Onion Buffer Stock: देश में प्याज की कीमतों को नियंत्रित रखने के लिए सरकार हर साल बफर स्टॉक तैयार करती है, लेकिन इस बार इसकी शुरुआत काफी धीमी रही है. सरकार ने किसानों से प्याज खरीदने की कीमत तीन बार बढ़ाई, फिर भी खरीद में उम्मीद के मुताबिक तेजी नहीं आई. हालात ऐसे हैं कि जून महीने में अब तक केवल 2,000 टन प्याज ही खरीदा जा सका है, जबकि सरकार का लक्ष्य 2 लाख टन प्याज खरीदने का है.
तीन बार बढ़ी खरीद कीमत, फिर भी नहीं बढ़ी खरीद
सरकार ने इस सीजन में प्याज खरीद की कीमत लगातार बढ़ाई है.
- पहले 22 मई को कीमत 12.70 रुपये प्रति किलो से बढ़ाकर 15.80 रुपये की गई.
- इसके बाद 13 जून को इसे 16.50 रुपये प्रति किलो किया गया.
- फिर 20 जून को बढ़ाकर 17.30 रुपये प्रति किलो कर दिया गया.
इसके बावजूद खरीद की रफ्तार बहुत धीमी बनी हुई है. सरकारी एजेंसियां नेफेड (NAFED) और एनसीसीएफ (NCCF) अब तक तय लक्ष्य का केवल 1 प्रतिशत ही पूरा कर पाई हैं. PTI के अनुसार, 1 जून से अब तक लगभग 2,000 टन प्याज खरीदा गया है.
किसान क्यों नहीं बेच रहे प्याज?
बाजार से जुड़े लोगों का कहना है कि, कई किसान अभी अपनी उपज रोककर बैठे हैं. उन्हें उम्मीद है कि, आने वाले दिनों में प्याज के दाम और बढ़ सकते हैं. ऐसे में वे मौजूदा सरकारी कीमत पर प्याज बेचने के लिए तैयार नहीं हैं. व्यापारियों का कहना है कि मंडियों में प्याज की आवक अच्छी है, लेकिन किसानों की उम्मीदें ज्यादा हैं. सरकार द्वारा तीन बार कीमत बढ़ाने के बाद भी उन्हें यह दर संतोषजनक नहीं लग रही है. हालांकि, अब इस बात की संभावना काफी कम है कि सरकार आगे चलकर खरीद की दर फिर से बढ़ाएगी.
अच्छी क्वालिटी वाला प्याज निर्यात में जा रहा
खरीद में धीमापन आने की एक बड़ी वजह प्याज की क्वालिटी भी है. नासिक की लासलगांव मंडी के कारोबारियों के मुताबिक, अच्छी क्वालिटी वाला ‘ग्रेड A’ प्याज बाजार और निर्यात में बेहतर दाम पर बिक रहा है. ऐसे में 17.30 रुपये प्रति किलोग्राम की कीमत पर सरकारी एजेंसियों को ज्यादातर सामान्य क्वालिटी वाला प्याज ही मिल पा रहा है. यही कारण है कि सरकारी खरीद की प्रक्रिया उम्मीद के अनुसार आगे नहीं बढ़ रही.
बारिश ने भी बढ़ाई मुश्किल
इस साल बेमौसम बारिश का असर प्याज की फसल पर भी पड़ा है. बारिश की वजह से कई जगहों पर प्याज की क्वालिटी प्रभावित हुई है. खराब क्वालिटी वाली फसल को लंबे समय तक स्टोर करना भी आसान नहीं होता. सरकार बफर स्टॉक के लिए जो प्याज खरीदती है, उसे कई महीनों तक सुरक्षित रखा जाता है ताकि बाद में बाजार में सप्लाई कम होने पर उसका इस्तेमाल किया जा सके.
सरकार ने बदली स्टोरेज व्यवस्था
इस बार सरकार ने प्याज के भंडारण और खरीद व्यवस्था में कुछ बदलाव भी किए हैं. सेंट्रल वेयरहाउसिंग कॉर्पोरेशन (CWC) को स्टोरेज की जिम्मेदारी दी गई है. इसके अलावा नेफेड और एनसीसीएफ ने भी अपने खरीद नेटवर्क को बेहतर बनाने की कोशिश की है.
कृषि मंत्रालय के अनुमान के मुताबिक 2025-26 फसल साल में देश में करीब 307.71 लाख टन प्याज का उत्पादन हो सकता है, जो पिछले साल के लगभग बराबर है. हालांकि उत्पादन में कोई बड़ी कमी नहीं है, लेकिन अगर सरकारी खरीद इसी तरह धीमी रही तो भविष्य में बाजार में कीमतों को नियंत्रित करना चुनौतीपूर्ण हो सकता है. अब सबकी नजर इस बात पर है कि आने वाले महीनों में सरकार अपने बफर स्टॉक का लक्ष्य कितनी तेजी से पूरा कर पाती है.