Chandra Grahan: 3 मार्च को लगेगा साल का पहला चंद्र ग्रहण! इन 5 राशियों के लिए बढ़ सकती हैं परेशानियां
Lunar Eclipse 2026: साल 2026 का पहला चंद्र ग्रहण 3 मार्च को लगने जा रहा है, जिसका सूतक काल सुबह से प्रभावी रहेगा. यह खगोलीय घटना भारत के कुछ हिस्सों में दिखाई देगी और ज्योतिषीय मान्यताओं के अनुसार कई राशियों पर इसका खास प्रभाव भी नजर आ सकता है. सूतक काल के दौरान धार्मिक नियमों का पालन करने की सलाह दी जाती है.
Chandra Grahan 2026: साल 2026 का पहला चंद्र ग्रहण फाल्गुन मास में 3 मार्च को पड़ रहा है. यह ग्रहण कई मायनों में खास माना जा रहा है, क्योंकि यह ग्रस्तोदय चंद्र ग्रहण होगा. यानी चंद्रमा के उदय के साथ ही ग्रहण की स्थिति दिखाई देगी. देश के कुछ हिस्सों में यह खगोलीय घटना देखी जा सकेगी. लखनऊ के ज्योतिषी, राकेश पांडे बताते हैं कि, इसका प्रभाव अलग-अलग राशियों और देश की परिस्थितियों पर भी पड़ सकता है. इस ग्रहण की शुरुआत दोपहर 3:21 बजे होगी और यह शाम 6:46 बजे तक रहेगा. कुल अवधि लगभग 3 घंटे 27 मिनट की रहेगी.
सूतक काल कब से होगा प्रभावी?
ज्योतिषी राकेश पांडे बताते के अनुसार, चंद्र ग्रहण का सूतक काल ग्रहण शुरू होने से लगभग 9 घंटे पहले प्रारंभ हो जाता है. इस आधार पर 3 मार्च की सुबह लगभग 6:20 बजे से सूतक काल लागू माना जाएगा. सूतक काल ग्रहण समाप्ति तक प्रभावी रहेगा. इस दौरान किसी भी प्रकार के शुभ या मांगलिक कार्य करने से बचने की सलाह दी जाती है. चूंकि यह समय होली के आसपास पड़ रहा है, इसलिए त्योहार से जुड़े कुछ धार्मिक कार्य प्रभावित हो सकते हैं.
इन 5 राशियों को रहना होगा सावधान
ज्योतिषीय आकलन के अनुसार, इस चंद्र ग्रहण का असर सभी राशियों पर अलग-अलग तरह से पड़ सकता है. विशेष रूप से मेष, सिंह, कर्क, वृश्चिक और मीन राशि के जातकों के लिए यह समय चुनौतीपूर्ण माना जा रहा है. इन राशियों के लोगों को कार्यक्षेत्र में अचानक बाधाओं का सामना करना पड़ सकता है. योजनाएं पूरी होने में देरी हो सकती है और अपेक्षित परिणाम न मिल पाने से मानसिक तनाव बढ़ सकता है. कारोबार से जुड़े लोगों को लेन-देन और निवेश में सतर्कता बरतनी चाहिए. अनियोजित खर्चे भी परेशानी का कारण बन सकते हैं.
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सूतक काल में क्या न करें?
धार्मिक परंपराओं के अनुसार, सूतक काल के दौरान पूजा-पाठ, मूर्तियों का स्पर्श और किसी भी प्रकार के शुभ कार्य करने से परहेज करना चाहिए. इसके अलावा, इस अवधि में भोजन पकाने और खाने से भी बचने की सलाह दी जाती है. नुकीली वस्तुओं का उपयोग न करने की भी मान्यता है. गर्भवती महिलाओं को विशेष सावधानी बरतने की सलाह दी जाती है और शांत वातावरण में समय बिताना बेहतर माना जाता है.
खगोलीय और धार्मिक महत्व
चंद्र ग्रहण केवल एक खगोलीय घटना ही नहीं, बल्कि धार्मिक दृष्टि से भी महत्वपूर्ण माना जाता है. वैज्ञानिक रूप से यह तब होता है जब पृथ्वी सूर्य और चंद्रमा के बीच आ जाती है और उसकी छाया चंद्रमा पर पड़ती है. वहीं धार्मिक मान्यताओं में इसे आत्मचिंतन और संयम का समय बताया गया है.
3 मार्च 2026 को पड़ने वाला साल का पहला चंद्र ग्रहण ज्योतिष और धर्म दोनों दृष्टियों से खास माना जा रहा है. सूतक काल के नियमों का पालन करते हुए सतर्कता बरतना लाभकारी हो सकता है.
Disclaimer: इस लेख में दी गई जानकारी धार्मिक मान्यताओं और सामान्य ज्योतिषीय आकलन पर आधारित है. Kisan India इसकी पूर्ण सत्यता का दावा नहीं किया जाता. अधिक जानकारी के लिए विशेषज्ञ से परामर्श लें.