रदेश की कृषि को नई दिशा दे सकता है.