गन्ना किसानों को मिलेंगे 1936 करोड़ रुपये, कोर्ट ने ब्याज राशि दबाए बैठी मिलों से वसूली का आदेश दिया

Sugarcane farmers Dues & Interest: राष्ट्रीय किसान मजदूर संगठन के नेता सरदार वीएम सिंह की याचिका पर सुनवाई करते हुए कोर्ट ने गन्ना किसानों के बकाया और ब्याज राशि मामले पर वसूली का आदेश दिया है. इसके साथ ही किसानों को बकाया और ब्याज की 1936 करोड़ रकम मिलना साफ हो गया है.

रिजवान नूर खान
नोएडा | Published: 4 Sep, 2026 | 04:21 PM

गन्ना किसानों के बकाया भुगतान पर लगने वाले ब्याज की राशि को कई सालों से दबाए बैठी चीनी मिलों पर हाईकोर्ट ने शिकंजा कस दिया है. राष्ट्रीय किसान मजदूर संगठन के नेता सरदार वीएम सिंह की याचिका पर सुनवाई करते हुए कोर्ट ने कहा कि पीठ के आदेश के बावजूद 2021 में भुगतान में देरी पर लगने वाले 15 फीसदी ब्याज की बजाय 12 फीसदी के प्रमाण पत्र जारी किए गए. कोर्ट ने इस मामले में चार गन्ना आयुक्तों को व्यक्तिगत रूप से पक्षकार बनाते हुए उनसे जवाब मांगा है. जबकि, जिलाधिकारियों को बकाया और ब्याज की राशि मिलाकर 1936 करोड़ की वसूली के आदेश दिए हैं.

गन्ना किसानों के हक में कोर्ट का बड़ा फैसला

गन्ना किसानों के बकाये की वसूली और उस पर देय ब्याज के मामले में इलाहाबाद हाई कोर्ट की लखनऊ पीठ ने सख्त रुख अपनाया है. कोर्ट ने पाया कि गन्ना आयुक्तों की ओर से जारी वसूली प्रमाणपत्रों में 15 फीसदी के बजाय 12 फीसदी ब्याज दर्शाए जाने से करीब 170 करोड़ रुपये की अतिरिक्त राशि की वसूली प्रभावित हुई है. कोर्ट ने इस मामले में चार गन्ना आयुक्तों को व्यक्तिगत रूप से पक्षकार बनाते हुए उनसे जवाब मांगा है कि हाई कोर्ट के 23 दिसंबर 2021 के फैसले के बावजूद 12 फीसदी ब्याज वाले वसूली प्रमाणपत्र क्यों जारी किए गए और उनके विरुद्ध अवमानना की कार्रवाई क्यों न की जाए.

चार आयुक्तों के जवाब अगली सुनवाई 15 अक्तूबर को मांगे गए

इलाहाबाद हाईकोर्ट के न्यायमूर्ति राजन राय और न्यायमूर्ति मंजीव शुक्ला की पीठ ने यह आदेश किसान मजदूर संगठन के संयोजक वीएम सिंह की ओर से दाखिल जनहित याचिका पर पारित किया. सुनवाई के दौरान कोर्ट को बताया गया था कि जिन चार अधिकारियों के कार्यकाल में ऐसे वसूली प्रमाणपत्र जारी हुए, उनमें संजय आर. भूसरेड्डी, प्रभु एन. सिंह, प्रमोद कुमार उपाध्याय और मिनिस्थी एस. शामिल हैं. संजय आर. भूसरेड्डी जून 2025 में सेवानिवृत्त हो चुके हैं. मामले की अगली सुनवाई 15 अक्टूबर को होगी.

किसानों का 1936 रुपये बकाया और ब्याज लंबित

गन्ना आयुक्त की ओर से दाखिल चार्ट के अनुसार विभिन्न वसूली प्रमाण पत्रों के तहत करीब 4405 करोड़ रुपये मूल गन्ना बकाया था. इसमें से लगभग 3318.50 करोड़ रुपये की वसूली हो चुकी है, जबकि करीब 1087 करोड़ मूलधन अभी बाकी है. इस पर 15 फीसदी की दर से देय व्याज करीब 849.52 करोड़ रुपये बैठता है और कोर्ट को बताया गया कि इस ब्याज की राशि में से अभी तक कोई वसूली नहीं हुई है. इस तरह से बकाया और ब्याज की राशि मिलाकर करीब 1936 करोड़ की वसूली लंबित है.

जिलाधिकारियों को गन्ना बकाया राशि वसूलने का आदेश

राष्ट्रीय किसान मजदूर संगठन के नेता सरदार वीएम सिंह ने बताया कि गन्ना किसानों के बकाये पर हाई कोर्ट सख्त रुख अपनाया है. कोर्ट ने कहा है कि किसानों का पैसा रोका नहीं जा सकता है. नियम के अनुसार 14 दिनों के अंदर भुगतान करना होगा. ऐसा नहीं होने पर 15 फीसदी ब्याज लगने का नियम है. न्याय पीठ ने सभी जिलाधिकारियों को चीनी मिलों और संबंधित पक्षों से गन्ने का बकाया भुगतान वसूलने को कहा है.

Get Latest   Farming Tips ,  Crop Updates ,  Government Schemes ,  Agri News ,  Market Rates ,  Weather Alerts ,  Equipment Reviews and  Organic Farming News  only on KisanIndia.in

लेटेस्ट न्यूज़