गन्ना किसानों के लिए बड़ी पहल, IPL-UPL मिलकर बढ़ाएंगी पैदावार, आधुनिक तकनीक से बढ़ेगी किसानों की कमाई

Sugarcane Farming: गुजरात के गन्ना किसानों की आय बढ़ाने के लिए इंडियन पोटाश लिमिटेड (IPL) और यूपीएल (UPL) ने तीन साल की साझेदारी की है. इस योजना के तहत 2,000 एकड़ में किसानों को आधुनिक खेती, बेहतर बीज, मिट्टी और पानी का सही प्रबंधन, डिजिटल निगरानी और वैज्ञानिक सलाह दी जाएगी.

Isha Gupta
नोएडा | Updated On: 6 Jul, 2026 | 08:00 AM

Gujarat Sugarcane Farming: गुजरात के गन्ना किसानों के लिए अच्छी खबर है. देश की प्रमुख उर्वरक कंपनी इंडियन पोटाश लिमिटेड (IPL) और कृषि रसायन कंपनी यूपीएल (UPL) ने मिलकर गन्ने की खेती को ज्यादा लाभदायक और टिकाऊ बनाने के लिए तीन साल की साझेदारी की है. इस पहल का मकसद किसानों की आय बढ़ाना, गन्ने की पैदावार में सुधार करना और खेती की लागत कम करना है.

इस योजना की शुरुआत गुजरात के कोडिनार शुगर मिल के आसपास के क्षेत्रों से होगी. यहां करीब 2,000 एकड़ में गन्ने की खेती करने वाले किसानों को नई तकनीक, आधुनिक खेती के तरीके और विशेषज्ञों का मार्गदर्शन मिलेगा.

किसानों को मिलेगा आधुनिक खेती का फायदा

इस समझौते के तहत किसानों को सिर्फ खाद या दवाइयों की जानकारी ही नहीं दी जाएगी, बल्कि पूरी खेती को बेहतर बनाने पर काम होगा. बिजनेस लाइन की रिपोर्ट के अनुसार इससे खेती में बीज के सही चयन से लेकर मिट्टी की जांच, पानी का बेहतर उपयोग, संतुलित उर्वरक प्रबंधन और फसल अवशेषों के सही इस्तेमाल तक हर पहलू पर किसानों को मदद मिलेगी. इसके साथ ही किसानों को आधुनिक कृषि तकनीकों और वैज्ञानिक तरीकों की ट्रेनिंग भी दी जाएगी, ताकि कम लागत में ज्यादा उत्पादन हासिल किया जा सके.

2,000 एकड़ में चलेगा विशेष अभियान

यह परियोजना गुजरात के कोडिनार शुगर मिल के कैचमेंट एरिया में लगभग 2,000 एकड़ गन्ने की खेती पर लागू की जाएगी. इस दौरान किसानों को नई तकनीक अपनाने के लिए लगातार मार्गदर्शन दिया जाएगा.

यूपीएल सस्टेनेबल एग्री सॉल्यूशंस (UPL SAS) की ओर से एक विशेष प्रोग्राम ऑफिसर नियुक्त किया जाएगा, जो गांव-गांव जाकर किसानों से सीधे संपर्क करेगा और खेत स्तर पर इस योजना को लागू करवाएगा.

खेती होगी ज्यादा टिकाऊ

इस पहल का सबसे बड़ा उद्देश्य केवल उत्पादन बढ़ाना नहीं, बल्कि खेती को भविष्य के लिए टिकाऊ बनाना भी है. इसके तहत रीजेनेरेटिव फार्मिंग (Regenerative Farming) यानी ऐसी खेती को बढ़ावा दिया जाएगा, जिससे मिट्टी की उर्वरता बनी रहे, पानी की बचत हो और रासायनिक इनपुट का संतुलित उपयोग किया जा सके. इससे लंबे समय में खेती की लागत घटेगी.

डिजिटल तकनीक से होगी निगरानी

इस परियोजना में डिजिटल तकनीक का भी इस्तेमाल किया जाएगा. खेतों की निगरानी, फसल की स्थिति और खेती से जुड़ी जरूरी जानकारी डिजिटल माध्यम से जुटाई जाएगी. इससे समय रहते समस्याओं की पहचान हो सकेगी और किसानों को सही सलाह मिल पाएगी. वैज्ञानिक खेती और डिजिटल मॉनिटरिंग के मेल से गन्ने की पैदावार में अच्छा सुधार देखने को मिल सकता है.

किसानों की आय बढ़ाने पर रहेगा जोर

इंडियन पोटाश लिमिटेड के मुख्य कृषि वैज्ञानिक यू.एस. तेवतिया ने कहा कि कंपनी का मकसद किसानों तक नई और टिकाऊ खेती की तकनीक पहुंचाना है. उनका कहना है कि, यूपीएल के साथ यह साझेदारी किसानों से जुड़ाव को और मजबूत करेगी और गन्ने की पैदावार बढ़ाने में मदद करेगी. उन्होंने यह भी बताया कि अगर किसान वैज्ञानिक तरीके से खेती करें, डिजिटल तकनीक से फसल की निगरानी करें और टिकाऊ खेती के तरीके को अपनाएं, तो प्राकृतिक संसाधनों की बचत के साथ बेहतर उत्पादन हासिल किया जा सकता है.

क्यों है यह पहल खास?

आज खेती में बढ़ती लागत, मौसम में बदलाव और मिट्टी की घटती उर्वरता किसानों के सामने बड़ी चुनौती बन चुके हैं. ऐसे समय में निजी कंपनियों और कृषि संस्थानों की साझेदारी किसानों के लिए नई उम्मीद बन सकती है.

अगर यह मॉडल सफल रहता है, तो भविष्य में इसे दूसरे राज्यों के गन्ना उत्पादक क्षेत्रों में भी लागू किया जा सकता है. इससे किसानों को बेहतर तकनीक, अधिक उत्पादन और ज्यादा आय का लाभ मिल सकता है. साथ ही देश में गन्ना उत्पादन को भी नई मजबूती मिलेगी.

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Published: 6 Jul, 2026 | 08:00 AM

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