ईरान संकट और अमेरिकी टैरिफ की धमकी से सूखे मेवों के कारोबार में हड़कंप, ताजे फल फिलहाल सुरक्षित

ईरान के अंदर बढ़ती महंगाई, विरोध प्रदर्शन और आर्थिक अस्थिरता के कारण वहां के निर्यातक समय पर भुगतान करने में असमर्थ हो रहे हैं. इसका सीधा असर भारतीय आयातकों पर पड़ रहा है. फिलहाल ईरान से आने वाले फलों की खेप बंदर अब्बास पोर्ट के रास्ते भारत पहुंच रही है, क्योंकि चाबहार पोर्ट पर गतिविधियां सीमित बताई जा रही हैं.

Kisan India
नई दिल्ली | Published: 16 Jan, 2026 | 07:51 AM

Dry fruits trade: अंतरराष्ट्रीय हालात जब बिगड़ते हैं, तो उसका असर सबसे पहले व्यापार पर दिखाई देता है. इन दिनों पश्चिम एशिया में हालात कुछ ऐसे ही हैं. ईरान में जारी राजनीतिक अशांति और आर्थिक दबाव ने भारत के आयात कारोबारियों की चिंता बढ़ा दी है. खासकर सूखे मेवों के कारोबार से जुड़े लोग हालात पर करीबी नजर बनाए हुए हैं. हालांकि राहत की बात यह है कि सेब, कीवी और चेरी जैसे ताजे फलों का आयात अभी सामान्य रूप से जारी है.

ताजे फलों की सप्लाई फिलहाल सामान्य

दिल्ली के ताजे फल आयातकों का कहना है कि मौजूदा हालात में ताजे फलों के व्यापार पर कोई बड़ा संकट नजर नहीं आ रहा. जब तक सरकार की ओर से कोई रोक नहीं लगाई जाती और शिपमेंट की आवाजाही बनी रहती है, तब तक चिंता की कोई खास वजह नहीं है. फिलहाल ईरान से आने वाले फलों की खेप बंदर अब्बास पोर्ट के रास्ते भारत पहुंच रही है, क्योंकि चाबहार पोर्ट पर गतिविधियां सीमित बताई जा रही हैं.

व्यापारियों का यह भी कहना है कि भारत और ईरान के बीच ताजे फलों और केले जैसे उत्पादों का लेनदेन कई बार आपसी समायोजन के जरिए किया जाता है, जिससे भुगतान संबंधी दिक्कतें कुछ हद तक संभाल ली जाती हैं.

सूखे मेवों पर ज्यादा गहराया संकट

हालांकि सूखे मेवों के क्षेत्र में हालात उतने सहज नहीं हैं. पिस्ता, खजूर, केसर, किशमिश और बादाम जैसे उत्पादों के आयात पर अनिश्चितता के बादल मंडरा रहे हैं. ईरान के अंदर बढ़ती महंगाई, विरोध प्रदर्शन और आर्थिक अस्थिरता के कारण वहां के निर्यातक समय पर भुगतान करने में असमर्थ हो रहे हैं. इसका सीधा असर भारतीय आयातकों पर पड़ रहा है.

व्यापार से जुड़े जानकारों का कहना है कि भुगतान में देरी और बैंकिंग चैनलों की रुकावट के कारण नए सौदे करने में हिचकिचाहट बढ़ गई है. लंबी अवधि के अनुबंध फिलहाल जोखिम भरे माने जा रहे हैं.

अमेरिका के टैरिफ बयान ने बढ़ाई बेचैनी

सूखे मेवों के कारोबार में बेचैनी की एक बड़ी वजह संयुक्त राज्य अमेरिका का रुख भी है. अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने हाल ही में संकेत दिया है कि जो देश ईरान से व्यापार जारी रखेंगे, उन पर 25 फीसदी तक अतिरिक्त शुल्क लगाया जा सकता है. इस बयान ने वैश्विक व्यापार जगत में हलचल मचा दी है.

व्यापारी हालात पर रखे हुए हैं नजर

इन तमाम घटनाओं के चलते भारतीय आयातक बेहद सतर्क हो गए हैं. बंदरगाहों पर कामकाज, कस्टम क्लियरेंस और अंतरराष्ट्रीय भुगतान व्यवस्था पर लगातार नजर रखी जा रही है. हालात और बिगड़ने की आशंका को देखते हुए भारत सरकार ने ईरान में रह रहे भारतीय नागरिकों को भी सतर्क रहने और जरूरत पड़ने पर देश छोड़ने की सलाह दी है.

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