चंडीगढ़-मोहाली बॉर्डर से किसानों का धरना खत्म! सरकार ने दिया लिखित आश्वासन, इन मांगों पर बनी सहमति

Farmers Protest: चंडीगढ़-मोहाली बॉर्डर पर सात दिन से चल रहा किसानों का धरना सरकार के लिखित आश्वासन के बाद खत्म हो गया है. पंजाब सरकार के साथ पानी, किसानों के कर्ज, बिजली और बीज कानून, गन्ने के दाम व भुगतान समेत कई मांगों पर सहमति बनी है.

नोएडा | Updated On: 7 Sep, 2026 | 05:31 PM

Punjab Farmers Protest: चंडीगढ़-मोहाली सीमा पर पिछले सात दिनों से चल रहा किसानों का धरना आखिरकार खत्म हो गया है. संयुक्त किसान मोर्चा के नेतृत्व में किसान 1 सितंबर से अपनी अलग-अलग मांगों को लेकर प्रदर्शन कर रहे थे. किसानों और पंजाब सरकार के बीच हुई बातचीत के बाद कई मुद्दों पर सहमति बनी और सरकार की ओर से लिखित आश्वासन भी दिया गया. इसके बाद किसान नेता बलवीर सिंह राजेवाल ने धरना खत्म करने का ऐलान किया. हालांकि, किसानों का आंदोलन खत्म जरूर हुआ है, लेकिन अब असली नजर सरकार की ओर से किए गए वादों को लागू करने पर रहेगी. कई मांगों को लेकर विधानसभा में प्रस्ताव और चर्चा होनी है.

लिखित आश्वासन मिलने के बाद खत्म हुआ धरना

किसान नेताओं और पंजाब सरकार के मंत्रियों के बीच कई दौर की बातचीत हुई. किसानों ने साफ कर दिया था कि केवल बातचीत में किए गए वादों के आधार पर वे धरना खत्म नहीं करेंगे. उनकी मांग थी कि सरकार सभी सहमतियों को लिखित रूप में दे. किसान नेता रमिंदर सिंह पटियाला और एसकेएम के प्रवक्ता रवनीत सिंह बराड़ ने भी कहा था कि सरकार की लिखित चिट्ठी मिलने के बाद ही आगे का फैसला लिया जाएगा. अब सरकार की ओर से लिखित आश्वासन मिलने के बाद किसानों ने प्रदर्शन खत्म कर दिया है.

पंजाब के पानी पर विधानसभा में होगी चर्चा

किसानों की प्रमुख मांगों में पंजाब के पानी का मुद्दा भी शामिल रहा. किसान संगठनों ने लंबे समय से राज्य के जल संसाधनों से जुड़े पुराने समझौतों पर सवाल उठाए हैं. राजेवाल के मुताबिक, पंजाब के पानी से जुड़े समझौतों की समीक्षा की जाएगी. इस मुद्दे पर चर्चा के लिए पंजाब विधानसभा का विशेष सत्र बुलाने की बात भी कही गई है. उन्होंने कहा कि पंजाब के पानी का मुद्दा अब केंद्र सरकार के सामने भी उठाया जाएगा. किसान नेताओं का आरोप है कि 1966 से पंजाब के पानी से जुड़े मामलों में राज्य के साथ न्याय नहीं हुआ है. अब वे इस मुद्दे को आगे केंद्र के स्तर पर उठाने की तैयारी में हैं.

किसानों के कर्ज पर एकमुश्त राहत का प्रस्ताव

किसानों की एक बड़ी चिंता कर्ज भी है. इसको लेकर पंजाब सरकार विधानसभा में एकमुश्त कर्ज निपटारे का प्रस्ताव लाने की बात कह रही है. इस व्यवस्था में ब्याज का बोझ कम करने और मूल कर्ज की रकम में भी राहत देने का प्रस्ताव शामिल बताया गया है. हालांकि, किसानों को वास्तव में कितनी राहत मिलेगी और इसकी शर्तें क्या होंगी, यह विधानसभा में प्रस्ताव आने और सरकार के फैसले के बाद ही साफ होगा.

बिजली और बीज से जुड़े मुद्दे भी उठेंगे

किसानों ने बिजली संशोधन विधेयक और बीज विधेयक को लेकर भी अपनी चिंता सरकार के सामने रखी थी. इन दोनों मामलों पर पंजाब विधानसभा में प्रस्ताव लाने की बात कही गई है. किसान संगठनों की मांग है कि खेती से जुड़े किसी भी बड़े कानून या फैसले से पहले किसानों से बातचीत की जाए. उनका कहना है कि नई नीतियां बनाते समय किसानों के हितों को सबसे ऊपर रखा जाना चाहिए.

गन्ने के दाम और भुगतान पर भी राहत की उम्मीद

गन्ना किसानों के लिए उचित कीमत और समय पर भुगतान भी आंदोलन की प्रमुख मांगों में रहा. किसान नेताओं के मुताबिक, पंजाब सरकार यह सुनिश्चित करेगी कि राज्य के गन्ना किसानों को देश में सबसे ज्यादा भाव मिले. इसके साथ ही चीनी मिलों पर किसानों का भुगतान लंबे समय तक रोकने पर भी रोक लगाने की बात कही गई है. इससे गन्ना बेचने के बाद किसानों को अपने पैसे के लिए लंबे समय तक इंतजार नहीं करना पड़ेगा.

स्वामीनाथन आयोग और जमीन नीति का मुद्दा

किसानों ने स्वामीनाथन आयोग की सिफारिशों को लागू करने और जमीन को एक साथ मिलाकर इस्तेमाल करने वाली नीति को वापस लेने की मांग भी उठाई. किसान संगठनों का कहना है कि खेती और जमीन से जुड़े फैसलों में किसानों की राय को महत्व मिलना चाहिए. इन मुद्दों पर भी सरकार के साथ बातचीत हुई है और आगे संबंधित स्तर पर कार्रवाई का आश्वासन दिया गया है.

Published: 7 Sep, 2026 | 05:26 PM

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