मॉनसूनी बारिश के दौरान सप्लाई प्रभावित होने से आगामी कुछ सप्ताह में प्याज की खुदरा कीमतों में उछाल की आशंका जताई जा रही है. दरअसल, किसानों से प्याज की धीमी खरीद की वजह से तय बफर स्टॉक खरीद की तुलना में अब तक केवल 5 फीसदी प्याज ही स्टॉक किया जा सका है. जबकि, सरकार किसानों से खरीद के लिए प्याज का एमएसपी 5 बार बढ़ा चुकी है. धीमी सरकारी खरीद की कई वजहें हैं, लेकिन प्रमुख वजह किसानों को सही कीमत नहीं मिलना है. बाजार में प्याज का भाव 40 रुपये प्रति किलो है लेकिन किसान को सरकार 22 रुपये प्रति किलो से भी कम भाव दे रही है.
प्याज की धीमी खरीद खरीद ने मुश्किलें बढ़ाईं
केंद्र सरकार ने घरेलू प्याज जरूरत को पूरा करने के लिए बफर स्टॉक में कुल 2 लाख मीट्रिक टन खरीद का टारगेट तय किया है. खरीद 15 मई से शुरू की गई थी. लेकिन, आधिकारिक आंकड़ों के अनुसार अब तक केवल 5 फीसदी खरीद ही हो सकी है. खरीद की धीमी गति ने उपभोक्ता मामलों के मंत्रालय में चिंता बढ़ा दी है. मंत्रालय को डर है कि अगर मौसम की वजह से खरीफ की फसल को कोई नुकसान होता है और कीमतें बढ़ती हैं, तो बफर स्टॉक कम होने के कारण बाजार में जमाखोरी का खतरा बढ़ सकता है.
अच्छा भाव नहीं मिलने से बिक्री से पीछे हट रहे किसान
केंद्र सरकार कम सप्लाई वाले सीजन में कीमतों को नियंत्रित करने में मदद के लिए प्याज का बफर स्टॉक रखती है. बफर स्टॉक का आकार, खरीद की कीमतें और खरीद की अवधि बाजार की स्थितियों के आधार पर अलग-अलग होती हैं. इस साल महाराष्ट्र में प्याज किसान मार्च में रबी की फसल शुरू होने के बाद से ही विरोध कर रहे थे क्योंकि उन्हें अच्छी कीमतें नहीं मिल रही थीं.
5 बार प्याज का एमएसपी बढ़ाने के बाद खरीद समयसीमा भी बढ़ाई
सरकार ने शनिवार को प्याज खरीद की कीमत बढ़ाकर 21.25 रुपये प्रति किलोग्राम कर दी. 15 मई को खरीद प्रक्रिया शुरू होने के बाद से यह पांचवीं बार कीमत बढ़ाई गई है. इसके बावजूद किसान कम कीमत मिलने के चलते विरोध कर रहे हैं और उपज बिक्री से बच रहे हैं. ऐसे में सरकार ने खरीद टारगेट पूरा करने के लिए अब खरीद की समय सीमा भी 30 जून से बढ़ाकर 31 जुलाई कर दी है.
निजी व्यापारियों से अच्छी कीमत मिल रही
महाराष्ट्र प्याज किसान संघ ने प्रेस विज्ञप्ति में कहा कि सरकार ने तब खरीद शुरू नहीं की जब छोटे किसानों के पास प्याज रखने की क्षमता या जरूरी स्टोरेज नहीं था और वे कम कीमतों पर प्याज बेचने को मजबूर थे. अब, जब सरकार प्याज खरीदना चाहती है, तो किसान इसे बेचना नहीं चाहते क्योंकि उन्हें मंडियों में बेहतर कीमतें मिल रही हैं. सरकार की ओर से दी जा रही खरीद की कीमतें बाजार में चल रही कीमतों से कम रही हैं. वहीं, खुदरा बाजार में उपभोक्ता 40 रुपये प्रति किलो पर प्याज खरीद रहे.
प्याज खरीद में नए संगठनों को शामिल करने से हुई देरी
किसान संघ ने कहा कि बफर स्टॉक की खरीद, जो खुले बाजार में कीमतों को सहारा देती है, इस साल देर से शुरू हुई. ऐसा इसलिए हुआ क्योंकि सरकार ने नेशनल एग्रीकल्चरल कोऑपरेटिव मार्केटिंग फेडरेशन और नेशनल कंज्यूमर कोऑपरेटिव फेडरेशन के अलावा सेंट्रल वेयरहाउसिंग कॉरपोरेशन को भी इसमें शामिल किया. इसके अलावा बाजार के कुछ लोगों ने जमाखोरी शुरू कर दी है क्योंकि उनका मानना है कि सरकार के पास प्याज का स्टॉक कम होने से कीमतों में भारी उछाल आने पर बाजार में दखल देने की उसकी क्षमता कम हो जाएगी. सरकार ने माना है कि बाजार के कुछ लोगों ने प्याज की जमाखोरी शुरू कर दी है.