Chaitra Navratri: महाअष्टमी पर इस तरह करें माता की पूजा, जानें कन्या पूजन की सही विधि और शुभ मुहूर्त
Chaitra Navratri Maha Ashtami: चैत्र नवरात्रि के आठवें दिन महाअष्टमी का विशेष धार्मिक महत्व माना जाता है, जो मां महागौरी को समर्पित है. इस दिन श्रद्धा और विधि-विधान से पूजा करने से जीवन के कष्ट दूर होते हैं और सभी मनोकामनाएं पूरी होने की मान्यता है. खासतौर पर कन्या पूजन का इस दिन खास महत्व होता है, जिससे घर में सुख, शांति और समृद्धि का वास होता है. शुभ मुहूर्त में पूजा करने से इसका फल कई गुना बढ़ जाता है जिससे भक्तों को माता का विशेष आशीर्वाद प्राप्त होता है.
Maha Ashtami 2026: चैत्र नवरात्रि का पावन पर्व 19 मार्च 2026 से शुरू होकर अब अपने अंतिम चरण में पहुंच चुका है. नवरात्रि के आठवें दिन यानी 26 मार्च को महाअष्टमी का पर्व मनाया जाएगा, जो देवी की उपासना के लिए बेहद महत्वपूर्ण माना जाता है. गाजियाबाद के ज्योतिषाचार्य राकेश चतुर्वेदी ने किसान इंडिया को बताया कि, यह दिन नवदुर्गा के आठवें स्वरूप मां महागौरी को समर्पित होता है. धार्मिक मान्यता है कि इस दिन विधि-विधान से पूजा करने पर जीवन के कष्ट दूर होते हैं और भक्तों को सुख-समृद्धि की प्राप्ति होती है.
मां महागौरी का दिव्य और शांत स्वरूप
मां महागौरी का स्वरूप बेहद शांत, सौम्य और उज्ज्वल माना जाता है. ‘महा’ का अर्थ है अत्यंत और ‘गौरी’ का अर्थ है श्वेत वर्ण. उनका रंग शंख और कुंद के फूल के समान उजला (सफेद) होता है, जो पवित्रता और शांति का प्रतीक है. मां सफेद वस्त्र धारण करती हैं और वृषभ (बैल) पर सवार रहती हैं, इसलिए उन्हें ‘वृषारूढ़ा’ के नाम से भी जाना जाता है. उनकी चार भुजाएं होती हैं, दाहिने हाथ में त्रिशूल और अभय मुद्रा, जबकि बाएं हाथ में डमरू और वरमुद्रा होती है.
पौराणिक कथा के अनुसार, कठोर तपस्या के कारण उनका शरीर काला हो गया था, लेकिन भगवान शिव की कृपा से गंगाजल पड़ने के बाद वे अत्यंत गौर और तेजस्वी हो गईं. तभी से उन्हें महागौरी के नाम से जाना जाता है.
महाअष्टमी 2026 का शुभ मुहूर्त
- अष्टमी तिथि प्रारंभ: 25 मार्च 2026, दोपहर 01:50 बजे
- अष्टमी तिथि समाप्त: 26 मार्च 2026, सुबह 11:48 बजे
- पूजा और व्रत: 26 मार्च को उदया तिथि के अनुसार
कन्या पूजन का शुभ समय:
- सुबह 06:18 से 07:50 तक
- सुबह 10:55 से दोपहर 03:31 तक
पूजा में क्या चढ़ाएं?
धार्मिक मान्यताओं के अनुसार, मां महागौरी को सफेद रंग के फूल अत्यंत प्रिय होते हैं.
- माता को मोगरा, चमेली और सफेद कनेर अर्पित करना शुभ माना जाता है
- नारियल और नारियल से बनी मिठाइयां चढ़ाने से माता प्रसन्न होती हैं
- मां महागौरी को हलवा-पूरी का भोग विशेष रूप से चढ़ाया जाता है
इस दिन गुलाबी और हरे रंग के वस्त्र पहनना शुभ माना जाता है. ये रंग सकारात्मक ऊर्जा और सौभाग्य का प्रतीक माने जाते हैं.
कन्या पूजन का महत्व और विधि
महाअष्टमी के दिन कन्या पूजन का विशेष महत्व होता है. इस दिन 2 से 10 साल तक की 9 कन्याओं को देवी का रूप मानकर पूजा जाता है.
- कन्याओं को घर बुलाकर उनके पैर धोए जाते हैं
- उन्हें आसन पर बैठाकर चुनरी ओढ़ाई जाती है
- हलवा, पूरी और काले चने का प्रसाद खिलाया जाता है
- अंत में दक्षिणा देकर उनका आशीर्वाद लिया जाता है
मान्यता है कि इस विधि से पूजा करने पर घर में सुख, शांति और समृद्धि आती है.
महाअष्टमी का दिन नवरात्रि का सबसे महत्वपूर्ण दिन माना जाता है. मां महागौरी की पूजा से जीवन के सभी कष्ट दूर होते हैं और सकारात्मक ऊर्जा का संचार होता है. सही विधि और श्रद्धा के साथ पूजा करने से भक्तों को विशेष फल की प्राप्ति होती है.