ड्राई फ्रूट्स हुए महंगे, ईरान से सप्लाई घटने का भारतीय बाजार पर असर… दाम 20 फीसदी तक बढ़े

West Asia conflict impact: मौजूदा हालात में सबसे बड़ी दिक्कत सप्लाई चेन में आई बाधाओं की है. ईरान से आने वाले जहाजों के रास्ते प्रभावित हो रहे हैं और अफगानिस्तान के जरिए होने वाला व्यापार भी पूरी तरह सुचारु नहीं है. कुछ व्यापारी अब हवाई मार्ग से माल मंगाने की सोच रहे हैं, लेकिन इससे लागत काफी बढ़ जाती है.

Kisan India
नई दिल्ली | Published: 28 Apr, 2026 | 04:10 PM

West Asia conflict impact: पिछले कुछ समय से पश्चिम एशिया में चल रहे तनाव का असर अब धीरे-धीरे भारत के आम बाजार तक पहुंचने लगा है. खासकर सूखे मेवे यानी ड्राई फ्रूट्स की कीमतों में आई बढ़ोतरी ने लोगों की चिंता बढ़ा दी है. पिस्ता और खजूर जैसे रोजमर्रा में इस्तेमाल होने वाले ड्राई फ्रूट अब पहले से महंगे हो गए हैं, जिससे घर का बजट भी प्रभावित हो रहा है.

कीमतों में अचानक बढ़ोतरी

बिजनेस लाइन की खबर के अनुसार, पिछले करीब दो महीनों में ईरान से आने वाले पिस्ता और खजूर के दाम 10 से 20 प्रतिशत तक बढ़ गए हैं. इसके पीछे सबसे बड़ी वजह पश्चिम एशिया में चल रहा संघर्ष है, जिससे वहां की सप्लाई प्रभावित हुई है. ड्राई फ्रूट उद्योग से जुड़े विशेषज्ञ राहुल कामथ बताते हैं कि ईरान इन उत्पादों का एक बड़ा सप्लायर है, लेकिन मौजूदा हालात के कारण वहां से आने वाली सप्लाई करीब 30 प्रतिशत तक घट गई है.

अभी क्यों कम दिख रहा असर

फिलहाल बाजार में इसका असर ज्यादा बड़ा नहीं दिख रहा है, क्योंकि अभी ड्राई फ्रूट्स की मांग का पीक सीजन नहीं है. आमतौर पर जून-जुलाई से मांग बढ़नी शुरू होती है और दिवाली तक यह अपने चरम पर पहुंच जाती है. यही वजह है कि अभी कीमतों में बढ़ोतरी तो दिख रही है, लेकिन बाजार पूरी तरह अस्थिर नहीं हुआ है. हालांकि आने वाले महीनों में स्थिति बदल सकती है.

भारत में कितना बड़ा है बाजार

भारत में पिस्ता और खजूर का बाजार काफी बड़ा है. पिस्ता का बाजार लगभग 5,000 करोड़ रुपये का है, जबकि खजूर का बाजार करीब 3,000 करोड़ रुपये का माना जाता है.

भारतीय ग्राहकों को ईरानी पिस्ता और खजूर खास तौर पर पसंद आते हैं, क्योंकि इन्हें बेहतर गुणवत्ता वाला माना जाता है. ऐसे में जब ईरान से सप्लाई कम होती है, तो उसका असर सीधे भारतीय बाजार पर पड़ता है.

सप्लाई चेन में आई रुकावट

मौजूदा हालात में सबसे बड़ी दिक्कत सप्लाई चेन में आई बाधाओं की है. ईरान से आने वाले जहाजों के रास्ते प्रभावित हो रहे हैं और अफगानिस्तान के जरिए होने वाला व्यापार भी पूरी तरह सुचारु नहीं है. कुछ व्यापारी अब हवाई मार्ग से माल मंगाने की सोच रहे हैं, लेकिन इससे लागत काफी बढ़ जाती है. वहीं कुछ लोग अमेरिका से बादाम मंगाकर कमी को पूरा करने की कोशिश कर रहे हैं. इतना ही नहीं, कीमतें बढ़ने का असर सिर्फ जेब पर ही नहीं, बल्कि बिक्री पर भी पड़ रहा है. खबर के अनुसार, कई दुकानदारों का कहना है कि महंगे दामों की वजह से लोग पहले जितना ड्राई फ्रूट नहीं खरीद रहे हैं.

तस्करी और सख्त निगरानी

कुछ खबरें यह भी हैं कि ईरान से छोटे स्तर पर ड्राई फ्रूट्स की तस्करी हो रही है, लेकिन यह काफी जोखिम भरा है. खासकर होर्मुज जलडमरूमध्य में कड़ी निगरानी होने के कारण ऐसे रास्ते सुरक्षित नहीं माने जाते. इसके अलावा ईरान ने खुद भी कुछ निर्यात प्रतिबंध लगाए हैं, जिससे भारत और यूरोप दोनों जगह सप्लाई प्रभावित हुई है.

ड्राई फ्रूट कारोबार से जुड़े विशेषज्ञों का मानना है कि दुनिया भर में ड्राई फ्रूट्स की मांग लगातार बढ़ रही है और 2026 तक यह बाजार 11.06 बिलियन डॉलर तक पहुंच सकता है. हालांकि उन्होंने यह भी माना कि मौजूदा समय में भू-राजनीतिक हालात के कारण सप्लाई चेन पर दबाव बना हुआ है.

काजू बाजार फिलहाल राहत में

जहां पिस्ता और खजूर महंगे हो रहे हैं, वहीं काजू के दाम अभी स्थिर बने हुए हैं. इसका कारण भारत में चल रही काजू की फसल है, जो मई तक जारी रहती है. फिलहाल काजू का थोक भाव करीब 12,800 रुपये प्रति क्विंटल है, लेकिन अगर आने वाले समय में ट्रांसपोर्ट महंगा हुआ या मानसून कमजोर रहा, तो इसके दाम भी बढ़ सकते हैं.

बदल रही लोगों की आदत

आजकल लोग ड्राई फ्रूट्स को सिर्फ त्योहारों तक सीमित नहीं रखते, बल्कि रोजाना की डाइट में भी शामिल कर रहे हैं. ऑनलाइन और क्विक डिलीवरी प्लेटफॉर्म्स ने इसे और आसान बना दिया है. यही वजह है कि मांग लगातार बनी रहती है और सप्लाई कम होने पर कीमतों में तेजी से असर दिखता है.

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