UP में गेहूं के इन-हाउस प्रोसेसिंग को मिलेगा बढ़ावा, मंडी शुल्क में मिल सकती है छूट
मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने यूपी डाटा सेंटर क्लस्टर, प्रोजेक्ट गंगा और गेहूं प्रसंस्करण से जुड़े मुद्दों की समीक्षा की. उन्होंने यूपी को एआई सिटी और वैश्विक टेक हब बनाने पर जोर दिया. योजना का लक्ष्य 2040 तक बड़ी अर्थव्यवस्था, रोजगार और एआई इंफ्रास्ट्रक्चर विकसित करना है. भविष्य में एआई, क्लाउड, सेमीकंडक्टर जैसे सेक्टर आर्थिक विकास के मुख्य इंजन होंगे.
Uttar Pradesh News: मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने बुधवार को प्रदेश की भविष्य की अर्थव्यवस्था से जुड़े तीन अहम विषयों की समीक्षा की. इनमें उत्तर प्रदेश डाटा सेंटर क्लस्टर (UPDCC), प्रोजेक्ट गंगा और गेहूं के इन-हाउस प्रसंस्करण को बढ़ावा देने के लिए मंडी शुल्क में संभावित छूट जैसे मुद्दे शामिल रहे. बैठक में मुख्यमंत्री ने कहा कि डाटा सेंटर क्लस्टर राज्य के एआई मिशन की मजबूत आधारशिला बनेगा. उन्होंने निर्देश दिए कि इस परियोजना को केवल एनसीआर तक सीमित न रखा जाए, बल्कि प्रदेश के अन्य क्षेत्रों को भी इससे जोड़ा जाए. इसके लिए शुरुआत बुंदेलखंड औद्योगिक विकास प्राधिकरण (बीडा) क्षेत्र से करने का सुझाव दिया गया, जहां पर्याप्त भूमि उपलब्ध है. साथ ही, मुख्यमंत्री ने टाटा समूह सहित बड़ी टेक कंपनियों से संवाद कर लखनऊ को ‘एआई सिटी’ के रूप में विकसित करने की दिशा में तेजी से काम करने के निर्देश दिए.
बैठक में बताया गया कि उत्तर प्रदेश डाटा सेंटर क्लस्टर (UPDCC) राज्य को भारत ही नहीं, बल्कि ग्लोबल साउथ का सबसे बड़ा एआई कंप्यूट पावर सेंटर बनाने की दीर्घकालिक योजना है. इसका उद्देश्य उत्तर प्रदेश को आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस, डेटा सेंटर, क्लाउड इंफ्रास्ट्रक्चर और हाई-टेक डिजिटल मैन्युफैक्चरिंग का वैश्विक हब बनाना है. प्रस्तुतीकरण में कहा गया कि यह परियोजना केवल एक इंफ्रास्ट्रक्चर योजना नहीं है, बल्कि अगले 50 वर्षों के लिए प्रदेश की नई आर्थिक संरचना का रोडमैप है. इसके तहत वर्ष 2040 तक 5 लाख करोड़ डॉलर की अर्थव्यवस्था विकसित करने, 1.5 लाख से अधिक प्रत्यक्ष रोजगार सृजित करने और 5 गीगावॉट का एआई कंप्यूट कॉरिडोर तैयार करने का लक्ष्य रखा गया है.
2040 तक दुनिया की अर्थव्यवस्था बड़े बदलावों से गुजरेगी
बैठक में बताया गया कि वर्ष 2040 तक दुनिया की अर्थव्यवस्था बड़े बदलावों से गुजरेगी और इसका केंद्र एआई, क्लाउड, साइबर सिक्योरिटी, सेमीकंडक्टर, इलेक्ट्रिक वाहन, रोबोटिक्स और स्पेस टेक्नोलॉजी जैसे भविष्य के क्षेत्रों पर होगा. इन सभी सेक्टरों को मिलाकर वैश्विक बाजार का आकार करीब 29 से 48 ट्रिलियन डॉलर तक पहुंचने का अनुमान है. साथ ही कहा गया कि भारत के लिए भी ये क्षेत्र आने वाले समय में सबसे बड़े आर्थिक इंजन बन सकते हैं. खासकर एआई सॉफ्टवेयर और सेवाएं, क्लाउड सेवाएं, साइबर सिक्योरिटी, सेमीकंडक्टर, एयरोस्पेस और इलेक्ट्रिक व्हीकल जैसे सेक्टर देश की अर्थव्यवस्था को नई गति देने में अहम भूमिका निभाएंगे.
बैठक में इन विषयों पर चर्चा
बैठक में उत्तर प्रदेश की पांच प्रमुख ताकतों को रेखांकित किया गया, जिनमें भौगोलिक स्थिति, बड़ी मात्रा में उपलब्ध भूमि, युवा आबादी, तेजी से विकसित हो रहा इंफ्रास्ट्रक्चर और मजबूत प्रशासनिक नेतृत्व शामिल हैं. बताया गया कि उत्तर प्रदेश का इनलैंड लोकेशन होने के कारण यह समुद्री तूफानों और चक्रवातों जैसे प्राकृतिक जोखिमों से अपेक्षाकृत सुरक्षित है. साथ ही राज्य में एक्सप्रेसवे, एयरपोर्ट, लॉजिस्टिक्स नेटवर्क और बिजली व्यवस्था तेजी से मजबूत हो रही है. आईआईटी कानपुर, एनआईटी प्रयागराज समेत 50 से अधिक इंजीनियरिंग संस्थानों की मौजूदगी से यहां तकनीकी प्रतिभा की बड़ी उपलब्धता भी है.
मजबूत कनेक्टिविटी वाला इनलैंड एआई क्षेत्र
बैठक में उत्तर प्रदेश को ‘एशिया का सबसे सुरक्षित, विस्तार योग्य और मजबूत कनेक्टिविटी वाला इनलैंड एआई क्षेत्र’ बताया गया. इसमें कहा गया कि देश के प्रमुख फाइबर नेटवर्क यूपी से होकर गुजरते हैं और राज्य सभी समुद्री केबल लैंडिंग पॉइंट्स से जुड़ा हुआ है. साथ ही यह भी बताया गया कि राज्य के भीतर डेटा ट्रांसफर की लेटेंसी 5 मिलीसेकंड से कम है, जबकि मुंबई और चेन्नई जैसे बड़े डिजिटल हब से कनेक्टिविटी 5 से 12 मिलीसेकंड के बीच रहती है. इन सभी कारणों से उत्तर प्रदेश को वैश्विक टेक कंपनियों के लिए कम लागत वाला, अधिक स्केलेबल और बेहतर नेटवर्क रिडंडेंसी वाला आदर्श एआई इंफ्रास्ट्रक्चर हब माना जा रहा है.