तेलंगाना के सिविल सप्लाइज विभाग ने बकाया नहीं चुकाने वाले राइस मिलर्स पर कार्रवाई तेज कर दी है. अविभाजित मेडक जिले के ऐसे मिलर्स को नए नोटिस जारी किए जाएंगे, जिन्होंने कस्टम मिल्ड राइस (CMR) का बकाया नहीं चुकाया है. उन्हें बकाया राशि जमा करने के लिए अक्टूबर के अंत तक का समय दिया जाएगा.
अधिकारियों के मुताबिक, 2022-23 में कई राइस मिलर्स ने सरकार को तय समय पर देने के बजाय उसके लिए निर्धारित चावल दूसरे राज्यों में भेज दिया था. आरोप है कि कुछ मिलर्स ने बकाये की रकम को रियल एस्टेट और दूसरे कारोबार में भी लगा दिया. सरकार के आदेश पर सिविल सप्लाइज विभाग ने बकाया वसूलने के लिए डिफॉल्टर राइस मिलर्स को पहले 31 अगस्त तक भुगतान करने का नोटिस दिया था. कई मिलर्स ने अब तक बकाया नहीं चुकाया है. ऐसे में विभाग दोबारा नोटिस जारी कर उन्हें अक्टूबर के अंत तक भुगतान का समय दे रहा है.
संगारेड्डी के 5 मिलर्स से भी वसूली की तैयारी
सिविल सप्लाइज अधिकारियों के मुताबिक, मेडक जिले के करीब 30 राइस मिलर्स पर लगभग 100 करोड़ रुपये बकाया हैं. उन्हें एक-दो दिन में नए नोटिस जारी किए जाएंगे. सिविल सप्लाइज डीएम जयश्री ने द न्यू इंडियन एक्सप्रेस से कहा कि संगारेड्डी जिले के 5 राइस मिलर्स पर भी सरकार का करीब 20 करोड़ रुपये बकाया है. समय सीमा बढ़ाए जाने के बाद इन मिलर्स को भी नए नोटिस जारी किए जाएंगे.
अक्टूबर तक बकाया नहीं चुकाया तो राइस मिलर्स पर होगी कार्रवाई
सिविल सप्लाइज डीएम जयश्री ने चेतावनी दी है कि अगर राइस मिलर्स ने अक्टूबर के अंत तक बकाया राशि जमा नहीं की, तो उनके खिलाफ रेवेन्यू रिकवरी एक्ट के तहत कार्रवाई की जा सकती है. अधिकारियों के मुताबिक, सिद्दिपेट जिले के 10 राइस मिलर्स पर भी सरकार का बकाया है. विभाग अक्टूबर के अंत तक इनसे भी राशि वसूलने की कोशिश कर रहा है. इस बीच, बकाया चुकाने के बढ़ते दबाव के बीच राइस मिलर्स ने बुधवार को हैदराबाद में बैठक बुलाई है. राइस मिलर्स एसोसिएशन ने राज्यभर के मिल मालिकों को बैठक में शामिल होने के लिए आमंत्रित किया है. व्हाट्सऐप के जरिए दी गई जानकारी के मुताबिक, कुछ सेवानिवृत्त अधिकारी भी बैठक में शामिल होंगे.
तेलंगाना में 900 करोड़ के धान की कमी का मामला
वहीं, पिछले महीने तेलंगाना में विजिलेंस एंड एनफोर्समेंट (V&E) की कार्रवाई में पिछले तीन हफ्तों के दौरान करीब 900 करोड़ रुपये के धान की कमी का मामला सामने आया था. सरकार ने यह धान चावल मिल मालिकों को दिया था, जिसे कस्टम मिलिंग के बाद चावल के रूप में सरकार को लौटाना था. कई मिल मालिकों ने तय समय पर धान के बदले चावल नहीं लौटाया. सरकार की सख्ती के बाद अब मिल मालिकों से वसूली शुरू हो गई है. सरकार ने साफ संदेश दिया है कि धान का पैसा चुकाएं या जेल जाने के लिए तैयार रहें. इसके बाद कई मिल मालिकों ने बकाया राशि जमा करनी शुरू कर दी है. अब तक करीब 700 करोड़ रुपये की वसूली हो चुकी है.